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नोएडा: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका लगाएगी सुपरटेक, कंपनी के चेयरमैन बोले- कानून के मुताबिक ही बने थे ट्विन टावर
Sat, 04 Sep 2021 06:08 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 04 Sep 2021 06:08 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के अपैक्स एंड स्यान यावे-16 और 17 को अवैध ठहराया था और दोनों 40 मंजिला टावरों को ढहाने का आदेश दिया था।
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सुपरटेक ट्वीन टावर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रियल स्टेट कंपनी सुपरटेक ने शनिवार को कहा कि वह जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका लगाएगी। कंपनी ने दावा किया कि नियम-कानून के मुताबिक ही 40 मंजिला ट्विन टावर का निर्माण किया गया था। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के अपैक्स एंड स्यान यावे-16 और 17 को अवैध ठहराया था और दोनों 40 मंजिला टावरों को ढहाने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने कंपनी को फ्लैट खरीदारों को ब्याज के साथ पैसे वापस करने का आदेश दिए थे।
अरोड़ा ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। इसलिए हमने फैसले की फिर से समीक्षा करने के लिए याचिका लगाने का फैसला किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अपैक्स और स्यान टावर कंपनी के किसी चल रहे प्रोजेक्ट से जुड़े नहीं हैं और न ही उसका हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सुपरटेक समूह अपनी परियोजनाओं में 10 करोड़ वर्ग फुट का विकास कर रहा है, जबकि अपैक्स और स्यान टावर केवल 6 लाख वर्ग फुट का हिस्सा हैं, जो कुल पोर्टफोलियो का 0.6 फीसदी है।
अरोड़ा ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के 2014 के फैसले के बाद हमने पहले ही इस परियोजना में अधिकांश ग्राहकों को रिफंड दे दिया है। हम आदेश के अनुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का भी पालन करेंगे। सुपरटेक के चेयरमैन ने भरोसा जताया कि आदेश का कंपनी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि प्रत्येक परियोजना का अपना स्वतंत्र रेरा खाता और लागत केंद्र होता है।
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उन्होंने कहा कि सुपरटेक एक वित्तीय रूप से स्थिर और मजबूत समूह है। हमारे सभी परियोजना स्थलों पर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार काम चल रहा है। हम अपने सभी ग्राहकों, बैंकरों, विक्रेताओं और अन्य हितधारकों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि हम अपनी सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में वितरित करेंगे।
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अरोड़ा ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। इसलिए हमने फैसले की फिर से समीक्षा करने के लिए याचिका लगाने का फैसला किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अपैक्स और स्यान टावर कंपनी के किसी चल रहे प्रोजेक्ट से जुड़े नहीं हैं और न ही उसका हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि सुपरटेक समूह अपनी परियोजनाओं में 10 करोड़ वर्ग फुट का विकास कर रहा है, जबकि अपैक्स और स्यान टावर केवल 6 लाख वर्ग फुट का हिस्सा हैं, जो कुल पोर्टफोलियो का 0.6 फीसदी है।
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अरोड़ा ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के 2014 के फैसले के बाद हमने पहले ही इस परियोजना में अधिकांश ग्राहकों को रिफंड दे दिया है। हम आदेश के अनुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का भी पालन करेंगे। सुपरटेक के चेयरमैन ने भरोसा जताया कि आदेश का कंपनी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि प्रत्येक परियोजना का अपना स्वतंत्र रेरा खाता और लागत केंद्र होता है।
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उन्होंने कहा कि सुपरटेक एक वित्तीय रूप से स्थिर और मजबूत समूह है। हमारे सभी परियोजना स्थलों पर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार काम चल रहा है। हम अपने सभी ग्राहकों, बैंकरों, विक्रेताओं और अन्य हितधारकों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि हम अपनी सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में वितरित करेंगे।