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स्टीक 'खुफिया तंत्र' की बदौलत आतंकियों पर बाज बन कर टूट रहे सुरक्षा बल, नहीं दे रहे ठिकाना बदलने का मौका
Fri, 12 Jun 2020 02:29 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 12 Jun 2020 02:29 PM IST
सार
घाटी में नियमित सर्च ऑपरेशन की कमान संभाल रहे सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने बताया कि अभी जून का महीना आधा भी नहीं गुजरा है। आप देखेंगे कि जब तक पूरे छह माह होंगे, संभव है कि आतंकियों को मार गिराने का एक रिकॉर्ड ही बन जाए...
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Terrorist encounter
- फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार
भारतीय सुरक्षा बल, सटीक 'खुफिया तंत्र' की बदौलत आतंकियों पर बाज बन कर टूट रहे हैं। सुरक्षा बलों को समय रहते आतंकियों से जुड़ी कई सूचनाएं मिलती रहीं।
नतीजा, कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों ने नियमित सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सेना और सीआरपीएफ ने अपने-अपने 'खुफिया तंत्र' के जरिए आतंकियों से जुड़ी अनेक सूचनाएं जुटाई।
हालांकि घाटी में जम्मू-कश्मीर पुलिस का 'खुफिया' नेटवर्क बहुत सटीक और पुख्ता सूचनाएं एकत्रित करने के लिए पहचाना जाता है। इन तीनों के 'खुफिया तंत्र' का तालमेल का नतीजा यह रहा कि आतंकियों को ठिकाना बदलने का मौका नहीं मिल सका।
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वे जहां थे, वहां से बाहर नहीं जा सके। सुरक्षा बलों ने इसका पूरा फायदा उठाया और आतंकियों को उनके ठिकाने पर जाकर मारना शुरू कर दिया। कश्मीर में जनवरी से लेकर अभी तक 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे जा चुके हैं।
आप देखेंगे कि जब तक पूरे छह माह होंगे तो संभव है कि आतंकियों को मार गिराने का एक रिकॉर्ड ही बन जाए। सुरक्षा बलों के पास इस वक्त बेहद मजबूत खुफिया है। हमें यह भी पता चल जाता है कि आतंकवादी अपने ठिकाने से निकलने का प्रयास करेंगे या नहीं।
उनकी संख्या और हथियारों का अंदाजा भी ठीक से लग रहा है। खुफिया यूनिट की रिपोर्ट पुख्ता होते ही आतंकियों के छिपे होने के इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू हो जाता है।
हम आतंकियों के ठिकाने पर सीधे हमला भी कर सकते हैं, लेकिन शुरू में ऐसा करने से गुरेज करते हैं। वजह, कई बार आतंकी सघन आबादी के बीच किसी ठिकाने पर छिपे होते हैं।
वहां पर ऑपरेशन के कारण दूसरे लोगों की जान जोखिम में आ जाती है। ऐसी स्थिति में पहले सर्च ऑपरेशन पर ही जोर देते हैं।
हालांकि हमारे जवान उनके ठिकाने के आसपास पहले से ही तैनात रहते हैं। यदि कोई आतंकी वहां से भागने का प्रयास करता है तो उसे वहीं ढेर कर दिया जाता है।
इनमें हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के टॉप आतंकी मारे गए हैं।
घाटी में जब से आतंकियों को स्थानीय मदद मिलनी कम हुई है, तभी से हमारे अधिकांश ऑपरेशन पूरी तरह कामयाब हो रहे हैं।
आतंकियों को ठिकाना बदलने का मौका तक नहीं मिल रहा है। सुरक्षा बलों के मजबूत चक्रव्यूह की वजह से आतंकी किसी भी रास्ते से अपने नए ठिकाने तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
वे अपने पुराने ठिकाने पर मारे जा रहे हैं या बाहर निकलने का प्रयास करते हुए सुरक्षा बलों की राइफल का निशाना बनते हैं।
चूंकि कश्मीर में सड़क मार्ग से भी आतंकियों के लिए अब सफर करना उतना आसान नहीं रहा है। पहले ऐसी खबरें आई थी कि आतंकी एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए ट्रकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, अब ट्रकों पर खुफिया तंत्र खास नजर रख रहा है।
दूसरा, चेकपोस्ट पर इंटेलिजेंस की ओर से दी गई यह सूचना रहती है कि फलां दिन इतने वाहनों पर कड़ी नजर रखी जाए।
साथ ही ढाई सौ आतंकवादी पाकिस्तानी सीमा के भीतर बने लॉचिंग पैड से कश्मीर घाटी में घुसपैठ करने के लिए तैयार हैं।
सुरक्षा बलों का प्रयास है कि दक्षिणी कश्मीर में छिपे आतंकियों का सिलसिलेवार तरीके से खात्मा किया जाए।
इसके लिए खुफिया तंत्र काम कर रहा है। इन आतंकियों में ज्यादातर हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से जुड़े हैं।
डीजीपी दिलबाग सिंह कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ सफल अभियान चला रही है।
इन आतंकवादियों का मकसद है कि वे लोगों में अपनी दहशत कायम रखें। अब घाटी के युवा भी उनके बहकावे में नहीं आ रहे हैं। स्थानीय मदद मिलना भी कम हो गया है।
पाकिस्तानी एजेंसी इन आतंकियों को हर तरह की मदद दे रही है। हमारा प्रयास है कि इस साल ज्यादा से ज्यादा आतंकियों का खात्मा किया जाए।
