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उफ्फ ये धूप: इस साल के तापमान ने तोड़ा रिकॉर्ड, पर्यावरण विशेषज्ञ बोलीं- इतनी भीषण गर्मी के लिए कोई तैयार नहीं

Sun, 16 Jun 2024 02:25 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Sun, 16 Jun 2024 02:25 PM IST
सार

विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) के महानिदेशक नारायण ने कहा कि भारत के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी का सैलाब प्राकृतिक रूप से होने वाली अल नीनो घटना और जलवायु परिवर्तन का नतीजा है।
 

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Sunita Narain said No one ready for unprecedented heat endured this summer
पर्यावरणविद् सुनीता नारायण - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देश में अब तक की सबसे भयानक गर्मी पड़ रही है। कई हिस्सों में लगातार 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान बना हुआ है। दिल्ली में साल 2002 में सबसे ज्यादा 49.2 डिग्री सेल्सियस पारा रिकॉर्ड हुआ था। वहीं, इस साल 27 मई को तापमान 49.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। तापमान ने दिल्ली में एक नया रिकॉर्ड बना लिया है। इसी को लेकर प्रमुख पर्यावरणविद् सुनीता नारायण ने कहा कि भारत इस साल भीषण गर्मी से जूझ रहा है। कोई भी इस स्तर की गर्मी के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने ताप सूचकांक और आधुनिक शहरों के डिजाइन के तरीके में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) के महानिदेशक नारायण ने कहा कि भारत के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी का सैलाब प्राकृतिक रूप से होने वाली अल नीनो घटना और जलवायु परिवर्तन का नतीजा है।
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कोई भी तैयार नहीं
उन्होंने कहा, 'कोई भी तैयार नहीं है। वैश्विक स्तर पर सबसे गर्म साल 2023 था। हमने पिछले 45 दिनों में सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 40 डिग्री से ऊपर तक तापमान गया है। यह जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है। इस साल (2023-24) अल नीनो के कम होने से यह और भी जटिल हो गया है। इसका मतलब है कि हमें वास्तव में अपने काम को एक साथ लाने की आवश्यकता है। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि कमजोर समुदाय कम प्रभावित हों।'
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नारायण ने एक ताप सूचकांक यानी हीट इंडेक्स तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह दिखाता है कि सापेक्ष आर्द्रता और वायु तापमान के संयोजन से मानव शरीर को कैसा तापमान महसूस होता है।

उन्होंने कहा, 'हमें अपने फोन पर मौजूद वायु गुणवत्ता सूचकांक के समान हीट इंडेक्स की आवश्यकता है। एक्यूआई आपको वायु प्रदूषण के स्तर और आपके स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव के बारे में बताता है। इसकी इसलिए जरूरत है, जिससे यह जाना जा सके कि क्या कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है। याद रखें, गर्मी केवल तापमान के बारे में नहीं है, यह आर्द्रता के बारे में भी है।'

भारतीय मौसम विभाग ने पिछले साल अप्रैल में देश के विभिन्न भागों के लिए एक प्रयोगात्मक ताप सूचकांक जारी करना शुरू किया था। आईएमडी अधिकारियों ने कहा कि भारत जल्द ही अपनी प्रणाली लेकर आएगा, जो 'हीट हैजर्ड स्कोर' नामक एक बहु-पैरामीटर उत्पाद है, जो तापमान और आर्द्रता के साथ-साथ हवा और समय जैसे अन्य मापदंडों को भी बताएगा। 

कांच की इमारतें भट्टियों में बदल रहीं
नारायण ने कहा कि गर्मी की लहरें आधुनिक कांच की इमारतों को भट्टियों में बदल रही हैं, जिससे यहां रहने वालों की गर्मी से हालत खराब हो रही है। इसके साथ उन्होंने इस गर्मी से निपटने के लिए नए वास्तु विज्ञान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज आपकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शहरों का पुनर्निर्माण कैसे किया जाए। गुरुग्राम को देखें- यहां सब कांच से बना हुआ है। कांच की इमारतें गर्म जलवायु के लिए सबसे खराब चीज हो सकती हैं। 

हीटवेव से हो रहीं मौतें
भारत ने अप्रैल और मई में लंबे समय तक चलने वाली गर्मी का अनुभव किया, जिसने मानव सहनशक्ति और देश की आपदा तैयारियों का परीक्षण किया, क्योंकि उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा सहित कई राज्यों ने हीटवेव से संबंधित मौतों की सूचना दी। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, देश के 36 उप-विभागों में से 14 में एक मार्च से नौ जून तक 15 से अधिक हीटवेव दिन (जब अधिकतम तापमान कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस और सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक होता है) दर्ज किए गए।


अध्ययनों से पता चलता है कि तेजी से शहरीकरण ने शहरी क्षेत्रों में गर्मी को बढ़ा दिया है, जिसका खामियाजा बाहरी श्रमिकों और कम आय वाले परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

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