विपक्ष और सत्ता पक्ष ने बदली रणनीति, फिर भी नहीं चली संसद
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लोकसभा में बृहस्पतिवार को एक नाटकीय घटनाक्रम में सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित हो गई। नोट बंदी पर विपक्ष और सरकार ने अचानक अपना स्टैंड बदल लिया। अब तक मतविभाजन वाले नियम पर चर्चा के लिए जिद पर अड़े विपक्ष ने अचानक किसी भी नियम के तहत चर्चा कराने का प्रस्ताव रखा।
जबकि सरकार ने भी अपना स्टैंड बदलते हुए कहा कि अब नोटबंदी के बदले अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा घोटाले पर पहले चर्चा होनी चाहिए। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर चर्चा से भागने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। फिर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही शून्यकाल के दौरान दिन भर के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले टीएमसी के सुदीप बंदोपाध्याय और कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष नोटबंदी पर हर हाल में चर्चा के लिए तैयार है। सरकार चाहे तो बिना मतविभाजन वाले नियम पर अभी से चर्चा शुरू करने पर हामी भरे।
पहले अगस्ता घोटाले पर चर्चा होनी चाहिए
इसी बीच टीआरएस जीतेंद्र रेड्डी ने सरकार का साथ देते हुए टीएमसी और कांग्रेस से पूछा कि अगर वह किसी भी नियम के तहत चर्चा के लिए तैयार थे तो फिर इतने दिनों तक सदन की कार्यवाही क्यों नहीं चलने दी। इस पर उनकी टीएमसी सदस्य कल्याण बनर्जी से तीखी नोंकझोंक हुई। बनर्जी ने उन्हें विपक्ष की जगह सरकार की ओर बैठने की सलाह दी।
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार नोटबंदी पर चर्चा के लिए तैयार है। मगर इस बीच अगस्ता घोटाले में कई खुलासे हुए हैं। एक हथियार सौदागर की डायरी से खुलासा हुआ है कि कांग्रेस के प्रथम परिवार को इस सौदे में कमीशन दिया गया।
कुमार ने कहा कि कई विपक्षी दल कालेधन को सफेद बनाने की मुहिम में जुटे हैं। ऐसे में पहले अगस्ता घोटाले पर चर्चा होनी चाहिए। इसके बाद विपक्ष के सदस्य वेल में आ कर तो सत्ता पक्ष के सदस्यों ने अपनी अपनी जगह खड़े हो कर हंगामा करना शुरू कर दिया।