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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, डॉक्टरों के पृथकवास को लेकर क्या-क्या कदम उठाए गए
Fri, 15 May 2020 02:55 PM IST
अनवर अंसारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Fri, 15 May 2020 02:55 PM IST
सार
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से डॉक्टरों के पृथकवास को लेकर उठाए गए कदमों के बारे में पूछा
- डॉक्टरों को वहां पृथक कराया जा रहा था, जहां कमरे और बाथरूम साझा करने पड़ रहे थे
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जांच में जुटे स्वास्थ्यकर्मी
- फोटो : PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र को निर्देश दिया कि कोविड-19 के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अस्पतालों के निकट ही पृथकवास के लिए उठाए गए कदमों के बारे में उसे अवगत कराया जाए।
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न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूति बी आर गवई की पीठ ने इस मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान केंद्र को यह निर्देश दिया। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इस बारे में जानकारी प्राप्त करके अगले सप्ताह उसे अवगत कराएं।
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इस मामले में याचिकाकर्ता डॉ. आरूषि जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों के रेजीडेंट डॉक्टरों को सात से 14 दिन की ड्यूटी करने के बाद पृथकवास किया जाना चाहिए। लेकिन इन चिकित्सकों को उन स्थानों पर पृथकवास कराया जा रहा है जहां उन्हें कमरे, बाथरूम साझा करने पड़ रहे हैं जबकि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें सामाजिक दूरी बनी रहे।
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रोहतगी ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था पृथकवास के मकसद को ही विफल करेगी और कोरोना योद्धा बीमार पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ यह चाहते हैं कि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ अग्रिम पंक्ति में मौजूद इन स्वास्थ्यकर्मियों को अस्पतालों के नजदीक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के लिए भी एक निर्धारित मानक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए क्योंकि ये अपने घरों से अस्पताल पहुंचने में अनेक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। आवास सोसायटियों में भी उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि इन डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए केंद्र ने सभी राज्य सरकारों को पर्याप्त संख्या में होटल और अतिथि गृहों की व्यवस्था करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन अगर कहीं कोई विसंगति है तो उसमें सुधार के लिए उसे प्राधिकारियों के संज्ञान में लाया जा सकता है।