ना खाता देखा ना बही, ग्लैमर की चकाचौंध में बर्बाद हुए माल्या
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उम्र 60 वर्ष। रंग गेहूंआ। कद करीब पांच फीट दस इंच। शरीर भारी, चेहरे पर फ्रेंच कट दाढ़ी। पिछले दो मार्च से लापता हैं। कोई और होता और उसे लेकर देश में इतना हंगामा मचा होता तो दिल्ली पुलिस इससे मिलता जुलता विज्ञापन अब तक कर चुकी होती। ऐसा नहीं हुआ है तो इसलिए क्योंकि लापता होने वाले विजय माल्या हैं।
देश के तमाम बैंक जब उनको दिए गए कर्ज की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगा रहे थे तो सरकार के वकील की ओर से अवगत कराया गया कि माल्य देश छोड़ चुके हैं। कोई नहीं जानता माल्या वापस आएंगे या नहीं। माल्या की खामोशी ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है। वैसे इस बात की उम्मीद कम है।
विजय माल्या के देश छोड़ने पर संसद से लेकर सड़क तक कोहराम मचा हुआ है। विपक्ष सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है तो सरकार की ओर से जवाब में क्वात्रोची का नाम उछाला जा रहा है। इन सियासी दलों को कौन समझाए एक गलती दूसरी गलती का जवाब नहीं होती।
बहरहाल, इस सारे वाद, विवाद और संवाद के बीच विजय माल्या की जिंदगी के तमाम पहलूओं पर चर्चा करना प्रासंगिक हो जाता है। इसमें व्यापारिक चातुर्य, रंगीन मिजाजी, आर्थिक उपबंध, बड़बोलापन, सियासी तालमेल... और भी न जाने क्या-क्या है?
दो बीवी तीन बच्चे
रंगीन मिजाजी के लिए मशहूर विजय माल्या ने अपनी निजी जिंदगी में भी की प्रयोग किए। उनकी पहली पत्नी समीरा थीं, जो किसी समय इंडिया एयर लाइंस में एयर होस्टेस हुआ करती थीं। सिद्धार्थ इन्हीं समीरा और विजय माल्या के संतान हैं। माल्या ने दूसरी शादी अपने दोस्त मिस्टर महमूद की पत्नी रेखा से की।
पहले पति से रेखा की लैला नाम की एक बेटी थी जिसे शादी के बाद माल्या ने गोद ले लिया। दूसरी शादी के बाद माल्या दंपति के घर दो बेटियों ने जन्म लिया, लीना और तान्या। बाद में रेखा अपनी दोनों बेटियों के साथ कैलिफोर्निया चली गईं और कहा जाता है कि अब ज्यादातर समय वहीं बिताती हैं। माल्या अपनी दूसरी शादी के बारे में चर्चा करने से ज्यादातर बचते रहते हैं।
जोखिम लेने में उस्ताद
माल्या की पहचान एक ऐसे बिजनेस मैन के तौर पर है जो बड़े से बड़ा जोखिम लेने में नहीं हिचकाता। माल्या की इस आदत को उनसे जुड़ी एक पुरानी घटना से समझा जा सकाता है- 2006 में उन दिनों माल्या किंगफिशर एयर लाइंस को अंतरराष्ट्रीय विमान कंपनी बनाने की मनसूबे बांध रहे थे। किसी ने सुझाव दिया कि एयर डेक्कन एयरलाइंस का खरीदना इस उद्देश्य की पूर्ति में सहायक सिद्ध होगा।
माल्या ने अपने यार्ड से एयर डेक्कन के मालिक गोपीनाथ को फोन किया, ‘ मैं आपकी एयर लाइंस खरीदना चाहता हूं।’ गोपीनाथ हड़बड़ाए- ‘इतना अहम सौदा कोई फोन पर करता है क्या!’ उन्होंने भी बात को टालने की गरज से कंपनी की कीमत बताई एक हजार करोड़।
बुनियादी व्यापारिक समझ रखनेवाले भी जनते है कि इतने बड़े सौदे हड़बड़ी में नहीं हुआ करते। विशेषज्ञ खरीदे जाने वाली कंपनी की कीमत आंकते हैं। बैलेंस सीट देखी जाती है और फिर सौदा तय होता है, लेकिन विजय माल्या ने एक पल को भी नहीं सोचा। झट गोपीनाथ को जवाब दिया, ‘हां, मैं एक हजार करोड़ चुकाने को तैयार हूं।’ और इस तरह एयर डेक्कन किंगफिशर की हो गई।
