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Electoral Bonds: चुनावी बॉन्ड योजना में संशोधन के खिलाफ याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार

Mon, 14 Nov 2022 02:54 PM IST
संजीव कुमार झा एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 14 Nov 2022 02:54 PM IST
सार

राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए जारी चुनावी बॉन्ड योजना में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए  सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है।

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Supreme Court agrees to hear plea on electoral bonds scheme amendment
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चुनावी बॉन्ड योजना में संशोधन के खिलाफ दायर एक नई याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत हो गया है। इस याचिका में केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है जिसमें विधानसभा चुनावों के  दौरान चुनावी बॉन्ड की बिक्री के लिए 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि प्रदान करने की अनुमति प्रदान की गई है।  वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी ने इस अधिसूचना को पूरी तरह से अवैध बताया है। वहीं वकील की दलील सुनने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गई।  

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चुनावी बॉन्ड के संशोधन पर क्या है विवाद
दरअसल, वित्त मंत्रालय ने सात नवंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभा चुनावों के वर्ष के दौरान चुनावी बॉन्ड की बिक्री के लिए 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि प्रदान करने के लिए योजना में संशोधन करने के लिए अधिसूचना जारी की थी। जिसपर विवाद उठने लगा और  कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने इस अधिसूचना के खिलाफ याचिका दायर कर दी। अब शीर्ष अदालत इसपर सुनवाई के लिए तैयार हो गई है।
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क्या है चुनावी बॉन्ड?
चुनावी बॉन्ड एक वचन पत्र या वाहक बांड की प्रकृति का एक उपकरण है जिसे किसी भी व्यक्ति, कंपनी, फर्म या व्यक्तियों के संघ द्वारा खरीदा जा सकता है बशर्ते वह व्यक्ति या निकाय भारत का नागरिक हो या भारत में निगमित या स्थापित हो। बांड विशेष रूप से राजनीतिक दलों को धन के योगदान के उद्देश्य से जारी किए जाते हैं।
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पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम पर केंद्र को दाखिल करना होगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं  पर प्रतिक्रिया देने के लिए सोमवार को केंद्र को और समय दे दिया है। इस याचिका में पूजा की जगह को पुनः प्राप्त करने के लिए मुकदमा दायर करने पर रोक लगाने की मांग की गई है।   भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने केंद्र से 12 दिसंबर तक हलफनामा दाखिल करने को कहा और मामले को अगले साल जनवरी के पहले सप्ताह के लिए पोस्ट कर दिया। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा मामले में हलफनामा दायर करने के लिए और समय मांगे जाने के बाद शीर्ष अदालत ने मामले को स्थगित कर दिया क्योंकि उन्हें सरकार में उच्चतम स्तर के साथ विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है।


सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि यह भारत सरकार का फैसला करने का मामला है। सीजेआई ने वकील से कहा कि उनके योगदान का जश्न मनाने का सबसे अच्छा तरीका कड़ी मेहनत करना है, जैसे उन्होंने आजादी के लिए कड़ी मेहनत की थी। 

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