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Triple-dip La-Nina: दमघोंटू बनी मुंबई की हवा, पीएम स्तर में 30 फीसदी उछाल; कई बड़े शहरों पर भी रिपोर्ट जारी
Mon, 19 Feb 2024 06:26 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Mon, 19 Feb 2024 06:26 AM IST
सार
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज’ के ‘चेयर प्रोफेसर’ गुरफान बेग की टीम द्वारा किए गए हालिया अध्ययन किया गया। जहां उत्तर भारत में वायु गुणवत्ता में सुधार दिखा, वहीं मुंबई समेत अन्य शहरों में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखी गई।
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सांकेतिक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
भारत में जलवायु परिवर्तन के साथ ही वायु गुणवत्ता में असामान्य बदलाव के लिए ‘ट्रिपल-डिप’ ला-नीना जिम्मेदार है। मौसम संबंधी गतिविधि के कारण 2022-23 के सर्दियों के महीने में इसके परिणाम देखने को मिले थे। जहां उत्तर भारत में वायु गुणवत्ता में सुधार दिखा, वहीं प्रायद्वीपीय भारत में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखी गई। लगातार तीन साल (2020-23) तक ला नीना का सागर एवं दुनियाभर में मौसम पर व्यापक असर रहा।
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‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज’ के ‘चेयर प्रोफेसर’ गुरफान बेग की टीम द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। इसमें कहा गया है कि स्थानीय उत्सर्जन के अलावा तेजी से बदलती जलवायु वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला एक अहम कारक है। ‘एल्सेवियर जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, 2022-23 में सर्दियों के दौरान प्रायद्वीपीय भारत के शहरों में वायु गुणवत्ता बहुत बिगड़ गई, जो हाल के दशकों के दौरान नजर आए रुझान के विपरीत है।
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मुंबई में पीएम स्तर में 30 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बिगड़ी गुणवत्ता
‘ट्रिपल-डिप’ ला-नीना के कारण मुंबई में पीएम 2.5 स्तरों में 30 प्रतिशत की वृद्धि के साथ वायु गुणवत्ता सबसे अधिक बिगड़ गई। प्रायद्वीपीय भारत के अन्य शहरों में कोयंबटूर में प्रदूषकों में 28 प्रतिशत, बंगलूरू में 20 प्रतिशत और चेन्नई में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, उत्तर भारत के कई शहरों में वायु गुणवत्ता ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ के तहत निर्धारित पंचवर्षीय लक्ष्य पर बिल्कुल कम समय में पहुंच गई।
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गाजियाबाद, नोएडा में हवा हुई साफ
उत्तर भारत के शहरों में गाजियाबाद में प्रदूषकों के स्तर में 33 प्रतिशत की कमी के साथ वायु गुणवत्ता में काफी सुधार आया। जबकि, रोहतक (प्रदूषकों में 30 प्रतिशत की कमी) और नोएडा (प्रदूषकों में 28 प्रतिशत की कमी) क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। दिल्ली में यह आंकड़ा 10 प्रतिशत था।
लगातार तीन साल तक दुनियाभर के मौसम पर दिखा असर
अध्ययन के सह-लेखक आरएच कृपलानी ने कहा, असामान्य ट्रिपल डिप ला नीना मौसमी गतिविधि के आखिरी चरण में 2022-23 का शीतकाल आया। 21वीं सदी में यह पहली प्राकृतिक घटना है। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में इसने बड़े पैमाने पर वायु प्रवाह पर असर डाला तथा उत्तर भारत के शहरों में प्रदूषकों के इकट्ठा होने की दशा को रोकने व वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में निर्णायक भूमिका निभाई। इसके उलट उसने प्रायद्वीपीय भारत के शहरों में प्रदूषकों के एक जगह संकेंद्रण जैसी स्थितियां पैदा कीं जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ा।
क्या है ट्रिपल-डिप ला नीना
यह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह के तापमान का बहुवर्षीय शीतलन है, जो सूखे, भयंकर हवाओं व भारी वर्षा का कारण बन सकता है।