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कौन रखेगा भ्रष्टाचार पर निगाह, 2013 में बना था कानून, अब तक नियुक्त नहीं हो सका है लोकपाल

Fri, 23 Feb 2018 06:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 23 Feb 2018 06:21 PM IST
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Supreme Court asks center why Lokpal not appointed in response AG said its under process
सुप्रीम कोर्ट
लोकपाल की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के करीब 10 महीने बीत जाने के बाद भी उस पर अमल नहीं किया जा सका है। इस बारे में कोर्ट में दाखिल अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि लोकपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।
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अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि एक मार्च को प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा स्पीकर की नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर बैठक है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 मार्च को तारीख तय की है। 
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गौरतलब है कि 27 अप्रैल 2017 को लोकपाल की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि, 'लोकपाल एक्ट पर बिना संशोधन के ही काम किया जा सकता है। केंद्र के पास इसका कोई तर्कसंगत जवाब नहीं है कि लोकपाल की नियुक्ति को इतने वक्त तक अधर में क्यों रखा गया। लोकपाल की नियुक्ति बिना नेता विपक्ष तय ही हो सकती है।'
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उल्लेखनीय है कि लोकपाल की चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, भारत के प्रधान न्यायाधीश या नामित सुप्रीम कोर्ट के जज और एक नामचीन हस्ती के होने का प्रावधान है।

28 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर फैसला सुरक्षित रखा था। केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोकपाल की नियुक्ति वर्तमान हालात में संभव नहीं है। लोकपाल बिल में कई सारे संशोधन होने हैं जो संसद में लंबित हैं।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे नेता विपक्ष नहीं हैं। कांग्रेस ने नेता विपक्ष का दर्जा मांगा था। लेकिन स्पीकर ने उनकी मांग को खारिज कर दिया था। इससे पहले भी ऐसा हुआ है जब संसद में नेता विपक्ष ना हो। इस संबंध में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को शामिल करने संबंधी संशोधन मानसून सत्र में पास होने की उम्मीद है। 

Supreme Court asks center why Lokpal not appointed in response AG said its under process
लोकसभा (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया था कि इस मसले पर संसद स्थायी समिति की रिपोर्ट पर गौर कर रही है। जिस पर कोर्ट ने कहा था कि हम यह जानना चाहते हैं कि सरकार लोकपाल कानून में क्या बदलाव लाना चाहती है। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने बताया था कि लोकपाल की नियुक्ति में सिर्फ नेता प्रतिपक्ष का ही मसला नहीं अटका है।

संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाओं के लिए एकीकृत ढांचे की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को लोकपाल के साथ एकीकृत करने की सिफारिश की गई है। 

सुप्रीम कोर्ट कॉमन कॉज नामक गैर सरकारी संगठन द्वारा जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने कहा कि, 'अदालत को इस मामले में दखल देना चाहिए और सबसे बड़े विपक्षी दल को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दे देना चाहिए।

लोकपाल की नियुक्ति के लिए सरकार दिलचस्पी नहीं ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझ कर संशोधन विधेयक को रोक रखा है।' 

वहीं दूसरी ओर सीबीआई प्रमुख, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और केंद्रीय सूचना आयुक्त की नियुक्ति के मामले में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दे दिया गया है। शांति भूषण ने कहा कि लोकपाल विधेयक वर्ष 2013 में पारित हो गया था और वर्ष 2014 में प्रभावी हो गया। इसके बावजूद अब तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो सकी है। 
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