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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- दो साल में कहां गायब हुईं रिलायंस कम्युनिकेशंस की संपत्तियां
Tue, 18 Aug 2020 09:15 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 18 Aug 2020 09:15 AM IST
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रिलायंस कम्युनिकेशंस (फाइल फोटो)
- फोटो : Social media
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पिछले दो सालों में अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलांयस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) की नेटवर्थ 37,000 करोड़ रुपये से घटकर 10,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है। इसपर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पूछा कि कंपनी की संपत्ति कहां गायब हो गईं और आरकॉम के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल से प्रतिक्रिया मांगी।
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न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, एस अब्दुल नजीर और एमआर शाह की पीठ ने उस समय आश्चर्य व्यक्त किया, जब वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दिवाला कार्यवाही शुरू होने के बाद कंपनी के मामलों का प्रबंधन करने के लिए नियुक्त किए गए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की तरफ से कहा कि कंपनी की लिक्विडेशन वैल्यू (परिसमापन मूल्य) 10,000 करोड़ रुपये है।
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पीठ ने कहा कि कंपनी की नेटवर्थ लगभग 37,000 करोड़ रुपये थी क्योंकि यह आंकड़ा 2018 के शीर्ष अदालत के फैसले में उल्लिखित है। उस समय अदालत बकाया राशि को लेकर आरकॉम और एरिक्सन इंडिया के बीच कानूनी लड़ाई पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, ‘संपत्ति कहां गायब हो गई हैं? फैसले में वर्णित आंकड़े और वर्तमान आंकड़े में बहुत बड़ा अंतर है।’
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लेनदारों की समिति द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार, कंपनी के वर्तमान मूल्य में स्पेक्ट्रम शामिल है, जिसकी कीमत 6,900-7,500 करोड़ रुपये है। दीवान ने कहा, ‘हम आंकड़ों को ठीक करने की कोशिश करेंगे।’ अदालत सरकार और दूरसंचार कंपनियों की दलील पर सुनवाई कर रही थी कि कैसे इनसॉल्वेंसी की कार्यवाही का सामना करने वाली कंपनियां एजीआर (समायोजित सकल राजस्व) बकाया का भुगतान करेंगी।
अदालत इस बात की जांच कर रही है कि क्या रिलायंस जियो को आरकॉम के एजीआर बकाया के भुगतान का निर्देश दिया जा सकता है क्योंकि वह 2016 से उसके स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल कर रहा है। आरकॉम पर सरकार के 31,000 करोड़ रुपये बकाया हैं।