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किसान आत्महत्या पर SC गंभीर, सरकार और आरबीआई से मांगा जवाब

Sat, 28 Jan 2017 03:23 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली 
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Sat, 28 Jan 2017 03:23 AM IST
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Suicide by farmers is a sensitive matter, says SC
खेती - फोटो : ब्यूरो

प्राकृतिक आपदा से फसल के नुकसान व कर्ज चुकाने में नाकाम होने पर किसानों के आत्महत्या करने की घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद संवेदनशील बताया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर परीक्षण करने का निर्णय लिया है। 

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चीफ जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने केंद्र सहित सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए  किसानों द्वारा खुदकुशी करने के कारण बताने के लिए कहा है। पीठ ने साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया(आरबीआई) को भी नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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पीठ ने कहा कि यह मसला जनहित से जुड़ा है। पीठ ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को इस आपसी भागीदारी के जरिए प्रभावी नतीजे पर पहुंचाने की दरकार है। पीठ सिटिजन रिर्सोसेज एंड एक्शन एंड इनिसयेटिव नामक गैर सरकारी संगठन द्वारा जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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यचिका में कृषि नीति और सूखे व प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाली फसलों की क्षति पर किसानों को मिलने वाले मुआवजे की नीति में व्यापक सुधार करने की गुहार की गई है। वास्तव में याचिका में गुजरात सरकार को उन 692 किसानों के परिवारवालों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने की गुहार की गई थी जिन्होंने वर्ष जनवरी 2003 से अक्टूबर 2012 के बीच खुदकुशी की थी। 

यह मसला सभी राज्यों के किसानों से जुड़ा हुआ है

Suicide by farmers is a sensitive matter, says SC

शुक्रवार को याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने पीठ से कहा कि वह अपनी याचिका का दायरा बढ़ाना चाहते हैं क्योंकि उनके पास पूरे देशभर में किसानों द्वारा की गई खुदकुशी का आंकड़ा है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक के बाद एक, कई रिपोर्ट विभिन्न सरकारों को दी गई हैं लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने गुहार की कि इस मामले में केंद्र और सभी राज्य सरकारों व केंद्रशासित प्रदेशों को भी प्रतिवादी बनाने की इजाजत दी जाए।

वरिष्ठ वकील की दलीलों को स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा कि यह मसला सभी राज्यों के किसानों से जुड़ा हुआ है। पीठ ने कहा कि हम समझ सकते हैं कि इस मसले पर कुछ करने की जरूरत है। खासकर जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं।

पीठ ने कहा कि यह कुछ एक किसान से जुड़ा मसला नहीं है। लिहाजा हमारा मानना है कि इसे लेकर कोई नीति होनी चाहिए। साथ ही पीठ ने कहा कि कर्ज की अदायगी भी एक अहम पहलू है। लिहाजा शीर्ष अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र, सभी राज्यों और आरबीआई को प्रतिवादी बना दिया। 

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