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World में सबसे पहले भैंस के दूध से बनाया पावडर 'अमूल' को बनाया ब्रांड
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 09 Sep 2016 10:49 AM IST
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वर्गीज कुरियन
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दूध की कमी से परेशान भारत को दुनिया का सर्वाधिक दूध उत्पादक देश बनाने वाले शख्स का आज जन्मदिन है। श्वेत क्रांति के जनक माने जाने वाले इस शख्स ने देश को सहकारी दुग्ध उद्योग का एक मॉडल दिया। अपनी सोच से उन्होंने दिखा दिया कि एक छोटे किसान पर भी भरोसा किया जाए तो वह किस तरह चीजों को बदल सकता है।
हम आपको बता रहे हैं 'मिल्कमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर डॉ. वर्गीज कुरियन के बारे में। केरल के एक छोटे से गांव कोझिकोड में 26 नवंबर साल 1921 में उनका जन्म हुआ था। लेकिन, उनकी एक सकरात्मक सोच ने दूध के क्षेत्र में दुनिया में एक क्रांति ला दी। 9 सितंबर साल 2012 की उनकी मौत हो गई थी और आज उनके प्रयासों को लोग याद कर रहे हैं। भैंस के दूध से पावडर बनाने वाले कुरियन दुनिया के पहले व्यक्ति थे। इससे पहले गाय के दूध से पावडर का निर्माण किया जाता था।
साधारण परिवार में पैदा लेने वाले वर्गीज कुरियन ने लोयोला कॉलेज से ग्रेजुएशन और गिंडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर स्थित टिस्को में काम करना शुरू कर दिया। इस बीच भारत सरकार ने उन्हें डेयरी इंजीनियरिंग में पढ़ाई करने के लिए स्कॉलरशिप दिया।
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हम आपको बता रहे हैं 'मिल्कमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर डॉ. वर्गीज कुरियन के बारे में। केरल के एक छोटे से गांव कोझिकोड में 26 नवंबर साल 1921 में उनका जन्म हुआ था। लेकिन, उनकी एक सकरात्मक सोच ने दूध के क्षेत्र में दुनिया में एक क्रांति ला दी। 9 सितंबर साल 2012 की उनकी मौत हो गई थी और आज उनके प्रयासों को लोग याद कर रहे हैं। भैंस के दूध से पावडर बनाने वाले कुरियन दुनिया के पहले व्यक्ति थे। इससे पहले गाय के दूध से पावडर का निर्माण किया जाता था।
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साधारण परिवार में पैदा लेने वाले वर्गीज कुरियन ने लोयोला कॉलेज से ग्रेजुएशन और गिंडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर स्थित टिस्को में काम करना शुरू कर दिया। इस बीच भारत सरकार ने उन्हें डेयरी इंजीनियरिंग में पढ़ाई करने के लिए स्कॉलरशिप दिया।
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अमेरिका से लौटने के बाद गैराज में शुरू किया अमूल
वर्गीज कुरियन
बंगलूरू के इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हजबेंड्री एंड डेयरिंग में ट्रेनिंग लेने के बाद वर्गीज अमेरिका चले गए और वहां मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर की डिग्री हासिल की। इस दौरान उन्होंने अपने पसंदीदा विषय डेयरी इंजीनियरिंग में विशेष रुचि दिखाई।
अमेरिका से लौटने के बाद वर्गीज ने गुजरात के आणंद में एक छोटे से गैराज में अमूल की शुरुआत की। उन्होंने डेयरी उत्पादन और किसानों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने एक परिचित त्रिभुवन भाई पटेल के साथ मिलकर 'खेड़ा जिला सहकारी समिति' शुरू की। इसमें उन्होंने ज्ञान और प्रबंधन पर आधारित संस्थाओं का विकास किया। बात यहीं नहीं रुकी। वर्गीज ने साल 1946 में दो गांवों के लोगों को जोड़कर डेयरी सहाकारित संघ की स्थापना की।
अमेरिका से लौटने के बाद वर्गीज ने गुजरात के आणंद में एक छोटे से गैराज में अमूल की शुरुआत की। उन्होंने डेयरी उत्पादन और किसानों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने एक परिचित त्रिभुवन भाई पटेल के साथ मिलकर 'खेड़ा जिला सहकारी समिति' शुरू की। इसमें उन्होंने ज्ञान और प्रबंधन पर आधारित संस्थाओं का विकास किया। बात यहीं नहीं रुकी। वर्गीज ने साल 1946 में दो गांवों के लोगों को जोड़कर डेयरी सहाकारित संघ की स्थापना की।
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने की थी पहल
वर्गीज कुरियन
सरदार वल्लभ भाई पटेल की पहल और जिला सहकारी संघ लिमिटेड के अध्यक्ष त्रिभुवनदास पटले की पहल पर उन्होंने साल 1949 में एक डेयरी की स्थापना की। इसके बाद त्रिभुवनदास ने उन्हें एक डेयरी प्रसंस्करण उद्योग बनाने के लिए कहा, जहां से 'अमूल' का जन्म हुआ। यहीं पर पहली बार भैंस के दूध से पाउडर बनाया गया।
अमूल की सफलता को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने अमूल मॉडल को अन्य स्थानों पर फैलाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन किया और उन्हें बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। इसने साल
1970 में ‘ऑपरेशन फ्लड’ की शुरुआत की।
अमूल की सफलता को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने अमूल मॉडल को अन्य स्थानों पर फैलाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन किया और उन्हें बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। इसने साल
1970 में ‘ऑपरेशन फ्लड’ की शुरुआत की।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया
वर्गीज कुरियन
ऑपरेशन ब्लड से भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया। कुरियन ने 1965 से 1998 तक 33 साल एनडीडीबी के अध्यक्ष के तौर पर सेवाएं दीं। साठ के दशक में भारत में दूध की खपत जहां दो करोड़ टन थी वहीं 2011 में यह 12.2 करोड़ टन पहुंच गई।
कुरियन को भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। इसके साथ ही रैमन मैग्सेसे पुरस्कार, कार्नेगी वटलर शांति पुरस्कार और अमेरिका के इंटरनेशनल पर्सन ऑफ द ईयर सम्मान से भी नवाजा गया।
कुरियन को भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। इसके साथ ही रैमन मैग्सेसे पुरस्कार, कार्नेगी वटलर शांति पुरस्कार और अमेरिका के इंटरनेशनल पर्सन ऑफ द ईयर सम्मान से भी नवाजा गया।