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पढ़ाई में पिछड़े ओबीसी, दलित वर्ग और गांव के बच्चे

Sun, 08 May 2016 03:11 AM IST
धीरज कनोजिया/ अमर उजाला, दिल्ली
धीरज कनोजिया/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 08 May 2016 03:11 AM IST
सार

  •  गणित, अंग्रेजी, विज्ञान समेत किसी भी विषय में नहीं हैं आगे
  • शहर के बच्चे काफी आगे, सामान्य श्रेणी के बच्चों से कोई मुकाबला नहीं

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Students from villages lack in education: survey
स्टूडेंट्स

विस्तार

एनसीईआरटी के ताजा सर्वेक्षण की रिपोर्ट गांवों में शिक्षा के बदहाल स्तर की तस्वीर है। इस रिपोर्ट के मुताबिक अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और आधुनिक भारतीय भाषा जैसे विषयों में ग्रामीण स्कूलों के बच्चे शहरी बच्चों से काफी पीछे हैं।

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अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विद्यार्थियों की समझ और जानकारी अनसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों के मुकाबले बेहतर पाई गई, हालांकि सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों की तुलना में वे पीछे हैं। नेशनल अचीवमेंट सर्वे- 2015 की रिपोर्ट ग्राम्य इलाकों में पढ़ने वालों और दलित-पिछड़े वर्ग के बच्चों को वंचित स्थिति में मानती है।
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एनसीईआरटी के नेशनल अचीवमेंट सर्वे में 7216 स्कूलों के 2,77,416 छात्रों को शामिल किया गया। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बार्ड (सीबीएसई) के साथ-साथ 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वे हुआ।

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दसवीं के छात्रों पर किया गया ये सर्वे

Students from villages lack in education: survey
छात्र - फोटो : अमर उजाला

दसवीं के छात्रों पर किए इस सर्वे में एनसीईआरटी ने अंग्रेजी, विज्ञान, गणित समेत अन्य विषयों में भी गांव के बच्चों, खासकर दलित-पिछड़े वर्ग के बच्चों को शहरी व सामान्य श्रेणी के बच्चों से आगे नहीं पाया।

हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, नगालैंड और मेघालय के शहरी बच्चे अंग्रेजी में गांव के छात्रों से बहुत आगे हैं। गणित में गुजरात के शहरी बच्चे आगे हैं। इसी तरह विज्ञान में गुजरात, गोवा, मेघालय, त्रिपुरा के शहरी और गांव के बच्चों की जानकारी में काफी अंतर पाया गया। हालांकि असम, केरल और पश्चिम बंगाल में गांवों के बच्चे शहरों से बेहतर हैं।

सामाजिक विज्ञान में जम्मू-कश्मीर, गोवा और गुजरात में शहर और गांव के बच्चों की समझ में बड़ा अंतर है। केवल केरल में सामाजिक ज्ञान में गांवों के बच्चे शहरी बच्चों से बेहतर हैं। आधुनिक भारतीय भाषा में जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, गुजरात, त्रिपुरा, उड़ीसा, मध्य प्रदेश के ग्रामीण बच्चे बहुत ज्यादा पिछड़े हैं। इसी विषय में लक्षदीप के ग्रामीण बच्चे शहरी छात्रों से आगे हैं।

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