एनजीओ पर लगाम के लिए कानून लाया जा रहा है या नहीं: सुप्रीम कोर्ट
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गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को रेग्युलेट करने व सरकारी फंड का दुरूपयोग करने वाले एनजीओ पर लगाम लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि या तो वह कानून लाए या अपने नए दिशानिर्देश को लागू करें।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि हमने इस मसले को लेकर पहले कई निर्देश जारी किए हैं और अब आपको सही निर्णय लेना है। पीठ ने इस मसले को गंभीर बताया है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि वह इस संबंध में निर्देश लेकर आएंगे कि क्या सरकार कानून लाने को इच्छुक है या नहीं, क्योंकि इसका निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाना है। एएसजी ने पीठ से सरकार का रुख बताने के लिए चार हफ्ते का वक्त मांगा।
पीठ ने कहा कि इस तरह के मसले पर वह सरकार को कानून बनाने का दबाव नहीं डाल सकती लेकिन बेहतर होगा अगर सरकार अपनी तरफ से पहल करें। कानून के अभाव में भी सरकार फंड का दुरूपयोग करने वाले एनजीओ के खिलाफ दीवानी और आपराधिक मुकदमा चला सकती है। पीठ ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते में अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने पीठ को बताया था कि इस संबंध में दिशानिर्देश का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इसकी जानकारी 76 मंत्रालय और विभागों को दी गई है। सरकार ने बताया था कि एनजीओ और स्वयंसेवी संस्थानों को 76 मंत्रालय और विभागों के द्वारा फंड जारी किया जाता है।
वर्ष 2015 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि देशभर में करीब 30 लाख एनजीओ हैं और इनमें से करीब 24 लाख एनजीओ आमदनी और खर्च का ब्यौरा नहीं देते हैं।