बेटे के बर्थडे गिफ्ट का सबसे बड़ा तोहफा
बेटा सबको प्यारा होता है। हर पिता की कामना होती है कि वह अपने बेटे के लिए आकाश से तारे तोड़ लाए, लेकिन ऐसा कर कौन पाता है। विजय माल्या ने कर दिखाया। सिद्धार्थ की उम्र 18 साल होने जा रही थी माल्या बेटे को कोई अनोखा गिफ्ट देना चाहता था।
उन्होंने बेटे के जन्मदिन पर बतौर गिफ्ट एक एयर लाइंस खोलने का फैसला किया और इस तरह किंगफिशर एयरलाइंस अस्तित्व में आई। वह बात दूसरी है कि अपने बेटे का शौक पूरा करने के चक्कर में न जाने कितने दूसरे लोगों के बेटे की जिंदगी बदरंग कर दी।
आर्थिक उपबंध के कारण किंगफिशर एयरलाइंस बैठी तो उसके हजारों कर्मचारी आज भी बकाया भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं। जिनके वेतन से टीडीएस काट लिया गया, लेकिन आयकर विभाग ने जबान तक नहीं खोली। लेकिन अब इन लोगों के नाम आयकर विभाग के बकायादारों की सूची में दर्ज है।
किस्मत के धनी
माल्या की कंपनी का टैग लाइन है ‘किंग ऑफ गुड टाइम’ यानी अच्छे दिनों का राजा। किंगफिशर एयर लाइंस के डूबने से पहले तक माल्या वाकई राजा हुआ करते थे- किस्मत के भी! किस्मत उन पर किस कदर मेहरबान थी उस समझने के लिए एक घटना काफी है। माल्या 2003 में कर्नाटक के बागलकोट इलाके में सियासी प्रचार के लिए जा रहे थे उसी दौरान हेलिकाप्टर जमीन पर गिरकर टुकड़े-टुकड़े हो गए। इसके बावजूद हेलिकाप्टर में बैठे लोगों में से किसी को भी कोई गंभीर चोट नहीं लगी।
ग्लैमर की दुनिया का चस्का
बिकनी मॉडल्स वाले अपने वार्षिक कैलेंडर के लिए विख्यात विजय माल्या ग्लैमर की दुनिया के प्रति कारोबारी जीवन की शुरुआत से ही आकर्षित होते रहे हैं। उनकी कंपनी ‘यूबी ग्रुप’ के डाइरेक्टर कल्याण गांगुली एक घटना का जिक्र करते हैं।
एक पार्टी में माल्या ने देखा कि एक गोरा-सा शख्स सबके आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। माल्या ने गांगुली से कहा, ‘हमें इस शख्स को अपनी कंपनी का ब्रांडअंबेसडर बनाना चाहिए।’ पता चला वह शख्स अमेरिकी सीरियल ‘द बोल्ड एंड ब्यूटीफुल’ में ‘रिज फारेस्टर’ का किरदार निभानेवाले अभिनेता रॉन मास थे।
और कुछ ही दिनों बाद रॉन मास विजय माल्या की कंपनी में ब्रांडअंबेसडर बनकर तमाम विज्ञापनों में दिखाई देने लगे। हॉलीवुड के अभिनेता-अभिनेत्रियों के साथ माल्या के संबंधों के तो इतने किस्से हैं कि उस पर एक नहीं कई किताबें लिखी जा सकती हैं।
अमीरी से प्यार
विजय माल्या उन उद्योगपतियों में से हैं जिन्हें अपनी अमीरी पर गर्व है और इससे अपने प्यार को छिपाते भी नहीं। महंगी जीवन-शैली आदी माल्या अपनी इस शौक पर बेहिसाब पैसा खर्च करते हैं। महगें चश्मे और घड़ियां, लकदख कपड़े, शानदार याट, निजी हवाई जहाज। इस सब पर बेहिसाब पैसा बहाते रहे हैं।
न्यूयार्क के ट्रंप टावर्स में उनका एक आशियाना है तो फ्रेंच रिविएरा में उन्होंने एक घर बना रखा है। माल्या के गोवा वाले आलीशान घर की फोटो तो जब जब फैशन पत्रिकाओं के चमकीले पन्नों की सोभा बढ़ाती रही है। माल्या जानते हैं भारत में पैसे का ज्यादा प्रदर्शन अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता है। लेकिन वह इसकी परवाह नहीं करते । कभी उन्होंने ने ही तल्ख लहजों में कहा था, ‘भारत में अमीरी छुपाकर रखने की चीज है।’ लेकिन माल्या ने कभी ऐसा नहीं किया।
शराब कारोबारी का ठप्पा छुड़ाने के चक्कर में बने कर्जपति
उनसे जुड़े लोगों के मुताबिक भारत में शराब व्यवसाय को अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता। माल्या चाहते थे कि लोग उन्हें शराब के बड़े व्यवसायी नहीं, बल्कि एक उद्योगपति के रूप में जानें। वे इस ठप्पे से पीछा छुड़ाना चाहते थे। माल्या ने इंजीनियरिंग, उर्वरक, टेलीविज़न और चार्टर विमान सेवा की कंपनियों में पैसे लगाए।
एयरलाइन पर लुटाए करोड़ों
जब एयरलाइन शुरू हो गई तो माल्या ने खूब पैसे उड़ाए। किसी यात्री की उड़ान छूट जाने पर वे उसे उसके गंतव्य स्थान तक दूसरी एयरलाइन से भेजते थे। उन्होंने यह मान लिया कि लोग उनके फ्लाइंग फ़ाइव स्टार होटल पर टूट पड़ेंगे। यात्रियों के लिए मंहगी विदेशी पत्र-पत्रिकाएं मंगवाई। कंपनी के मुनाफ़े पर इन सब खर्चों का असर पड़ा।
माल्या पर बैंकों का कर्ज
एसबीआई 1600 करोड़
पीएनबी 800 करोड़
आईडीबीआई 800 करोड़
बैंक ऑफ इंडिया 650 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा 550 करोड़
युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया 430 करोड़
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 410 करोड़
यूको बैंक 320 करोड़
कॉरपोरेशन बैंक 310 करोड़
स्टेट बैंक ऑफ मैसूर 150 करोड़
इंडिया ओवरसीज बैंक 140 करोड़
फेडेरल बैंक 90 करोड़
पंजाब सिंध बैंक 60 करोड़
एक्सिस बैंक 50 करोड़
कितना बड़ा है माल्या का साम्राज्य?
- - माल्या के पास ‘मोंटो कार्लो’ द्वीप है। लक्षद्वीव में समुद्र का किनारा ‘थिंन्कारा’ भी उनके पास है।
- - दक्षिण अफ्रीका में 12 हजार हैक्टेयर में फैले ‘माबुला गेम लॉज’।
- - हिमालय में 1 हजार एकड़ में फैली टूरिज्म साइट्स।
- - बेंगलूरू के पास 16 लाख वर्ग फुट में फैली ‘यूबी सिटी’।
- - स्कॉटलैंड पैलेस, लंदन और मोंटो कार्लों में घर, मैनहट्टन में प्रॉपर्टी और दिल्ली, मुंबई व बेंगलूरू में घर
- कारोबार
- - साल 2007 में फोर्ब्स पत्रिका ने माल्या की संपत्ति 160 करोड़ डॉलर (10 हजार 7 सौ करोड़ रुपए) बताई थी।
- - 2012 में यह गिरकर 80 करोड़ डॉलर रह गई
- - इसी साल फोर्ब्स ने दुनिया के अरबपतियों की सूची से माल्या का नाम हटाया
- - किंगफिशर भी 2012 में ही बंद हुई।
- साम्राज्य
- माल्या राज्यसभा सांसद भी रहे। खेलों को लेकर वह सहारा फोर्स इंडिया, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, मैक्डोवेल, मोहन बागान, किंगफिशर और ईस्ट बंगाल के मालिक भी रहे।
- भारत सरकार में विजय माल्या की पहुंच बहुत गहरी रही है। 2002 से अब तक विजय माल्या भारत सरकार के विभिन्न सरकारी पदों पर रह चुके हैं।
- विजय माल्या 2002 से फरवरी 2004, अक्टूबर 2004 से अप्रैल 2008 तक रक्षा मंत्रालय की सलाकार समिति के सदस्य रहे।
- सितंबर 2002 से फरवरी 2003 तक विज्ञान और तकनीक पर बनी समिति और पर्यावरण और जंगल समिति के सदस्य रहे।
- सितंबर 2003 से फरवरी 2004 तक रक्षा समिति के सदस्य रहे।
- अगस्त 2004 से अप्रैल 2008 तक उद्योगों पर बनी समिति के सदस्य रहे।
- सितंबर 2004 से अप्रैल 2008 तक भारत सरकार की दीर्घ उद्योग पर बनी कई समितियों में सदस्य रहे।
- अगस्त 2007 से अप्रैल 2008 तक लघु उद्योगों पर बनी उप समिति-2 में सदस्य रहे।
- 2010 से अब तक फिर से उद्योग समित के सदस्य बने।
- अगस्त 2012 से केमिकल और फर्टिलाइजर पर बनी समिति के सदस्य रहे।