फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court accepts Karnataka government plea 2008 Bangalore serial blasts

SC: बंगलूरू सीरियल धमाकों में कर्नाटक सरकार की याचिका स्वीकार, अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई को लेकर की अहम टिप्पणी

Thu, 09 Nov 2023 07:15 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Thu, 09 Nov 2023 07:15 AM IST
सार

अभियोजन पक्ष के इस गवाह को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित एक प्रमाणपत्र पेश करने के लिए वापस बुलाने की मांग की गई थी।

विज्ञापन
Supreme Court accepts Karnataka government plea 2008 Bangalore serial blasts
supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले में निष्पक्ष सुनवाई का मतलब किसी एक पक्ष के लिए निष्पक्ष होना नहीं होना चाहिए। यह टिप्पणी कर शीर्ष अदालत ने जब्त किए गए उपकरणों को प्रमाणित करने के लिए 2008 बंगलूरू सीरियल धमाकों में एक गवाह को वापस बुलाने की कर्नाटक सरकार की याचिका को स्वीकार कर लिया।

विज्ञापन


जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का उद्देश्य यह है कि कोई दोषी छूट न जाए और किसी निर्दोष को सजा न मिले। पीठ ने हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट के आदेशों को खारिज कर दिया, जिसमें एक गवाह एम कृष्णा (सहायक सरकारी परीक्षक, सीएफएसएल) को वापस बुलाने की याचिका खारिज कर दी थी। अभियोजन पक्ष के इस गवाह को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित एक प्रमाणपत्र पेश करने के लिए वापस बुलाने की मांग की गई थी।
विज्ञापन


आरोपी के पास होगा सबूतों के खंडन का अवसर
पीठ ने कहा है कि जो प्रमाणपत्र पेश करने की मांग की गई है, वह कोई ऐसा सबूत नहीं है जो अब बनाया गया है। इसके तहत इस स्तर पर अभियोजन को प्रमाणपत्र पेश करने की अनुमति देना आरोपी पर कोई अपरिवर्तनीय पूर्वाग्रह नहीं होगा। आरोपी के पास अभियोजन पक्ष के सबूतों का खंडन करने का पूरा अवसर होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


सच्चाई तक पहुंचना उद्देश्य
सीआरपीसी की धारा 311 का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि उद्देश्य सच्चाई तक पहुंचना है और इसे न्याय और सार्वजनिक हित के लिए लागू किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि इस मामले में सच्चाई को बरकरार रखने के लिए शक्ति का यह प्रयोग आवश्यक है, क्योंकि आरोपी के प्रति इस तरह का कोई पूर्वाग्रह नहीं होने वाला है।


एडवोकेट जनरल के तर्क से सहमत
पीठ एडवोकेट जनरल अमन पंवार के इस तर्क से सहमत थी कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के रूप में प्राथमिक साक्ष्य सीएफएसएल की रिपोर्ट के साथ पहले से ही रिकॉर्ड में थे। यह केवल इसलिए है क्योंकि अभियुक्त ने उस रिपोर्ट के पेश करने पर आपत्ति जताई थी और कोई जोखिम न लेने के लिए अभियोजन पक्ष ने एम कृष्णा को फिर से बुलाने और प्रमाणपत्र पेश करने के लिए याचिका दायर की थी। प्रतिवादी आरोपी की ओर से पेश वकील ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेशों में कोई त्रुटि नहीं थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed