फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Study: Antarctica's sea ice decreased Due to atmospheric expansion, Indian scientists solved mystery

अध्ययन: वायुमंडलीय प्रसार से अंटार्कटिका के समुद्री बर्फ में आई कमी, भारतीय वैज्ञानिकों ने सुलझाया रहस्य

Fri, 26 Apr 2024 05:49 AM IST
शिव शरण शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 26 Apr 2024 05:49 AM IST
सार

दुनिया भर में तापमान में वृद्धि के कारण पिछले दशक में आर्कटिक की समुद्री बर्फ का भारी नुकसान हुआ। जबकि अंटार्कटिक में 2015 तक मध्यम वृद्धि दिखाई दी थी और उसके बाद 2016 से इसमें कमी आने लगी। खासतौर पर  2016 से 2022 तक हर साल गर्मी के मौसम में अत्यधिक धीमी गति से समुद्री बर्फ बढ़ने के बाद 2023 में अचानक इसमें भारी कमी आई।

विज्ञापन
Study: Antarctica's sea ice decreased Due to atmospheric expansion, Indian scientists solved mystery
अंटार्कटिका - फोटो : ANI

विस्तार

अंटार्कटिका के समुद्री बर्फ में कमी का सबसे बड़ा कारण महासागर के ऊपरी हिस्से की अत्यधिक गर्मी थी। भारतीय वैज्ञानिकों ने ताजा अध्ययन से इस रहस्य को सुलझा लिया है। यह अध्ययन भारत के नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (एनसीपीओआर) और यूके में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण के सहयोग से किया गया है। अध्ययन में उन स्थितियों की जानकारी दी गई है जिनके कारण 2023 में अंटार्कटिक में बर्फ में भारी कमी, बर्फ के पीछे हटने के कारण उत्पन्न हुई।

विज्ञापन


दुनिया भर में तापमान में वृद्धि के कारण पिछले दशक में आर्कटिक की समुद्री बर्फ का भारी नुकसान हुआ। जबकि अंटार्कटिक में 2015 तक मध्यम वृद्धि दिखाई दी थी और उसके बाद 2016 से इसमें कमी आने लगी। खासतौर पर  2016 से 2022 तक हर साल गर्मी के मौसम में अत्यधिक धीमी गति से समुद्री बर्फ बढ़ने के बाद 2023 में अचानक इसमें भारी कमी आई। अंटार्कटिका में धीमी गति से बर्फ का विस्तार सात सितंबर 2023 को  69 लाख 80 हजार वर्ग किमी की बर्फ की सीमा के साथ वार्षिक अधिकतम से पहले हुआ, जो एक करोड़ 46 लाख वर्ग किमी की लंबी अवधि के औसत से कम था।
विज्ञापन


ऐसे बदले हालात
अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि महासागर के ऊपरी हिस्से की अत्यधिक गर्मी (एक्सेसिव अपर ओशन हीट) बर्फ के विस्तार को कम करने के लिए जिम्मेदार थी। इसके अलावा इस दौरान वायुमंडलीय प्रसार में अत्यधिक बदलावों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हवा के पैटर्न में बदलाव के कारण महासागर में उत्तर की ओर तेज हवाएं चलीं। उत्तरी हवा ने वायुमंडलीय तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि की और बर्फ के किनारों को अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर रहने के लिए विवश किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


वेडेल सागर में ब्रिटेन के आकार के बराबर बर्फ की हानि
तेज हवाओं और ध्रुवीय चक्रवातों का असर ऐसा था कि वेडेल सागर में बर्फ का किनारा कुछ ही दिनों में 256 किमी तक दक्षिण की ओर तेजी से खिसक गया, जिससे ब्रिटेन के आकार के बराबर बर्फ की हानि हुई। शोधकर्ताओं का कहना है कि लगभग 45 साल के उपग्रह अवलोकनों के रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए यह आकलन करना कठिन है कि पिछले सात वर्षों के दौरान देखी गई बर्फ की मात्रा में कमी और वृद्धि की मुख्य वजह क्या हैं। अध्ययन के अनुसार इस क्षेत्र में मानवजनित दबाव और जलवायु परिवर्तनशीलता के बीच परस्पर क्रिया अस्पष्ट है और जिसकी आगे जांच की जानी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed