{"_id":"5b904cfe867a557f5d4c2ce0","slug":"suicide-committed-by-police-officers-in-the-country-there-is-the-reasons","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश में बढ़ रही हैं पुलिसकर्मियों के आत्महत्या की घटनाएं, कारण हैं ये","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
देश में बढ़ रही हैं पुलिसकर्मियों के आत्महत्या की घटनाएं, कारण हैं ये
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 06 Sep 2018 03:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी की राजधानी लखनऊ सहित देश के पुलिस विभाग में होने वाली आत्महत्याओं का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश पुलिस के एएसपी राजेश साहनी के आत्महत्या कर लेने के बाद आलमबाग में एक दरोगा ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। ये ऐसा पहला मामला नहीं है जब किसी पुलिसवाले ने आत्महत्या की हो। इसके पहले भी कई दरोगा, सिपाही और यहां तक की यूपी पुलिस के उच्च अधिकारी तक मौत को गले लगा चुके हैं।
विज्ञापन
मार्च 2018 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक रिपोर्ट के माध्य्म से बताया कि पिछले छह वर्षों में 700 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कर्मियों ने आत्महत्या की। जून 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच सालों में 40 से अधिक दिल्ली पुलिस कर्मियों ने आत्महत्या की। 12 मई 2018 को महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व चीफ हिमांशु रॉय ने आत्महत्या कर ली थी। 5 सितंबर 2018 को यूपी के कानुपर शहर में एसपी पूर्वी पद पर तैनात 2014 बैच के आईपीएस सुरेंद्र दास ने सरकारी आवास में जहरीला पदार्थ खा लिया वो अभी आईसीयू में भर्ती हैं।
विज्ञापन
6 जुलाई 2016 को कर्नाटक के बेलगावी शहर में पुलिस के डीसीपी के कथित आत्हत्या के बाद, 8 जुलाई 2016 को उसी रैंक के एक अन्य अधिकारी ने राज्य के कोडागू जिले में आत्महत्या कर ली। 30 अक्टूबर 2018 को दिल्ली पुलिस के हैड कांस्टेबल ज्ञानेंद्र राठी ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
विज्ञापन
इनके अलावा और भी कई पुलिस कर्मी आत्महत्या कर चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है। इस रिपोर्ट में हम उन सभी कारणों पर प्रकाश डालेंगे जो कहीं न कहीं पुलिसवालों की आत्महत्या का कारण बन रहे हैं, लेकिन उसके पहले आपको बता दें आत्महत्या करने वाले दरोगा राजरतन वर्मा के बारे में।
लखनऊ के आलमबाग से आया दरोगा के खुदकुशी करने का मामला
लखनऊ आलम बाग में डायल-100 में तैनात दारोगा का शव संदिग्ध परिस्तिथियों में उसके सरकारी आवास में रक्तरंजित पड़ा मिला। बताया जा रहा है कि दारोगा ने अपने सरकारी आवास पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। गोली चलने की आवाज से आसपास हड़कंप मच गया। जैसे ही लोग कमरे की तरफ दौड़े तो दरोगा का खून से लथपथ शव पड़ा हुआ था। आनन-फानन में परिजनों ने पुलिस को सूचना दी।
सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस आत्महत्या करने के कारणों के बारे में पता कर रही है। आत्महत्या करने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना से मृतक के घर में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने मौके से घटना में प्रयुक्त असलहा और खोखा कारतूस कब्जे में ले लिया है। फिलहाल पुलिस इस मामले में आगे की तफ्तीश कर रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक राजेश साहनी ने भी कर ली थी आत्महत्या
29 मई 2018 को भी उत्तर प्रदेश पुलिस के पीपीएस अधिकारी और उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपी एटीएस) में अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर तैनात खुशमिजाज राजेश साहनी ने अज्ञात कारणों से अपने कार्यालय में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। गोली चलने की आवाज सुनकर एटीएस कार्यालय में तैनात कर्मचारी कमरे की तरफ दौड़े।
यहां उन्होंने खून से लथपथ अधिकारी को तड़पते देख फौरन अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई। फिलहाल आत्महत्या करने के कारणों का पता अभी तक नहीं चल पाया है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सरकारी पिस्टल कब्जे में ले ली है। मौत पर सवाल उठने के बाद इसकी जाँच सीबीआई को सौंप दी गई है। सीबीआई ने अभी तक केस अपने हाथ में नहीं लिया है।
दबाव में काम करने की वजह से?
कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें पुलिसवालों को कहीं न कहीं राजनेताओं और अधिकारियों के दबाव में काम करना होता है। उन्हें दबाव में कभी कभी अपनी ड्यूटी से और अपने ईमान से समझौता करना पड़ता है। कुछ पुलिसवाले इसे बर्दाश्त नहीं कर पाते और या तो नौकरी छोड़ देते हैं या फिर अपनी जान दे देते
हैवी वर्क प्रेशर
कई मामले में ऐसा देखा गया है कि पुलिसवालों की शिकायत रहती है कि उन्हें काफी दबाव में और कई घंटे लगातार काम करना पड़ता है। 24 घंटे में किसी भी वक्त ड्यूटी पर लगा दिया जाना। त्योहारों में छुट्टी ना मिलना, प्रोत्साहन की कमीं। पुलिस अधिकारियों द्वारा अपने जूनियर का शोषण करना भी इनमें से एक कारण हो सकता है।
ऐसे कई मामले आए हैं जिनमें उच्च अधिकारियों द्वारा अपने जूनियर का शोषण करने का मामला सामने आया है। ऐसे में पुलिस विभाग को चाहिए कि वह अपने सिपाहियों से लेकर अधिकारियों के बीच तालमेल बैठाए। उनकी समस्याएं सुनी जाए और ज्यादा से ज्यादा उन्हें मोटिवेट किया जाए।