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नेताओं के जुर्म साबित होने की औसत दर बताएं : सुप्रीम कोर्ट

Wed, 01 Nov 2017 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 01 Nov 2017 01:10 AM IST
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Supreme Court ask average rate of leaders to be proven guilty
सुप्रीम कोर्ट
दोषी नेताओं के आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आपराधिक मामलों में जनप्रतिनिधियों के जुर्म साबित होने की औसत दर क्या है? साथ ही अदालत ने पूछा कि क्या नेताओं पर चलने वाले ट्रायल को एक वर्ष में पूरा करने के उसके आदेश का प्रभावी ढंग से पालन हो सका है?
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न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा, ‘हम यह जानना चाहते हैं कि जनप्रतिनिधियों की दोषसिद्धि का औसत क्या है। हम यह देखेंगे कि नेताओं को दोषी नहीं ठहराया जाता है, तो उसके पीछे क्या वजह रही।’ 
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पीठ ने याचिकाकर्ताओं से यह भी जानना चाहा कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कितने मामले लंबित हैं? कितने जनप्रतिनिधियों पर जुर्म साबित होने के बाद प्रतिबंध लगे? पीठ ने कहा कि अगर उनके पास इससे संबंधित कोई डाटा है तो उसे पेश किया जाए। आंकड़े चुनाव आयोग से प्राप्त किए जा सकते हैं। 
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याचिकाकर्ताओं से कोर्ट ने यह भी कहा कि आप सजा होने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने पर रोक को लेकर बहस कर रहे हैं, लेकिन अदालतों में 20-20 वर्ष तक मामले लंबित रहते हैं। इस दौरान वे चार कार्यकाल पूरा कर लेते हैं। 

ऐसे में यदि उन्हें छह वर्ष या आजीवन चुनाव लड़ने से रोक भी दिया जाए तो इसका क्या मतलब है? याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 34 फीसदी सांसदों का आपराधिक रिकॉर्ड है।

न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और उम्र सीमा भी तय करने की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि जनप्रतिनिधि भी अधिकारियों की तरह ही सरकारी नौकर हैं। अत: दोष साबित होने पर उन पर भी आजीवन प्रतिबंध लगना चाहिए। 


वहीं एक अन्य वकील कृष्णन वेणुगोपाल ने कहा कि दागी नेताओं की वजह से चुनाव की पवित्रता के साथ समझौता किया जा रहा है। याचिका में केंद्र और चुनाव आयोग को यह भी निर्देश देने को कहा गया है कि चुनाव के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और अधिकतम आयु सीमा तय करें। सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। 
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