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Sudan: जयशंकर-सिद्धारमैया के बीच चली ट्विटर वॉर पर कांग्रेस हमलावर, कहा- यह एक सामान्य अपील पर डराने वाला जवाब

Wed, 19 Apr 2023 05:39 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Wed, 19 Apr 2023 05:39 PM IST
सार

सिद्धारमैया के इस ट्वीट के बाद केंद्रीय विदेश मंत्री ने जमकर उनपर निशाना साधा और ट्वीट कर उन्हें जवाब में कहा- "आपके ट्वीट से स्तब्ध हूँ! जीवन दांव पर लगा हुआ है; राजनीति मत करो।"
 

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Sudan: Twitter war between Jaishankar-Siddaramaiah, INC said- this is an intimidating reply to a normal appeal
जयशंकर-सिद्धारमैया के बीच चली ट्विटर वॉर - फोटो : Social Media

विस्तार

कांग्रेस ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर सूडान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की अपील का राजनीतिकरण का आरोप लगाने के लिए केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह सहायता के लिए एक "वास्तविक अपील" थी, जिसपर विदेश मंत्री ने "भयावह प्रतिक्रिया" दी है। 
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इस बात पर विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरना शुरू किया। उन्होंने कहा कि अधिकांश मंत्रियों की यह समस्या रही है कि वह अपने मालिक के प्रति वफादारी साबित करने में  इतने उत्सुक होते हैं कि वो ये बात भूल जाते हैं कि उन्होंने जिम्मेदारियों की शपथ ली है। 
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क्या है मामला 
यह पूरा मामला सिद्धारमैया के उस ट्वीट से शुरू होता है, जिसमें उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर से सूडान में फंसे भारतीयों को निकालने की अपील की थी। दरअसल सिद्धारमैया ने ट्वीट की कई श्रृंखला पोस्ट की थी। एक में उन्होंने कहा था- यह बताया गया है कि कर्नाटक के हक्की पिक्की जनजाति के 31 लोग सूडान में फंसे हुए हैं। वे सभी गृहयुद्ध से परेशान हैं और सरकार ने अभी तक उन्हें वापस लाने के लिए कार्रवाई शुरू नहीं की है।" 
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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री के कार्यालय, गृहमंत्रालय और विदेशमंत्रालय को जल्द से जल्द इस मामले में दखल देकर वहां से भारतीयों को निकालने का निवेदन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सूडान में फंसे हक्की पिक्की समुदाय के लोग पिछले कुछ दिनों से बिना खाने के फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को  तुरंत कूटनीतिक चर्चा शुरू करनी चाहिए और हक्की पिक्की की भलाई सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों तक पहुंचना चाहिए। 

सिद्धारमैया के इस ट्वीट के बाद केंद्रीय विदेश मंत्री ने जमकर उनपर निशाना साधा और ट्वीट कर उन्हें जवाब में कहा- "आपके ट्वीट से स्तब्ध हूँ! जीवन दांव पर लगा हुआ है; राजनीति मत करो।"

जयशंकर ने आगे कहा- "14 अप्रैल को लड़ाई शुरू होने के बाद से ही खार्तूम में भारतीय दूतावास सूडान में भारतीय नागरिकों और पीआईओ के साथ लगातार संपर्क में हैं। सुरक्षा कारणों के कारण उनका विवरण और स्थान सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। सूडान में भारतीय दूतावास उस देश की स्थिति को लेकर विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है। उनकी स्थिति का राजनीतिकरण करना आपके लिए घोर गैरजिम्मेदाराना है।"

बता दें कि कर्नाटक में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने वाला है। 

कांग्रेस ने किया पलटवार 
विदेशमंत्री एस जयशंकर के ट्वीट के बाद सिद्धारमैया ने उनके ट्वीट पर ही कहा- "आप विदेश मंत्री हो इसलिए मैंने आपने मदद की अपील की थी। आप चकित होने में व्यस्त हैं, कृपया हमें उस व्यक्ति के बारे में बताएं जो हमारे लोगों को वापस लाने में हमारी मदद कर सके।"

सिद्धारमैया पर राजनीतिकरण का आरोप लगाने वाले जयशंकर के ट्वीट पर कांग्रेस के सामान्य सचिव जयराम रमेश ने कहा- "एक वास्तविक अपील के बदले पूर्व मुख्यमंत्री को विदेशमंत्री को बेहद ही भयावह प्रतिक्रिया मिला है। इस स्तर की घटिया हरकत एक ऐसे शख्स ने की है जिसे मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं। उसने नई वफादारी विकसित की है। वह जो कुछ भी कहता है उसे वह करता है और दिखाना भी चाहता है।"

जयराम रमेश ने कहा कि वह जयशंकर के अतीत पर कुछ नहीं कहना चाहते हैं। 

कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मामले में कहा- "जो प्रतिक्रिया उन्होंने दी है उससे मैं आश्चर्यचकित हूं। हमारे नेता सिद्धारमैया ने उन्हें एक उपयुक्त जवाब दिया है। इस सरकार में लोगों के साथ समस्या यह है कि वे हर छोटी से छोटी बात पर चिढ़ जाते हैं।"

श्रीनेत ने आगे कहा- "उन्होंने (सिद्धारमैया) सूडान में फंसे कर्नाटक के नागरिकों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए भारत के विदेश मंत्री की सहायता की मांग की थी। इसमें इतना चिढ़ने वाली बात थी? इन मंत्रियों में से अधिकांश के साथ यह समस्या है कि वे अपने स्वामी के प्रति अपनी वफादारी साबित करने और उनकी आवाज बनने के लिए इतने उत्सुक हैं कि वे यह भूल गए हैं कि उन्हें कुछ जिम्मेदारियों और जवाबदेही की शपथ दिलाई जाती है।"

"यहां राजनीतिकरण के बारे में कुछ भी नहीं था। यह केवल मदद मांगने के मामले में था। आप (जयशंकर) असहाय हो सकते हैं, आप किसी काम के नहीं हो सकते हैं और आप वही हैं। आपने दो रुपये के ट्रोल को चालू करने का फैसला किया है, आपके लिए अच्छा है, आप जो करना चाहते हो वो करों, लेकिन भारत में नागरिकों की सुरक्षित वापसी को सुनिश्चित करें।"


पिछले पांच दिनों से सूडान में देश की सेना और एक अर्धसैनिक समूह के बीच विद्रोह चल रहा है। इसमें अबतक 100 से ज्यादा की मौत भी हो चुकी है। सरकारी सूत्रों से पता चला है कि हिंसा प्रभावित सूडान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत विभिन्न देशों के साथ घनिष्ठ रूप से संपर्क में है।














 
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