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Hindi News ›   India News ›   Sun of central power also rise from the east 117 important seats of Bihar, Bengal, Jharkhand and Odisha

Election: केंद्र की सत्ता का सूरज भी पूरब से निकलेगा, बिहार, बंगाल, झारखंड व ओडिशा की 117 सीटें तय करेंगी रुख

Wed, 20 Mar 2024 06:30 AM IST
जलज मिश्रा हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 20 Mar 2024 06:30 AM IST
सार

पांच साल पहले पूरब में बदलाव की बयार ने आम चुनाव में राष्ट्रीय राजनीति की नई पटकथा लिख दी। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए ने बिहार और झारखंड में करीब-करीब क्लीन स्वीप कर दिया, तो भाजपा ने बंगाल और ओडिशा में जबर्दस्त प्रदर्शन कर राजनीतिक पंडितों को चौंकने पर मजबूर कर दिया था। इस बार भी मजबूत क्षत्रपों ममता बनर्जी और नवीन पटनायक की मौजूदगी के बावजूद पूरब अब एनडीए के लिए उम्मीद की किरण है।

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Sun of central power also rise from the east 117 important seats of Bihar, Bengal, Jharkhand and Odisha
Lok Sabha Chunav 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्वी भारत के चार राज्यों बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा ने वर्ष 2019 में ऐसा जनादेश दिया, जिसने सारे सियासी समीकरण ध्वस्त कर दिए थे। प. बंगाल व ओडिशा में तो भाजपा को अप्रत्याशित सफलता मिली और पार्टी पहली बार अपने दम पर तीन सौ सीटों के पार पहुंच गई। इस बार के चुनाव में इसी पूर्वी भारत में भाजपा की संभावना और कांग्रेस की उम्मीदों के साथ आधा दर्जन क्षेत्रीय दलों का भविष्य भी छिपा हुआ है।

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इन चार राज्यों में लोकसभा की 117 सीटें हैं। बीते चुनाव में भाजपा को 2014 के मुकाबले 18 सीटें अधिक 55 सीटें हासिल हुई थीं। वहीं, एनडीए 77 सीटें पाने में सफल रही। इस जनादेश ने राजग और विपक्ष के बीच सीटों के मामले में कभी न पट सकने वाली बड़ी खाई पैदा कर दी थी। बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद और झारखंड में कांग्रेस खाता तक न खोल सकी। वहीं, प. बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल को 12 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा।

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अबकी प. बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल और ओडिशा में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाला बीजद अपने दम पर मैदान में हैं। वहीं, बिहार में राजद तो झारखंड में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की अनुपस्थिति में झामुमो विपक्षी गठबंधन की अगुवाई कर रहा है। बिहार में नीतीश कुमार (जदयू), जीतनराम मांझी (हम), उपेंद्र कुशवाहा (रालोसपा) व चिराग पासवान (लोजपा) एनडीए के लिए लामबंदी कर रहे हैं।

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संदेशखाली ने बढ़ाई ममता की चिंता पटनायक सहानुभूति वोटों के सहारे
प. बंगाल में बीते चुनाव में दो सीट से 18 सीट पर पहुंची भाजपा की चुनौती ममता के लिए लगातार बढ़ रही है। संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न, राज्य में बढ़ते अपराध के ग्राफ ने ममता की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, ओडिशा में एक से आठ सीट पर पहुंची भाजपा पटनायक के लिए बड़ी चुनौती है। सीएम नवीन अंतिम चुनाव की धारणा बना सहानुभूति हासिल करने में जुटे हैं।

नीतीश गए तो जाति का मुद्दा हुआ कमजोर
सामाजिक न्याय की राजनीति की धुरी बिहार में बड़ा खेल हुआ है। विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद विपक्षी गठबंधन में शामिल जदयू की एनडीए में वापसी हो गई है। नीतीश के साथ छोड़ने से विपक्ष का जाति जनगणना व आरक्षण का मुद्दा कमजोर हुआ है।

कांग्रेस चुनौती देने की स्थिति में नहीं
इन चारों राज्यों में कांग्रेस कहीं भी अपने दम पर भाजपा को चुनौती देने की स्थिति में नहीं है। वह बिहार, झारखंड में विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है, तो प. बंगाल में तृणमूल ने पार्टी से गठबंधन करने से मना कर दिया है। वहीं, ओडिशा में भाजपा मुख्य विपक्षी दल बन चुका है।

जानिए कहां क्या है मुद्दा

प. बंगाल
तृणमूल फिर से बंगाल अस्मिता का दांव चल रही है। पार्टी 28 फीसदी मुसलमानों को साधे रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। भाजपा ने संदेशखाली में महिलाओं यौन उत्पीड़न, मुस्लिम तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार और बदतर होती कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाया है।

भाजपा की 16 सीटें बढ़ी

  • कुल सीट- 42 
  • तृणमूल 22
  • भाजपा 18 
  • कांग्रेस 2 
  • वाम दल 00 

ओडिशा
बीजद का जोर पटनायक सरकार की उपलब्धियों पर है। पार्टी ने इसे भुनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। भाजपा की उम्मीदें एंटी इन्कम्बेंसी पर टिकी हैं। पार्टी ब्रांड मोदी के सहारे बदलाव की बयार बहाने की कोशिश में लगी है।

एक से आठ पर पहुंची भाजपा

  • कुल सीट- 21
  • बीजद 12 
  • भाजपा 08 
  • कांग्रेस 1 

बिहार
विपक्ष सामाजिक न्याय व बेरोजगारी के साथ नीतीश के पालाबदल को मुद्दा बना रहा है। विपक्ष की कोशिश पिछड़ा वर्ग और मुसलमानों को साधने की है। भाजपा ने विकास का नारा देने के साथ महागठबंधन के खिलाफ कई क्षेत्रीय दलों को साधकर जातिगत समीकरण को साधने की कोशिश की है।

कांग्रेस 1,  राजद का खाता न खुला

  • कुल सीट-40
  • भाजपा 17 
  • जदयू 16
  • लोजपा 6 
  • राजद 00 
  • कांग्रेस 01

झारखंड
आदिवासी बाहुल्य राज्य में भाजपा ने जनसांख्यिकी में बदलाव, सोरेन सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया है। मुसलमानों की बढ़ती संख्या व भ्रष्टाचार में जेल गए हेमंत सोरेन के मामले का प्रचार कर रही है।

नतीजों में कोई बदलाव नहीं

  • कुल सीट- 14 
  • भाजपा 12 
  • झामुमो 02 

वहीं, झामुमो, कांग्रेस, राजद गठबंधन की पूरी कोशिश मुख्यमंत्री रहते हेमंत सोरेन को आदिवासी होने के कारण जेल भेजे जाने की धारणा बनाने की है।

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