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Supreme Court: प्राथमिक स्कूलों के विलय का मामला, यूपी सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका पर होगी 'सुप्रीम' सुनवाई

Mon, 14 Jul 2025 04:20 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 14 Jul 2025 04:20 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट कम छात्र संख्या वाले 100 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों का अलग-अलग किसी अन्य विद्यालय में विलय करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सोमवार को सहमत हो गया।

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Supreme Court agrees to hear plea against UP govt's decision to merge primary schools
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कम नामांकन वाले प्राथमिक विद्यालयों के विलय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी।  न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले को इसी सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। याचिकाकर्ता तैय्यब खान सलमानी की ओर से पेश अधिवक्ता प्रदीप यादव के तत्काल सुनवाई का अनुरोध करने पर पीठ ने यह सहमति जताई है।

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प्रदीप यादव ने कहा कि अगर 16 जून के सरकारी आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो सैकड़ों सरकारी स्कूल बंद हो जाएंगे और प्राथमिक विद्यालय के हजारों छात्र स्कूल से बाहर हो जाएंगे और उन्हें पड़ोसी स्कूलों में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन उसने सात जुलाई को याचिकाएं खारिज कर दीं।
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि यह भले ही एक नीतिगत निर्णय हो, लेकिन यदि इससे सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं तो अदालत इस मुद्दे की जांच करने के लिए तैयार है।अधिवक्ता ने याचिका पर त्वरित सुनवाई की मांग की थी।
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अधिकवक्ता प्रदीप यादव ने अदालत को बताया कि अगर 16 जून को जारी राज्य सरकार का आदेश रोका नहीं गया, तो सैकड़ों सरकारी स्कूल बंद हो जाएंगे और हजारों छात्र स्कूल से बाहर हो जाएंगे या उन्हें आस-पास के अन्य विद्यालयों में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस सरकारी आदेश को पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने 7 जुलाई को याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

आदेश 2009 के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम का उल्लंघन
याचिका में कहा गया है कि 16 जून, 2025 को राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा एक आदेश जारी किया गया था। जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के नियंत्रण में संचालित राज्य सरकार के स्वामित्व वाले स्कूलों के विलय के निर्देश दिए गए। इसके बाद 24 जून, 2025 को 105 स्कूलों की एक सूची जारी की गई जिन्हें विलय के लिए चयनित किया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट ने 7 जुलाई को तथ्यों और परिस्थितियों की समुचित जांच किए बिना याचिका खारिज कर दी, जबकि यह आदेश पहले से ही कमजोर शिक्षा व्यवस्था को और नुकसान पहुंचाएगा। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नीतिगत निर्णय मनमाना, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 21ए का उल्लंघन है क्योंकि यह बच्चों के निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 और राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।


याचिका में नियम 4(1)(ए) का हवाला दिया गया और कहा गया कि राज्य सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वह कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए कम से कम 300 लोगों की आबादी वाली ऐसी बस्तियों में स्कूल स्थापित करे जहां एक किलोमीटर के दायरे में कोई स्कूल न हो।

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