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सुप्रीम कोर्ट: दीवानी विवाद में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने पर अदालत नाराज, यूपी पुलिस पर लगाया 50 हजार जुर्माना

Wed, 16 Apr 2025 02:20 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Wed, 16 Apr 2025 02:20 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि दीवानी विवादों में आपराधिक मामला दर्ज करना अस्वीकार्य है। पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस 50 हजार रुपये जुर्माना अदा करे। इसे पुलिस अधिकारियों से वसूल किया जाए। 

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Supreme Court angry over filing of criminal case in civil dispute, imposed fine of Rs 50,000 on UP Police
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दीवानी विवाद में आपराधिक मामला दर्ज करने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत में दीवानी विवादों (सिविल मामलों) में एफआईआर दर्ज करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की बाढ़ आ गई है। यह फैसलों का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। कोर्ट ने जुर्माने को दो पुलिस अधिकारियों से वसूल करने के लिए कहा।
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मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि दीवानी विवादों में आपराधिक मामला दर्ज करना अस्वीकार्य है। पीठ ने दोषी पुलिस अधिकारियों पर लगाया गया जुर्माना माफ करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि यूपी पुलिस 50 हजार रुपये का जुर्माना अदा करे और इसे अधिकारियों से वसूल करें। 
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी रिखब बिरानी और साधना बिरानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने एफआईआर इस तथ्य के बावजूद दर्ज की थी कि स्थानीय मजिस्ट्रेट अदालत ने बिरानी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के निर्देश देने की शिल्पी गुप्ता की दो अलग-अलग याचिकाओं को दो बार खारिज कर दिया था।

इससे पहले ऐसे ही एक मामले में सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में कानून का शासन पूरी तरह से खत्म हो चुका है। सिविल मामले को आपराधिक मामले में बदलना स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद राज्य पुलिस महानिदेशक को इस विशेष मामले में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया गया था।


यह था मामला
कोर्ट के रिकॉर्ड में यह बात सामने आई कि रिखब बिरानी ने मौखिक रूप से 1.35 करोड़ रुपये में शैली गुप्ता को कानपुर स्थित अपना गोदाम बेचने का समझौता किया था। गुप्ता ने बिक्री के आंशिक भुगतान के रूप में केवल 19 लाख रुपये दिए और 15 सितंबर 2020 तक बिरानी परिवार को तय 25 प्रतिशत अग्रिम राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद बिरानी ने गोदाम को 90 लाख रुपये में एक तीसरे पक्ष को बेच दिया और गुप्ता द्वारा दिए गए 19 लाख रुपये वापस नहीं किए। इसके बाद शैली गुप्ता ने एफआईआर दर्ज करने के लिए दो बार आपराधिक अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वे असफल रहे।

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मामले को लेकर स्थानीय अदालत ने कहा था कि वह आपराधिक जांच का आदेश नहीं दे सकती क्योंकि मामला दीवानी विवाद का है। जबकि स्थानीय पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी सहित अन्य अपराधों के लिए बिरानी परिवार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। बिरानी परिवार इलाहाबाद हाईकोर्ट गया तो हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया और उन्हें मुकदमे का सामना करने को कहा। हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी।

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