फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Study: Greening of the Arab region 400 years ago, climate change and changing weather patterns from developmen

अध्ययन: 400 साल पहले अरब क्षेत्र की हरियाली, जलवायु परिवर्तन और विकास परियोजनाओं से बदलते मौसम पैटर्न

Thu, 27 Feb 2025 05:51 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 27 Feb 2025 05:51 AM IST
सार

शोधकर्ताओं ने ओशन एक्सप्लोरर नामक शोध पोत से एक मील से अधिक गहराई पर एक रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) की मदद से तलछट के नमूने निकाले। यह नमूने उत्तरी लाल सागर के अकाबा की खाड़ी में गहरे समुद्र के नमकीन पानी के पूल से प्राप्त किए गए।

विज्ञापन
Study: Greening of the Arab region 400 years ago, climate change and changing weather patterns from developmen
अरब का रेगिस्तान - फोटो : instagram/@lifeinsaudiarabiaofficial

विस्तार

करीब 400 साल पहले अरब क्षेत्र में वर्तमान की तुलना में पांच गुना अधिक वर्षा होती थी। मियामी के रोसेनस्टील स्कूल ऑफ मरीन, एटमॉस्फेरिक एंड अर्थ साइंस के वैज्ञानिकों के अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि पिछले 2,000 वर्षों में यह क्षेत्र अत्यधिक आर्द्र था। कभी यह इलाका घने हरियाली से भरे सवाना जैसा था। जहां शेर, तेंदुए और भेड़िए पाए जाते थे, लेकिन आज यह पूरी तरह से सूखे रेगिस्तान में बदल चुका है। इस शोध के निष्कर्ष साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
विज्ञापन


शोधकर्ताओं ने ओशन एक्सप्लोरर नामक शोध पोत से एक मील से अधिक गहराई पर एक रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) की मदद से तलछट के नमूने निकाले। यह नमूने उत्तरी लाल सागर के अकाबा की खाड़ी में गहरे समुद्र के नमकीन पानी के पूल से प्राप्त किए गए। इन तलछट परतों ने लेट होलोसीन काल यानी हाल की भूवैज्ञानिक अवधि की वर्षा प्रवृत्तियों का सटीक रिकॉर्ड प्रदान किया। इससे ज्ञात हुआ कि क्षेत्र में लगभग 200 साल पहले तक वर्तमान की तुलना में दोगुनी बारिश होती थी।
विज्ञापन


जलवायु परिवर्तन का हॉटस्पॉट माना जाता है पश्चिम एशिया...
पश्चिम एशिया को जलवायु परिवर्तन का हॉटस्पॉट माना जाता है, जहां सर्दियों की मूसलाधार बारिश से अचानक बाढ़ आती है, जबकि लंबे समय तक सूखे के कारण गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न होते हैं। लेट होलोसीन काल की वर्षा में आए बदलाव बताते हैं कि इस क्षेत्र में बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं से बचाव के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने और भविष्य के जलवायु रुझानों को समझने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विकास परियोजनाएं ला रहीं बदलाव...
2024 की सर्दियों में अरब प्रायद्वीप में आई भयावह बाढ़ इस बात को दर्शाती है कि चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता का गहन अध्ययन करना जरूरी हो गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार सऊदी अरब में निओम जैसी बड़ी विकास परियोजनाएं इस क्षेत्र के भौगोलिक स्वरूप को नया आकार दे रही हैं। यह अध्ययन इस बात की ओर इशारा करता है कि चरम मौसम की घटनाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अधिक लचीली नीतियां और आपदा प्रबंधन रणनीतियां विकसित करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed