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चिंताजनक: मौसमी घटनाएं भी एचआईवी फैलाती हैं, परीक्षण में कमी से पीड़ितों का स्वास्थ्य और भी हो रहा बदतर
Wed, 22 Jan 2025 06:47 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Wed, 22 Jan 2025 06:47 AM IST
सार
शोधकर्ताओं का कहना है कि चरम मौसम की घटनाएं एचआईवी के खतरों को बढ़ाने वाली प्रथाओं में वृद्धि से भी जुड़ी पाई गईं, जैसे कि कंडोम के बिना मिलन करना। इस तरह की स्थितियां नए एचआईवी संक्रमण में वृद्धि को बढ़ावा देती हैं।
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एचआईवी संक्रमण
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाएं एचआईवी की रोकथाम और मरीजों की देखभाल को कई तरह से प्रभावित करती हैं। एचआईवी फैलने में वृद्धि और परीक्षण में कमी की वजह से एचआईवी से पीड़ित लोगों का स्वास्थ्य और भी बदतर होने का अंदेशा रहता है।
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टोरंटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में एचआईवी से जुड़े 22 अध्ययनों का विश्लेषण किया। करंटओपिनियन इन इन्फेक्शियस डिजीज में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण एचआईवी की रोकथाम और देखभाल में नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि चरम मौसम की घटनाएं एचआईवी के खतरों को बढ़ाने वाली प्रथाओं में वृद्धि से भी जुड़ी पाई गईं, जैसे कि कंडोम के बिना मिलन करना। इस तरह की स्थितियां नए एचआईवी संक्रमण में वृद्धि को बढ़ावा देती हैं।
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समय से नहीं मिल पाता इलाज
चरम मौसमी घटनाओं के कारण स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है। प्रवासन और विस्थापन में वृद्धि होती है, जिससे रोकथाम और परीक्षण के लिए एचआईवी क्लीनिकों तक पहुंच में रुकावट आती है। एचआईवी से पीड़ित लोग देखभाल से पूरी तरह वंचित हैं। प्रभावित इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण स्वास्थ्यकर्मी संक्रमण को रोकने में पूरी तरह से नाकाम हो रहे हैं। समय पर सही उपचार न मिलने के कारण उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ रहा है।
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अनुकूल रणनीति नहीं बनाई जा रही
शोधकर्ताओं का कहना है कि अत्यधिक गर्मी, जंगल की आग, तूफान और भौगोलिक क्षेत्रों में जलवायु में तेजी से हो रहे बदलाव तथा बढ़ती एचआईवी दरों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जा रहा है। इन परिस्थितियों के लिए अलग रणनीति और विषय केंद्रित शोध की भारी कमी महसूस की जा रही है है। एचआईवी की देखभाल पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए अलग-अलग स्तरों की रणनीतियों की आवश्यकता है। इसके लिए लंबे समय तक एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी, दवा वितरण आपूर्ति में वृद्धि और समुदाय-आधारित दवा वितरण के साथ आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करने की जरूरत है।
कुछ नए कदम उठाने का समय
शोध के निष्कर्ष में कहा है कि चरम मौसम की घटनाओं के दौरान एचआईवी से निपटने के लिए नए काम जैसे कि मोबाइल फार्मेसी और स्वास्थ्य क्लिनिक, खाद्य और जल असुरक्षा को कम करने वाले काम देखभाल को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं। जलवायु परिवर्तन के तहत एचआईवी रोकथाम और हस्तक्षेप रणनीतियों का परीक्षण करने के लिए अधिक शोध और मूल्यांकन की आवश्यकता है।