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SC: तलाक-ए-हसन के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, जानें इसमें कैसे होता है तलाक?
Tue, 11 Oct 2022 07:44 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 11 Oct 2022 07:44 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट तलाक-ए-हसन की तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इसमें से एक याचिका गाजियाबाद निवासी बेनजीर हिना ने दायर की है। उन्होंने एकतरफा गैर न्यायिक तलाक-ए-हसन की पीड़िता होने का दावा किया है।
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तलाक-ए-हसन के बारे में जानें
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए-हसन का मामला चर्चा में है। तलाक-ए-हसन इस्लामिक कानून के अंतर्गत तलाक की एक प्रक्रिया है। इसके पहले तीन तलाक भी सुर्खियों में रहा था, जब भारत सरकार ने कानून बनाकर तीन तलाक को प्रतिबंधित कर दिया था। वहीं अब तलाक ए हसन को भी बैन करने की मांग उठ रही है। तलाक ए हसन को अमान्य और असंवैधानिक घोषित करने की गुहार लगाई जा रही है। वहीं, इसी बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने ‘तलाक-ए-हसन’ और अन्य सभी प्रकार के ‘एकतरफा अवैधानिक तलाक’ को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है।
इन याचिकाओं पर सुनवाई की सहमति न्यायमूर्ति एस.के. कौल की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने दी। इस पीठ में न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ भी शामिल है। सहमति देने के साथ ही पीठ ने मामले में केंद्र सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य चार से जवाब मांगा है। इन लोगों को चार हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
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इन याचिकाओं पर सुनवाई की सहमति न्यायमूर्ति एस.के. कौल की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने दी। इस पीठ में न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ भी शामिल है। सहमति देने के साथ ही पीठ ने मामले में केंद्र सरकार, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य चार से जवाब मांगा है। इन लोगों को चार हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
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सुप्रीम कोर्ट तीन याचिकाओं पर कर रहा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट तलाक-ए-हसन के मामले में तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इसमें से एक याचिका गाजियाबाद निवासी बेनजीर हिना ने दायर की है। उन्होंने एकतरफा गैर न्यायिक तलाक-ए-हसन की पीड़िता होने का दावा किया है। उन्होंने तलाक के लिए लैंगिक एवं धार्मिक रूप से तटस्थ और सभी नागरिकों के लिए एक समान आधार के बनाने के दिशानिर्देश तैयार करने का केंद्र को निर्देश देने का भी अनुरोध किया है।
साल 2023 में होगी सुनवाई
गौरतलब है कि मंगलवार को जब इस मामले में सुनवाई के दौरान बेनजीर के पति की ओर से न्यायालय में पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल का पत्नी के साथ विवाद में कोई समझौता संभव नहीं है। वह गुजारा-भत्ता के मुद्दे पर कोई भी समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही अदालत ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए जनवरी 2023 के तीसरे सप्ताह में सूचीबद्ध किया है।
साल 2023 में होगी सुनवाई
गौरतलब है कि मंगलवार को जब इस मामले में सुनवाई के दौरान बेनजीर के पति की ओर से न्यायालय में पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल का पत्नी के साथ विवाद में कोई समझौता संभव नहीं है। वह गुजारा-भत्ता के मुद्दे पर कोई भी समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही अदालत ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए जनवरी 2023 के तीसरे सप्ताह में सूचीबद्ध किया है।
इस्लाम में कितने तरीके के तलाक?
तलाक-ए-हसन (सांकेतिक फोटो)
- फोटो : Social Media
मुस्लिम समाज में इस्लाम धर्म को मानने वालों के बीच तलाक के तीन तरीके प्रचलित हैं। इसमें तलाक-ए-बिद्दत यानी तीन तलाक, तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन शामिल हैं। मर्द इन तीनों तरीकों से अपनी पत्नी को तलाक दे सकते हैं। तलाक-ए-बिद्दत को अपराध घोषित करते हुए इसके खिलाफ सख्त कानून लागू किए जा चुके हैं। तीन तलाक में पति तीन बार तलाक तलाक और तलाक बोलकर पत्नी से रिश्ता खत्म कर सकता है। इस तरह के तलाक में गुस्से में भी तीन बार तलाक बोलने पर रिश्ता टूट जाएगा।
इस्लाम में तलाक-ए-हसन क्या है?
तलाक
- फोटो : डेमो
सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए-हसन का मामला पहुंचा है। तलाक की इस प्रक्रिया में तीन महीने लगते हैं। पुरुष तीन महीने में हर महीने एक एक बार करके तीन बार तलाक बोलकर शादी तोड़ सकता है। पहली बार तलाक बोलने पर भी पति पत्नी एक साथ रहते हैं। अगर इन तीन महीनों में दोनों में सुलह हो गई तो पति तलाक लेना कैंसिल कर सकता है और वरना तीसरे महीने में आखिरी बार तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर सकता है। इस तरह के तलाक के बाद पति पत्नी दोबारा निकाह कर सकते हैं लेकिन पत्नी को हलाला से गुजरना पड़ता है यानी अपने पति से शादी से पहले किसी दूसरे मर्द से शादी करके उससे तलाक लेना पड़ता है।
क्या है तलाक-ए-अहसन?
तलाक
- फोटो : PTI
तलाक-ए-अहसन भी तीन महीने की प्रक्रिया है, इसमें तलाक ए हसन की तरह तीन बार तलाक कहने की जरूरत नहीं होती। बल्कि पति एक बार ही तलाक कहता है, जिसके बाद पति पत्नी एक ही छत के नीचे तीन महीने तक रहते हैं। इस अवधि में अगर दोनों में सुलह हो जाती है तो तलाक नहीं होता, वरना तीन महीने बाद तलाक हो जाता है। इस तलाक के बाद पति-पत्नी दोबारा निकाह कर सकते हैं।
तीन तलाक, तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन में अंतर
तलाक : फाइल फोटो
- फोटो : पीटीआई
अगर इस्लाम के तीनों तलाक प्रक्रिया की तुलना करें तो ये काफी अलग हैं। तीन तलाक झटके में किसी भी माध्यम से तीन बार तलाक बोलकर दिया जा सकता है। इसमें तो कई बार लोग फोन पर मैसेज या कॉल के माध्यम से तलाक दे दिया करते थे। तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन में तलाक की एक प्रक्रिया और निश्चित अवधि होती है। इन दोनों प्रक्रियाओं में पति पत्नी को फैसला लेने के लिए वक्त मिलता है।