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Supreme Court: 'बलवंत सिंह रजोआना की दया याचिका पर 18 मार्च तक फैसला ले केंद्र', सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश
Mon, 20 Jan 2025 01:09 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 20 Jan 2025 01:09 PM IST
सार
पीठ रजोआना की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें रजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि रजोआना की दया याचिका पर फैसला लेने में बहुत देर हुई है।
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Supreme Court
- फोटो : PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि बलवंत सिंह रजोआना की दया याचिका पर 18 मार्च तक फैसला लें। बलवंत सिंह राजोआना को साल 1995 में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि हम आपको अंतिम मौका दे रहे हैं। या तो आप फैसला करें या फिर हम मेरिट के आधार पर सुनवाई करेंगे।
क्या कहा कोर्ट ने
पीठ में जस्टिस गवई के अलावा जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन भी शामिल हैं। पीठ रजोआना की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें रजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि रजोआना की दया याचिका पर फैसला लेने में बहुत देर हुई है। रजोआना के वकील ने कहा कि वह जेल में 29 साल बिता चुका है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। तुषार मेहता ने पीठ से छह हफ्ते का समय मांगा। इस पर पीठ ने कहा कि 'हम 18 मार्च को मेरिट का आधार पर सुनवाई करेंगे। तब तक अगर आप फैसला लेते हैं तो अच्छा, वरना हम मेरिट के आधार पर इसकी सुनवाई करेंगे।'
1995 में तत्कालीन सीएम की हत्या का दोषी
रजोआना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 25 सितंबर को केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा था। 31 अगस्त 1995 को पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह और 16 अन्य की एक बम विस्फोट में हत्या कर दी गई थी। यह विस्फोट चंडीगढ़ में नागरिक सचिवालय के गेट पर हुआ था। रजोआना के एक साथी दिलावर सिंह ने मानव बम बनकर खुद को विस्फोट किया था। इस मामले में साल 2007 में विशेष अदालत ने रजोआना को मौत की सजा सुनाई थी।
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क्या कहा कोर्ट ने
पीठ में जस्टिस गवई के अलावा जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन भी शामिल हैं। पीठ रजोआना की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें रजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि रजोआना की दया याचिका पर फैसला लेने में बहुत देर हुई है। रजोआना के वकील ने कहा कि वह जेल में 29 साल बिता चुका है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। तुषार मेहता ने पीठ से छह हफ्ते का समय मांगा। इस पर पीठ ने कहा कि 'हम 18 मार्च को मेरिट का आधार पर सुनवाई करेंगे। तब तक अगर आप फैसला लेते हैं तो अच्छा, वरना हम मेरिट के आधार पर इसकी सुनवाई करेंगे।'
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1995 में तत्कालीन सीएम की हत्या का दोषी
रजोआना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 25 सितंबर को केंद्र सरकार, पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा था। 31 अगस्त 1995 को पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह और 16 अन्य की एक बम विस्फोट में हत्या कर दी गई थी। यह विस्फोट चंडीगढ़ में नागरिक सचिवालय के गेट पर हुआ था। रजोआना के एक साथी दिलावर सिंह ने मानव बम बनकर खुद को विस्फोट किया था। इस मामले में साल 2007 में विशेष अदालत ने रजोआना को मौत की सजा सुनाई थी।
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