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चीन से तनाव, लेकिन दवाओं के लिए उस पर निर्भरता पहले से अधिक बढ़ी

परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 15 Mar 2021 07:44 AM IST
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india china - फोटो : फाइल फोटो

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चीन से सीमा पर तनाव होने के बीच दवाओं के लिए भारत की निर्भरता पहले से अधिक बढ़ी है। कोरोना महामारी में सबसे ज्यादा कच्चा माल चीन से ही भारत पहुंचा है। साल 2020 में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार कोरोना के साथ चीनी सेना की हरकतों को रोकने में जुटी हुई थी। वहीं दवाएं बनाने के लिए सबसे अधिक कच्चा माल चीन से लेना पड़ा।
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तीन साल में लगातार हुई बढ़ोतरी, कच्चे माल से भारत में तैयार हुईं दवाएं
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 72 फीसदी से भी ज्यादा कच्चा माल चीन से मंगवाना पड़ा। इतना ही नहीं पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो कच्चे माल के लिए भारत की चीन पर निर्भरता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।


विशेषज्ञों की मानें तो आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के पास दवा कारोबार सबसे बेहतर विकल्प है। सीडीएससीओ के अनुसार, दुनियाभर में 80 फीसदी तक जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाला भारत कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है। वर्ष 2018 में 66.53, 2019 में 72.40 और साल 2020 में 72.15 फीसदी कच्चा माल चीन से आयात हुआ है।

चीन पर बढ़ी निर्भरता, 2020 में 72 प्रतिशत कच्चा माल आया
केंद्रीय  स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने सदन में कहा है कि एक्टिव फॉर्मास्युटिकल्स घटक (एपीआई) के घरेलु विनिर्माण को बढ़ाने के लिए पीएलआई योजना को शुरू किया है। बल्क ड्रग पार्क संवर्धन और फॉर्मास्युटिकल्स के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना पर काम चल रहा है।

सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर नहीं
बीडीएमए के अध्यक्ष वीवी कृष्णन रेड्डी कहते हैं कि जमीनी स्तर पर सरकार की योजनाएं अभी दिखाई नहीं दे रही हैं। हालांकि उन्होंने आगामी महीनों में ऐसा होने की उम्मीद जाहिर की है। उन्होंने कहा, अभी एक से दो साल तक भारतीय दवा कारोबार के लिए यह संकट जारी रहेगा।

भारत चीन पर निर्भरता खत्म करना चाहता है
बल्क ड्रग मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (बीडीएमए) के उपाध्यक्ष बीआर सिकरी के अनुसार भारतीय दवा कारोबार कच्चे माल के लिए चीन से अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है पर कारोबारियों के पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। इसका फायदा चीन बड़ी चालाकी के साथ उठा रहा है।

पीएम प्रोत्साहन योजना के खिलाफ चीन की चाल
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम प्रोत्साहन योजना को प्रभावित करने के उद्देश्य से चीन ने कच्चे माल की कीमतों को बढ़ाया है। चार महीने पहले तक पैरासिटामॉल गोली के लिए 320 रुपये प्रति किलोग्राम एपीआई उपलब्ध होता था लेकिन अब इसमें 103 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। अब यही माल भारतीय कंपनियों को 650 रुपये प्रतिकिलोग्राम में मिल रहा है।

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