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Sugar: कृत्रिम मिठास दिमाग और याददाश्त पर डालती है गहरा असर; शोधकर्ताओं ने मधुमेह पीड़ितों को चेताया
Thu, 09 Oct 2025 05:23 AM IST
शिवम गर्ग
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 09 Oct 2025 05:23 AM IST
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चीनी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Freepik.com
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जो लोग रोजाना शुगर-फ्री पेय और लो-कैलोरी मिठाइयों को हेल्दी विकल्प मानकर इस्तेमाल करते हैं सावधान हो जाए। ताजा अध्ययन में पता चला है कि एस्पार्टेम, सैकरिन, एसेसल्फेम-के, एरिथ्रिटॉल, जाइलिटॉल और सॉर्बिटॉल जैसे कृत्रिम मिठास के लंबे समय तक इस्तेमाल करने से इन्सानी की सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता को कमजोर करते हैं।
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ब्राजील के साओ पाउलो विश्वविद्यालय का यह अध्ययन न्यूरोलॉजी नामक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, मीठा अब सिर्फ स्वाद की बात नहीं, बल्कि मस्तिष्क पर घातक असर डालता है खासकर मधुमेह से पीड़ित लोगों में। शोधकर्ता डॉ. क्लॉडिया सुएमोटो और उनकी टीम ने अध्ययन में पाया कि जो लोग रोजाना अधिक मात्रा में कृत्रिम मिठास का सेवन करते हैं, उनमें संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) क्षमताओं यानी सोचने, याद रखने और समझने की गिरावट तेजी से होती है। अध्ययन में 12,772 वयस्कों को आठ वर्षों तक ट्रैक किया गया। प्रतिभागियों की औसत उम्र 52 वर्ष थी। अध्ययन की शुरुआत में उनसे खानपान से जुड़ी जानकारी ली गई।
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पिछले एक वर्ष में उन्होंने क्या-क्या खाया या पिया। इसके आधार पर उन्हें तीन समूहों में बांटा गया। पहला समूह कम मिठास लेने वाले औसतन 20 मिलीग्राम प्रतिदिन,दूसरा समूह मध्यम सेवन करने वाले और तीसरा समूह अधिक सेवन करने वाले औसतन 191 मिलीग्राम प्रतिदिन। इतनी मात्रा लगभग एक डाइट सोडा की कैन में पाए जाने वाले एस्पार्टेम के बराबर है। अध्ययन में पाया गया कि सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली कृत्रिम मिठास सॉर्बिटॉल थी, जिसका सेवन औसतन 64 मिलीग्राम प्रतिदिन तक किया गया।
सात में छह स्वीटनर्स के मिले नकारात्मक प्रभाव
प्रतिभागियों की दिमागी क्षमता को परखने पर नतीजे चौंकाने वाले मिले। जो लोग सबसे ज्यादा कृत्रिम मिठास का सेवन करते थे, उनमें याददाश्त और सोचने की क्षमता में गिरावट 62 प्रतिशत तेज पाई गई। मध्यम सेवन करने वालों में यह गिरावट 35 प्रतिशत थी, जबकि कम सेवन करने वालों में असर मामूली रहा। अध्ययन में सात प्रमुख स्वीटनर्स का विश्लेषण किया गया। इनमें एस्पार्टेम, सैकरिन, एसेसल्फेम-के, एरिथ्रिटॉल, जाइलिटॉल, सॉर्बिटॉल और टैगाटोज शामिल थे। जिसमें से टैगाटोज का असर निष्प्रभावी पाया गया, जबकि बाकी छह ने दिमागी कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाला।
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कृत्रिम मिठास से दूरी बनाना ही फायदेमंद
शोध निष्कर्ष है चीनी से बचने की कोशिश में अपनाई जा रही शुगर-फ्री आदतें हर बार फायदेमंद नहीं होतीं। खासकर डायबिटीज से पीड़ित लोग, जो इन कृत्रिम मिठासों का सबसे ज्यादा सेवन करते हैं, उन्हें इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। वैज्ञानिक समुदाय भी मानता है कि इस विषय पर आगे और विस्तृत रिसर्च की आवश्यकता है। अध्ययन का सार है कि कृत्रिम मिठास के मीठे स्वाद के पीछे छिपा वैज्ञानिक सच लोगों को सावधान कर रहा है कि कृत्रिम मिठास से दूरी बनाए रखना उचित होगा।