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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court adjourns the hearing for February 11 on an appeal of the Haryana government challenging stay the state law on providing 75 Percent reservation 

Supreme Court: 75 फीसदी आरक्षण पर रोक के खिलाफ अर्जी पर 11 को सुनवाई, हरियाणा सरकार ने दाखिल की है याचिका

Mon, 07 Feb 2022 08:53 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 07 Feb 2022 08:53 PM IST
सार

याचिका सोमवार को जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी लेकिन समय अभाव के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी।

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Supreme Court adjourns the hearing for February 11 on an appeal of the Haryana government challenging stay the state law on providing 75 Percent reservation 
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों को 75 फीसदी आरक्षण देने वाले कानून पर रोक लगाने के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई अब 11 फरवरी को होगी। एसएलपी हरियाणा सरकार ने दायर की है।

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यह याचिका सोमवार को जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी लेकिन समय अभाव के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। पक्षकारों की सहमति के बाद पीठ ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 11 फरवरी तय की। हरियाणा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुनवाई जल्द चाहते थे, जिस पर पीठ ने कहा दो-तीन दिन से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 
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तीन फरवरी को हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों के रोजगार अधिनियम 2020 को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने यह आदेश फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एफआईए) द्वारा दायर रिट याचिका पर दिया था। कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया था।
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हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों के रोजगार अधिनियम, 2020 को छह नवंबर, 2021 को अधिसूचित किया गया था। इसके तहत निजी क्षेत्र की नौकरियों में उन स्थानीय उम्मीदवारों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान की बात है जो प्रति माह 30,000 रुपये से कम वेतन प्रदान करते हैं। यह अधिनियम 15 जनवरी, 2022 से प्रभावी होने वाला था। यह कानून सभी कंपनियों, समितियों, ट्रस्टों, एलएलपी फर्म, साझेदारी फर्मों और दस या अधिक व्यक्तियों को रोजगार देने वाले किसी भी नियोक्ता पर लागू होता है लेकिन इसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार या उनके स्वामित्व वाला कोई भी संगठन शामिल नहीं है। 

निर्धारित अवधि के अंदर आरोप-पत्र का निचली अदालत के संज्ञान नहीं लेने पर आरोपी जमानत का हकदार नहीं: कोर्ट
एक अन्य मामले में शीर्ष कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कोई आरोपी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत इस आधार पर जमानत पाने का हकदार नहीं है कि निचली अदालत ने 60 या 90 दिन की निर्धारित अवधि से पहले जांच एजेंसी द्वारा दाखिल आरोप-पत्र का संज्ञान नहीं लिया है।

शीर्ष अदालत ने कानूनी रूप से यह महत्वपूर्ण टिप्पणी एक फैसले में की है, जिसके जरिए आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के निदेशक मुकेश मोदी और राहुल मोदी को दी गई जमानत निवेशकों के 200 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने से जुड़े मामले में निरस्त कर दी गई है।


गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने अपनी अपील में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत को इस आधार पर चुनौती दी थी कि निचली अदालत ने सीआरपीसी के तहत निर्धारित सांविधिक अवधि के अंदर दाखिल आरोपपत्र का संज्ञान नहीं लिया था।

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