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Study Report: बढ़ती गर्मी तमिलनाडु में नमक बनाने वाले मजदूरों के लिए बनी परेशानी, गंभीर स्वास्थ्य का जोखिम

Fri, 11 Aug 2023 06:16 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 11 Aug 2023 06:16 PM IST
सार

अध्ययन से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि तमिलनाडु में नमक बनाने वाले सभी श्रमिकों के बीच किए गए शोध में कमजोर व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए अनुकूलन रणनीतियों और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल पहुंच की तत्काल आवश्यकता का पता चलता है।

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Study Report Says Rising heat stress due to climate change poses grave health risk to TN salt pan workers
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी की वजह से गर्मी का तनाव तमिलनाडु में नमक बनाने वाले श्रमिकों के लिए गंभीर व्यावसायिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रहा है। एक नए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

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यह अध्ययन श्री रामचन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च की डॉ. विद्या वेणुगोपाल के नेतृत्व में एक टीम द्वारा किया गया था। विद्या यूके एनआईएचआर (UK NIHR ) वित्त पोषित वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र की सह-अन्वेषक भी हैं। वह गैर-संचारी रोगों (non-communicable diseases ) के इंटरेक्शन और पर्यावरणीय परिवर्तन पर फोकस कर रही हैं।
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अधिकारियों ने कहा कि तमिलनाडु में नमक बनाने वाले सभी श्रमिकों के बीच किए गए शोध में कमजोर व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए अनुकूलन रणनीतियों और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल पहुंच की तत्काल आवश्यकता का पता चलता है। 2017 से 2020 के बीच तमिलनाडु के सात साल्ट पैन में 352 श्रमिकों पर अध्ययन किया गया। इस दौरान विभिन्न कार्य भूमिकाओं के लिए कार्यभार और अप्रत्यक्ष ताप तनाव स्तरों का मूल्यांकन किया गया। अध्ययन में प्रमुख संकेतक के तौर पर शिफ्ट से पहले और बाद की हृदय गति, शरीर का मुख्य तापमान, मूत्र की विशेषताएं, पसीने की दर और किडनी के कार्य मापदंडों को मापा गया।
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वेणुगोपाल ने कहा, अध्ययन में पाया गया कि प्रत्येक श्रमिक पर या तो भारी या मध्यम काम का बोझ था,और चिंताजनक रूप से लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारी गर्मी के जोखिम की अनुशंसित सीमा से ऊपर काम करते पाए गए। अंतरराष्ट्रीय नियम ऐसी परिस्थितियों में नियमित ब्रेक अवधि लागू करने की सलाह देते हैं, लेकिन जांच किए गए किसी भी नमक बनाने वाले स्थानों पर इस तरह के ब्रेक की सुविधा नहीं थी।

गीले बल्ब का वैश्विक तापमान (डब्ल्यूबीजीटी) मानव थर्मल सुविधा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारकों का एक समग्र माप है। यह विशेष रूप से गर्मी के महीनों के दौरान नमक बनाने वाले स्थानों पर सुरक्षित स्तर को लगातार पार कर रहा है। श्रमिकों ने गर्मी के कारण तनाव, निर्जलीकरण और मूत्र पथ के संक्रमण के लक्षणों की सूचना दी, जो संभवतः अत्यधिक पसीना आने, शौचालय तक पहुंच की कमी और उनकी शिफ्ट के दौरान सीमित पानी की खपत के कारण थे।

वेणुगोपाल ने कहा कि विशेष रूप से चिंता का विषय गुर्दे के स्वास्थ्य पर गर्मी के तनाव का प्रभाव है। अध्ययन में सात प्रतिशत श्रमिकों में कम अनुमानित ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर (ईजीएफआर) व्यापक रूप से होने का पता चला। ईजीएफआ किडनी के कार्य का एक संकेतक है। गर्मी का तनाव किडनी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं से जुड़ा हुआ है, जिनमें तीव्र किडनी की चोट, किडनी में पथरी, क्रोनिक किडनी रोग और मूत्र पथ के संक्रमण शामिल हैं।


वेणुगोपाल ने इस बात पर जोर दिया कि कमजोर व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए अनुकूलन रणनीतियों को लागू करने और स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता पहुंच और कल्याण सुविधाओं में सुधार के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

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