अदालत की कार्यवाही का ऐसे होगा लाइव प्रसारण, कानून को भी मिलेगी मजबूती - बढ़ेगा भरोसा
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सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले के बाद लोगों में ये चर्चा का विषय बन गया है कि अदालत की कार्यवाही का लाइव प्रसारण आखिर कौन करेगा। कई लोग ये भी बात कर रहे हैं कि आखिर कौन-कौन से मामलों का सीधा प्रसारण होगा। बता दें कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद लोग अपने टीवी पर ही बड़ी अदालतों की पूरी कार्यवाही देख पाएंगे। इसमें उन मामलों को प्रसारण से दूर रखा गया है जो पति-पत्नी या फिर यौन उत्पीड़न से जुड़े होंगे। कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग करने का फैसला सुनवाई कर रहे जज पर निर्भर करेगा। वो चाहे तो इसे रोक भी सकेगा।
जबकि किसी भी कार्यवाही का लाइव प्रसारण कौन सी एजेंसी करेगी ये सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को तय करना है। अभी इस मामले में एजेंसी का चयन नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तीन महीने के पायलट प्रोजेक्ट पर ये काम शुरू होगा। इससे किसी भी मामले की पूरी पारदर्शिता जनता खुद देख पाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि अदालत को भी अब बदलती तकनीक के साथ बदलने की जरूरत है। एक सवाल और है कि कौन तय करेगा कि किस मामले का सीधा प्रसारण हो या किस मामले का नहीं। इस सवाल का जवाब है कि लाइव स्ट्रीमिंग को रोकने का फैसला उसी जज के पास होगा जो उस मामले की सुनवाई कर रहा है। बता दें कि प्रसारण का कॉपीराइट कोर्ट के पास होगा, जो कमर्शियल पर्पस के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
दुनिया के 200 देशों में मात्र 14 ही ऐसे देश हैं जहां अदालत में कार्यवाही का लाइव प्रसारण दिखाया जाता है। इनमें अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं। तो अब भारत भी इन देशों में शामिल हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ी अदालतों में कार्यवाही का लाइव प्रसारण दिखाना एक ऐतिहासिक फैसला है। इससे जनता के 'जानने का हक' कानून को भी मजबूती मिलेगी। जाहिर है इससे कई पक्षों की नफरतें भी मिटेंगी और अदालती कार्यवाही पर भरोसा बढ़ेगा।