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Supreme Court: CBI-ED के दुरुपयोग के दावों को लेकर अनुराग ठाकुर का विपक्ष पर वार, लगाया बहानेबाजी का आरोप

Thu, 06 Apr 2023 06:16 AM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Thu, 06 Apr 2023 06:16 AM IST
सार

केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे जांच में शामिल होने के बजाय बहाने बनाते हैं और मामले में देरी करते हैं।

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Supreme Court: Anurag Thakur attacks opposition over CBI-ED misuse claims, accuses making excuses
अनुराग ठाकुर - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने ED-CBI के दुरुपयोग से जुड़ी कांग्रेस समेत 14 अन्य विपक्षी पार्टियों की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद पार्टियों ने अपनी याचिका वापस ले ली है। इस याचिका में विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के मनमाने उपयोग का आरोप लगाया गया था। 

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सुप्रीम कोर्ट के याचिका खारीज करने के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों के 'दुरुपयोग' के आरोपों को लेकर बुधवार को विपक्षी दलों पर निशाना साधाते हुए कहा कि सभी भ्रष्टाचारियों ने एक साथ हाथ मिलाने की कोशिश की, लेकिन अदालत में उनकी असलियत सामने आ गई।
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भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे जांच में शामिल होने के बजाय बहाने बनाते हैं और मामले में देरी करते हैं। यह जांच एजेंसियों का अधिकार है कि वे भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों की जांच करें ताकि उनके खिलाफ समय पर कार्रवाई हो।"
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ठाकुर ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे भ्रष्टाचार में लिप्त होने से कभी नहीं थकते और जब जांच एजेंसियां उनके दरवाजे पर दस्तक देती हैं, तो वे सड़कों पर उतर आते हैं और सदन को ठप कर देते हैं। याचिका पर विचार करने से मना करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि एक आपराधिक मामले के तथ्यों के बिना दिशानिर्देश निर्धारित करना "खतरनाक" होगा।


मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला की पीठ ने याचिका पर विचार करने के लिए अनिच्छुकता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं की शिकायतों को लेने के लिए अदालत हमेशा मौजूद रहती हैं क्योंकि वे आम नागरिकों के लिए काम करते हैं। अदालत के इस अनिच्छुकता को भांपते हुए विपक्षी पार्टियों  की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिघवी ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे मंजूर कर लिया गया।

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