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SC: बंगलूरू सीरियल धमाकों में कर्नाटक सरकार की याचिका स्वीकार, अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई को लेकर की अहम टिप्पणी
Thu, 09 Nov 2023 07:15 AM IST
यशोधन शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 09 Nov 2023 07:15 AM IST
सार
अभियोजन पक्ष के इस गवाह को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित एक प्रमाणपत्र पेश करने के लिए वापस बुलाने की मांग की गई थी।
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supreme court
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले में निष्पक्ष सुनवाई का मतलब किसी एक पक्ष के लिए निष्पक्ष होना नहीं होना चाहिए। यह टिप्पणी कर शीर्ष अदालत ने जब्त किए गए उपकरणों को प्रमाणित करने के लिए 2008 बंगलूरू सीरियल धमाकों में एक गवाह को वापस बुलाने की कर्नाटक सरकार की याचिका को स्वीकार कर लिया।
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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का उद्देश्य यह है कि कोई दोषी छूट न जाए और किसी निर्दोष को सजा न मिले। पीठ ने हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट के आदेशों को खारिज कर दिया, जिसमें एक गवाह एम कृष्णा (सहायक सरकारी परीक्षक, सीएफएसएल) को वापस बुलाने की याचिका खारिज कर दी थी। अभियोजन पक्ष के इस गवाह को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित एक प्रमाणपत्र पेश करने के लिए वापस बुलाने की मांग की गई थी।
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आरोपी के पास होगा सबूतों के खंडन का अवसर
पीठ ने कहा है कि जो प्रमाणपत्र पेश करने की मांग की गई है, वह कोई ऐसा सबूत नहीं है जो अब बनाया गया है। इसके तहत इस स्तर पर अभियोजन को प्रमाणपत्र पेश करने की अनुमति देना आरोपी पर कोई अपरिवर्तनीय पूर्वाग्रह नहीं होगा। आरोपी के पास अभियोजन पक्ष के सबूतों का खंडन करने का पूरा अवसर होगा।
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सच्चाई तक पहुंचना उद्देश्य
सीआरपीसी की धारा 311 का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि उद्देश्य सच्चाई तक पहुंचना है और इसे न्याय और सार्वजनिक हित के लिए लागू किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि इस मामले में सच्चाई को बरकरार रखने के लिए शक्ति का यह प्रयोग आवश्यक है, क्योंकि आरोपी के प्रति इस तरह का कोई पूर्वाग्रह नहीं होने वाला है।
एडवोकेट जनरल के तर्क से सहमत
पीठ एडवोकेट जनरल अमन पंवार के इस तर्क से सहमत थी कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के रूप में प्राथमिक साक्ष्य सीएफएसएल की रिपोर्ट के साथ पहले से ही रिकॉर्ड में थे। यह केवल इसलिए है क्योंकि अभियुक्त ने उस रिपोर्ट के पेश करने पर आपत्ति जताई थी और कोई जोखिम न लेने के लिए अभियोजन पक्ष ने एम कृष्णा को फिर से बुलाने और प्रमाणपत्र पेश करने के लिए याचिका दायर की थी। प्रतिवादी आरोपी की ओर से पेश वकील ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेशों में कोई त्रुटि नहीं थी।