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सुखोई से ब्रह्मोस के सफल परीक्षण ने खड़े किए दुश्मनों के कान

Thu, 23 Nov 2017 01:53 AM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Nov 2017 01:53 AM IST
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Sukhoi fighter jet and Brahmos missile successfully test put the neighboring countries in worry
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

 देश के प्रथम श्रेणी के फाइटर जेट सुखोई 30 एमकेआई से ब्रह्मोस सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण ने पड़ाोसी देशों के कान खड़े कर दिए हैं। इस तरह से भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसकी तीनों सेनाएं (जल, थल और वायु) ब्रह्मोस जैसी परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली से लैस हो गया है। 

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इस क्रम में वायुसेना ने सुखोई-30 एमकेआई से सुखोई का परीक्षण किया और मिसाइल लक्ष्य पर सटीक निशाना साधने में सफलता पाई। ब्रह्मोस की खासियत है कि यह सुखोई, वार शिप या फिर सेना की लॉन्चिंग प्रणाली से किसी लक्ष्य पर निशाना साधकर दागे जाने के बाद उसके(लक्ष्य) के रास्ता बदलने पर मिसाइल भी रास्ते में राह बदलकर उसे ध्वस्त कर सकती है।
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दरअसल यह मिसाइल प्रणाली दागे जाने के बाद वायुमंडल में मौजूद हवा को खींचकर रैमजेट इंजन प्रणाली के चलते ऊर्जा प्राप्त कर लेती है। ऐसे में इसकी गति काफी बढ़ जाती है। इस मिसाइल में विस्फोटक सामग्री लेकर 290 किमी दूर जमीन के नीचे स्थित परमाणु हथियारो के बंकर, दुश्मन के जहाज, युद्धपोत, पनडुब्बी, सैन्य ठिकाने को तबाह कर देने की क्षमता है।

पढ़ें- इतनी दूर तक मार करती है ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, सफल परीक्षण का वीडियो हुआ जारी

पानी मांगेगा अमेरिकी टॉमहॉक

Sukhoi fighter jet and Brahmos missile successfully test put the neighboring countries in worry
सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस

ब्रह्मोस की गति, इसकी मारक क्षमता के आगे अमेरिका की टॉमहॉक भी पीछे हैं। कहा जा सकता है कि भारतीय थलसेना, वायुसेना, नौसेना दुनिया तीनों के पहले ऐसे सश बल हैं जिनके पास सुपरसोनिक गति से हमला करने वाली मिसाइल है।

यह ध्वनि की गति से तीन गुना से भी ज्यादा(2.8 मैक) की गति से दुश्मन पर प्रहार करती है। इतना ही नहीं इस मिसाइल को उध्र्वाधर और क्षैतिज दोनों ही स्थितियों में दागा जा सकता है। यह दुश्मन को चकमा देकर भी उसके ठिकाने को तबाह करने में सक्षम है।

भारत-रूत का संयुक्त प्रयास
भारत और रूस ने 1998 में ब्रह्मोस मिसाइल का विकास आरंभ किया था। यह मिसाइल दोनों देशों के संयुक्त प्रयास से विकसित हुई है। इसके अलावा दोनों देश मिनी ब्रह्मोस के साथ-साथ हापरसोनिक ब्रह्मोस(मौजूदा ब्रह्मोस की गति से तीन गुणा अधिक वाली) की परियोजना पर भी काम कर रहे हैं।

मिनी ब्रह्मोस आने के बाद जहां न केवल ब्रह्मोस की लंबाई और व्यास थोड़ा कम हो जाएगा, बल्कि सुखोई जैसे फाइटर जेट अधिक संख्या में मिसाइल को ले जाने में भी संक्षम होंगे।

रूस के सशस्त्र बल में नहीं है ब्रह्मोस
रूस ने भारत के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को विकसित किया है, लेकिन तक वहां की सेनाओं में इसे शामिल नहीं किया गया है। फिलहाल भारत और रूस के बीच में ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात पर भी सहमति बन चुकी है। मिसाइल टेक्नोलॉजी एंड कंट्रोल डिरजाइम(एमटीसीआर) में शामिल होने के बाद अब इसका मित्र देशों को निर्यात भी किया जा सकता है।

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