घाटी और दूसरे हिस्सों में मौजूद इनके हमदर्द लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है।
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नतीजा, कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों ने नियमित सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सेना और सीआरपीएफ ने अपने-अपने 'खुफिया तंत्र' के जरिए आतंकियों से जुड़ी अनेक सूचनाएं जुटाई।
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हालांकि घाटी में जम्मू-कश्मीर पुलिस का 'खुफिया' नेटवर्क बहुत सटीक और पुख्ता सूचनाएं एकत्रित करने के लिए पहचाना जाता है। इन तीनों के 'खुफिया तंत्र' का तालमेल का नतीजा यह रहा कि आतंकियों को ठिकाना बदलने का मौका नहीं मिल सका।
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वे जहां थे, वहां से बाहर नहीं जा सके। सुरक्षा बलों ने इसका पूरा फायदा उठाया और आतंकियों को उनके ठिकाने पर जाकर मारना शुरू कर दिया। कश्मीर में जनवरी से लेकर अभी तक 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे जा चुके हैं।
सुरक्षा बलों के पास बेहद मजबूत है 'खुफिया तंत्र'
घाटी में नियमित सर्च ऑपरेशन की कमान संभाल रहे सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने बताया कि अभी जून का महीना आधा भी नहीं गुजरा है।आप देखेंगे कि जब तक पूरे छह माह होंगे तो संभव है कि आतंकियों को मार गिराने का एक रिकॉर्ड ही बन जाए। सुरक्षा बलों के पास इस वक्त बेहद मजबूत खुफिया है। हमें यह भी पता चल जाता है कि आतंकवादी अपने ठिकाने से निकलने का प्रयास करेंगे या नहीं।
उनकी संख्या और हथियारों का अंदाजा भी ठीक से लग रहा है। खुफिया यूनिट की रिपोर्ट पुख्ता होते ही आतंकियों के छिपे होने के इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू हो जाता है।
हम आतंकियों के ठिकाने पर सीधे हमला भी कर सकते हैं, लेकिन शुरू में ऐसा करने से गुरेज करते हैं। वजह, कई बार आतंकी सघन आबादी के बीच किसी ठिकाने पर छिपे होते हैं।
वहां पर ऑपरेशन के कारण दूसरे लोगों की जान जोखिम में आ जाती है। ऐसी स्थिति में पहले सर्च ऑपरेशन पर ही जोर देते हैं।
हालांकि हमारे जवान उनके ठिकाने के आसपास पहले से ही तैनात रहते हैं। यदि कोई आतंकी वहां से भागने का प्रयास करता है तो उसे वहीं ढेर कर दिया जाता है।
ठिकाना बदलने का मौका तक नहीं मिल रहा
अधिकारी के मुताबिक, लॉकडाउन से पहले और उसके बाद पुख्ता इंटेलिजेंस की मदद से अभी तक दो दर्जन से अधिक छोटे-बड़े ऑपरेशन चलाए गए हैं।इनमें हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के टॉप आतंकी मारे गए हैं।
घाटी में जब से आतंकियों को स्थानीय मदद मिलनी कम हुई है, तभी से हमारे अधिकांश ऑपरेशन पूरी तरह कामयाब हो रहे हैं।
आतंकियों को ठिकाना बदलने का मौका तक नहीं मिल रहा है। सुरक्षा बलों के मजबूत चक्रव्यूह की वजह से आतंकी किसी भी रास्ते से अपने नए ठिकाने तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
वे अपने पुराने ठिकाने पर मारे जा रहे हैं या बाहर निकलने का प्रयास करते हुए सुरक्षा बलों की राइफल का निशाना बनते हैं।
चूंकि कश्मीर में सड़क मार्ग से भी आतंकियों के लिए अब सफर करना उतना आसान नहीं रहा है। पहले ऐसी खबरें आई थी कि आतंकी एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए ट्रकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, अब ट्रकों पर खुफिया तंत्र खास नजर रख रहा है।
दूसरा, चेकपोस्ट पर इंटेलिजेंस की ओर से दी गई यह सूचना रहती है कि फलां दिन इतने वाहनों पर कड़ी नजर रखी जाए।
निशाने पर हैं दक्षिण कश्मीर में छिपे 130 आतंकी
सुरक्षा बलों ने अब दक्षिणी-कश्मीर में छिपे करीब 130 आतंकियों को टारगेट पर लिया है। इनमें दो दर्जन विदेशी आतंकवादी भी हैं।साथ ही ढाई सौ आतंकवादी पाकिस्तानी सीमा के भीतर बने लॉचिंग पैड से कश्मीर घाटी में घुसपैठ करने के लिए तैयार हैं।
सुरक्षा बलों का प्रयास है कि दक्षिणी कश्मीर में छिपे आतंकियों का सिलसिलेवार तरीके से खात्मा किया जाए।
इसके लिए खुफिया तंत्र काम कर रहा है। इन आतंकियों में ज्यादातर हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से जुड़े हैं।
डीजीपी दिलबाग सिंह कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और सीआरपीएफ के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ सफल अभियान चला रही है।
इन आतंकवादियों का मकसद है कि वे लोगों में अपनी दहशत कायम रखें। अब घाटी के युवा भी उनके बहकावे में नहीं आ रहे हैं। स्थानीय मदद मिलना भी कम हो गया है।
पाकिस्तानी एजेंसी इन आतंकियों को हर तरह की मदद दे रही है। हमारा प्रयास है कि इस साल ज्यादा से ज्यादा आतंकियों का खात्मा किया जाए।
घाटी और दूसरे हिस्सों में मौजूद इनके हमदर्द लोगों पर भी कार्रवाई हो रही है।