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दुष्कर्म के आरोपी सरकारी वकील की जमानत के आदेश से सर्वोच्च न्यायालय हैरान
Fri, 25 Sep 2020 05:47 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 25 Sep 2020 05:47 AM IST
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supreme court
- फोटो : पीटीआई
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर हैरानी जताई, जिसमें एक महिला वकील के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी सरकारी वकील को अंतरिम जमानत दे दी गई थी। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट द्वारा दी गई राहत को अपने आदेश के विपरीत बताया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी थी अंतरिम जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश को किया दरकिनार
इसके साथ ही जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने तीन सितंबर के हाईकोर्ट आदेश को दरकिनार कर दिया। दरअसल, 24 वर्षीय महिला वकील ने 24 जुलाई को लखनऊ में सरकारी वकील शैलेन्द्र सिंह चौहान पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। महिला का आरोप है कि चौहान ने अपने चैंबर में ही उसके साथ दुष्कर्म किया था।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से चौहान को अग्रिम जमानत दिए जाने के आदेश के खिलाफ दाखिल कई गई पीड़ित की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पांच अगस्त को रोक लगा दी थी। पीठ ने कहा कि हमारे आदेश के बाद चौहान ने ट्रायल कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी, जो खारिज हो गई।
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इसके बाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए चौहान को अंतरिम जमानत दे दी। जमानत देने के पीछे हाईकोर्ट का तर्क था कि चौहान सम्मानित वकील हैं। वह पिछले 29 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहे हैं और उनकी कोई भी आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय हमारे आदेश के खिलाफ है।