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Dharmendra Pradhan Resigns: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, वजह भी बताई; कहा- मन दुखी है

Sat, 25 Jul 2026 02:24 PM IST
Pavan एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Sat, 25 Jul 2026 02:24 PM IST
सार

Dharmendra Pradhan Resignation: नीट परीक्षा पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जून महीने में पेपर लीक होने के बाद से देश भर के छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा था, इसी बीच देश की राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर छात्रों के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दलों की तरफ से प्रदर्शन भी किया गया। अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने क्या-क्या कहा, पढ़िए...

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Dharmendra Pradhan Resign News: Gen Z Protest Jantar Mantar Delhi CJP News in Hindi
धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से दिया इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के पेपर लीक विवाद और पिछले कई हफ्तों से चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और चौतरफा दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही थी और इस इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि, पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने शुरू से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और अपने फैसले पर अड़ी रही। आज सरकार और सीजेपी के तीसरे दौर की वार्ता से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा सौंपा है।
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Dharmendra Pradhan Resign News: Gen Z Protest Jantar Mantar Delhi CJP News in Hindi
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर साझा किया पत्र

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे का पत्र जारी किया। जिसमें उन्होंने लिखा- मेरे युवा साथियों, मैं पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।
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धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

'देश के युवाओं की अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं'

उन्होंने कहा, मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ, उसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं।
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धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

नीट पेपर लीक पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?

उन्होंने आगे लिखा, तीन मई 2026 को हुई नीट-यूजी की परीक्षा में अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तारीख की घोषणा की। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी मोड में करने का निर्णय लिया गया।

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धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

री-नीट पर धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए 'पूरी सरकार का समन्वित दृष्टिकोण' के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, खासकर जिला प्रशासन की अहम भूमिका रही। उन्होंने आगे कहा, साथ ही छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।

धर्मेंद्र प्रधान बोले- छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे

पहले ही दिन से मैंने इसकी जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने आगे लिखा, 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।

 

 

आखिर धर्मेंद्र प्रधान को क्यों देना पड़ा इस्तीफा?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे पिछले कई हफ्तों से बन रहा भारी सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव था। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा की शुचिता से समझौता होने के आरोपों को लेकर देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश था। इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच और कानूनी कार्रवाई पहले से ही चल रही है। विरोधियों और छात्र संगठनों का आरोप था कि केंद्र सरकार परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को दूर करने और छात्रों की चिंताओं का समय पर समाधान करने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके बाद उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना पड़ा। 

इस्तीफे के पीछे किस आंदोलन का सबसे बड़ा हाथ?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से कॉकरोच जनता पार्टी के हाथों में था। सीजेपी जून की शुरुआत से ही इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरी हुई थी। इस आंदोलन का सबसे बड़ा मोड़ 20 जुलाई को आया, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों और युवा पेशेवरों का ऐतिहासिक हुजूम उमड़ पड़ा। उन्होंने वहां से संसद भवन तक मार्च करने की योजना बनाई थी, जिसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा युवा आंदोलन बताया गया। दिल्ली के अलावा मुंबई समेत कई अन्य बड़े शहरों में भी इस आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।

सोनम वांगचुक के अनशन ने आंदोलन को कैसे धार दी?

नीट परीक्षा में सुधारों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को तब और बड़ी ताकत मिली, जब जाने-माने शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में आ गए। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। 20 दिनों के लंबे अनशन के बाद जब उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने लगा, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य ने पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे की तरफ खींचा। उनके अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिसने आंदोलन की आग को और भड़का दिया। 
 

पेपर लीक पर क्या कदम उठा रही है सरकार?

इस भारी हंगामे और विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि परीक्षाओं की पवित्रता के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें 'कड़े से कड़ा दंड' दिया जाएगा। एनडीए संसदीय दल की बैठक के बाद किरेन रिजिजू के माध्यम से प्रधानमंत्री का यह कड़ा संदेश देश के सामने रखा गया। इतना ही नहीं, इस संकट के स्थायी समाधान के लिए सरकार सोमवार को संसद में एक बेहद सख्त नया कानून 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करने जा रही है। इस नए बिल में परीक्षा लीक कराने वाले सेंटरों, पेपर लीक माफियाओं और दोषी संस्थानों के खिलाफ बेहद कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
 

एंटी-पेपर लीक बिल पर टिकीं निगाहें

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री का जाना नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी परीक्षा और नीतिगत व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवालों का नतीजा है। अब देश के लाखों प्रभावित छात्रों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सोमवार को संसद में पेश होने वाला नया एंटी-पेपर लीक बिल और केंद्रीय एजेंसियों की चल रही जांच उनकी खोई हुई मानसिक शांति और परीक्षा प्रणाली में उनके भरोसे को वापस बहाल कर पाएगी।
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