भाजपा में शामिल अभिनेता सनी देओल को पंजाब के गुरदासपुर से मिला टिकट
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लोकसभा चुनाव 2019 की गहमागहमी के बीच अभिनेता सनी देओल ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इसी के साथ उन्हें पंजाब के गुरदासपुर सीट से टिकट दे दिया गया। इसी सीट से 2014 में विनोद खन्ना ने चुनाव जीता था।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में सनी देओल ने भाजपा की सदस्यता ली। उन्होंने कहा, "जिस तरह मेरे पिता अटलजी से जुड़े, उसी तरह मैं मोदीजी से जुड़ने आया हूं। मैं चाहता हूं कि अगले पांच साल भी मोदीजी रहें। मैं काम करके दिखाऊंगा।"
सनी देओल ने तीन दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की थी। उस वक्त से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि सनी देओल जल्द भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
BJP releases 26th list of candidates for 3 #LokSabhaElections2019 seats in Chandigarh & Punjab. Sunny Deol to contest from Gurdaspur, Som Prakash from Hoshiarpur, and Kirron Kher from Chandigarh. pic.twitter.com/ca0C239gwO
— ANI (@ANI) April 23, 2019
गुरदासपुर सीट क्यों है खास?
पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अकाली दल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। यहां की 13 लोकसभा सीटों में से भाजपा को गुरदासपुर, अमृतसर और होशियारपुर से उम्मीदवार खड़े करने हैं। बाकी की सीटों पर अकाली दल अपने प्रत्याशी उतारेगा। ऐसे में यहां की इन तीन सीटों पर सबकी नजर लगी हुई थी। भाजपा ने रविवार को अमृसर से हरदीप पुरी के नाम की घोषणा तो की लेकिन होशियारपुर और गुरदासपुर सीट से किसी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है।
2014 में गुरदासपुर सीट से जीते थे विनोद खन्ना
ये सीट विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई है। पिछले साल 27 अप्रैल को विनोद खन्ना का निधन हो गया था। उनकी पत्नी कविता का नाम भी इस सीट से चर्चा में है। विनोद खन्ना 1997 में भाजपा में शामिल हुए। 1998 में गुरदासपुर से पहली बार चुनाव लड़ा और जीते भी। 1999 और 2004 के चुनावों में बी विनोद खन्ना को जीत हासिल हुई। 2009 में भले उन्हें ये सीट गंवानी पड़ी हो लेकिन 2014 की मोदी लहर में एक बार फिर विनोद खन्ना गुरदासपुर से सांसद बने।
2011 की जनगणना के मुताबिक, गुरदासपुर जिला पंजाब के सभी जिलों में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला जिला है। यहां की 31 फीसदी आबादी शहरी इलाके में बसती है। यहां की जनसंख्या 22 लाख से ज्यादा है और साक्षरता दर 79 फीसदी से ज्यादा है। इस जिले की स्थापना 17वीं शताब्दी में गुरिया जी ने की थी तभी इसका नाम गुरदासपुर पड़ा।