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Supreme Court: 'क्या मौजूदा मानदंडों का वास्तव में पालन हो रहा', अनैतिक फार्मा प्रैक्टिस के मामलों पर कोर्ट
Thu, 04 Sep 2025 03:30 PM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 04 Sep 2025 03:30 PM IST
सार
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने यह टिप्पणी तब की, जब केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार पहले ही नियम बना चुकी है, इसलिए याचिका में की गई प्रार्थना निष्फल हो गई है। जस्टिस नाथ ने कहा, 'मुश्किल यह है कि व्यवस्था तो मौजूद है, लेकिन क्या उसका वास्तव में पालन होता या नहीं।'
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि असली परेशानी नियम बनाने में नहीं, बल्कि उनके लागू करने में है। अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दवा कंपनियों की दवाओं को बढ़ावा देने के लिए अपनाई जाने वाली अनैतिक मार्केटिंग पर रोक लगाने के लिए समान नियम लागू करने की मांग की गई है।
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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने यह टिप्पणी तब की, जब केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार पहले ही नियम बना चुकी है, इसलिए याचिका में की गई प्रार्थना निष्फल हो गई है। जस्टिस नाथ ने कहा, 'मुश्किल यह है कि व्यवस्था तो मौजूद है, लेकिन क्या उसका वास्तव में पालन होता या नहीं।'
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पिछले साल लागू की गई थी नई व्यवस्था: सिब्बल
इस मामले में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पिछले साल एक नई व्यवस्था लागू की गई थी। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा, 'महामहिमों की चिंता यही है कि अगर यह सिर्फ नाम का नियम है और असरदार नहीं है, तो इसका उद्देश्य क्या है।' इस पर विधि अधिकारी ने जवाब दिया, 'यह नियम बिल्कुल ताकतवर है और इसे लागू करने की पूरी शक्ति है।'
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सात अक्तूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज के लिए समान संहिता (यूसीपीएमपी) 2024 पिछले साल लागू हुई थी। मेहता ने कहा कि मामले की सुनवाई किसी ऐसे दिन हो जब लंबी बहस हो सके। कोर्ट ने अगली सुनवाई 7 अक्तूबर के लिए तय कर दी। मार्च 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की और केंद्र को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब मांगा था।
फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने दायर की थी याचिका
यह याचिका 'फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' ने दायर की थी। इसमें मांग की गई थी कि जब तक कोई सख्त कानून नहीं बनता, तब तक सुप्रीम कोर्ट दवा कंपनियों द्वारा अनैतिक मार्केटिंग प्रैक्टिस को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश निर्धारित कर सकता है या वैकल्पिक रूप से, मौजूदा संहिता को उचित संशोधनों/परिवर्धनों के साथ बाध्यकारी बना सकता है।
नियमों में डॉक्टरों के लिए आचार संहिता
याचिका में कहा गया कि 2002 के भारतीय चिकित्सा परिषद नियमों में डॉक्टरों के लिए आचार संहिता है, जिसमें दवा कंपनियों से गिफ्ट, यात्रा, मेहमाननवाजी या पैसे लेने पर रोक है। लेकिन ये नियम सिर्फ डॉक्टरों पर लागू होते हैं, दवा कंपनियों पर नहीं।
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दवा कंपनियों पर सीधे तौर पर लागू होने वाला कोई सख्त कानून नहीं
याचिका के अनुसार, अक्सर दवा कंपनियां डॉक्टरों को तोहफे, विदेश यात्राएं, मेहमाननवाजी और दूसरे फायदे देती हैं, ताकि उनकी दवाओं की बिक्री बढ़ सके। इससे डॉक्टरों के पर्चे लिखने का तरीका प्रभावित होता है और मरीजों के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है, जैसे जरूरत से ज्यादा दवाइयां लिखना, ज्यादा खुराक देना या गलत दवाओं का मेल लिखना। याचिका में कहा गया कि दवा कंपनियों पर सीधे तौर पर लागू होने वाला कोई सख्त कानून नहीं है, जिसकी वजह से यह अनैतिक प्रथाएं बिना रोकटोक जारी हैं।