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सुप्रीम कोर्ट: चीफ जस्टिस बोले- ट्रिब्यूनल नियुक्ति मामले में सरकार ने हमारे फैसले का सम्मान नहीं किया, जानें क्या है मामला
Thu, 24 Feb 2022 09:10 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 24 Feb 2022 09:10 PM IST
सार
चीफ जस्टिस रमण ने पहले भी ट्रिब्यूनल संशोधन अधिनियम पारित करने के लिए सरकार की आलोचना की थी। संशोधन के जरिए मद्रास बार एसोसिएशन मामले में इस न्यायालय द्वारा निरस्त किए गए प्रावधानों को फिर से वापस ले आया गया।
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमण
- फोटो : ani
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विस्तार
चीफ जस्टिस एनवी रमण ने गुरुवार को टिप्पणी की कि केंद्र सरकार ने न्यायधीकरण (ट्रिब्यूनल) संशोधन अधिनियम पारित करके मद्रास बार एसोसिएशन मामले में हमारे फैसले का सम्मान नहीं किया। चीफ जस्टिस ने कहा कि पिछली बार जस्टिस एल नाहेश्वर राव की पीठ ने फैसला सुनाया था। केंद्र ने फैसले का सम्मान नहीं किया और तुरंत अधिनियम में संशोधन कर दिया।
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चीफ जस्टिस रमण ने पहले भी ट्रिब्यूनल संशोधन अधिनियम पारित करने के लिए सरकार की आलोचना की थी। संशोधन के जरिए मद्रास बार एसोसिएशन मामले में इस न्यायालय द्वारा निरस्त किए गए प्रावधानों को फिर से वापस ले आया गया। ट्रिब्यूनल में नियुक्ति के मुद्दे के संबंध में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने सूचित किया है कि देशभर के ट्रिब्यूनल में लगभग सभी रिक्तियां भेरी जा चुकी है।
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पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल द्वारा भेजे गए एक ईमेल के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण और कैट सहित कुछ ट्रिब्यूनल को छोड़कर लगभग सभी रिक्तियां भर दी गई हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में नियुक्ति अभी भी चयन समिति के पास लंबित है, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश करते हैं।
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पीठ ने यह बात तब कही जब वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने ट्रिब्यूनल में रिक्तियों और न्यायधीकरण संशोधन अधिनियममें से संबंधित एक मामले का उल्लेख किया। दातार ने कहा कि न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम के बाद 50 वर्ष से कम आयु के वकील सदस्य बनने के पात्र नहीं हैं भले ही अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ऐसा भेद नहीं किया जा सकता है।
साथ ही अदालत ने निर्देश दिया था कि सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित किया जाना चाहिए लेकिन सरकार ने इसे फिर से चार वर्ष कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि जहां तक ??चयन समिति का सवाल है, एक बार सुप्रीम कोर्ट की जज कमेटी का फैसला हो जाने के बाद उन नियुक्तियों में सरकार के लिए कुछ कहने का कोई सवाल ही नहीं है।
पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए उसे पांच जजों की पीठ का गठन करना पड़ सकता है। हालांकि दातार ने कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ भी मामले की सुनवाई कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट 24 मार्च को इस मसले पर विचार करेगी।