पंजाब की वो मजबूर महिलाएं जो सऊदी में जाकर बन गईं 'गुलाम'
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सऊदी अरब में पंजाब की गरीब महिलाओं को बेचने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कुछ ही समय में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं, जिनमें गरीब और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को सऊदी अरब में कथित तौर पर गुलाम बनाया गया था। दो महिलाएं तो वापस आ गई हैं, मगर एक अभी भी फंसी हुई है।
होशियारपुर के गांव भुंगरनी की 30 साल की इकविंदर कौर उर्फ सपना कहती हैं, "मुझे नहीं पता था कि एक दिन मेरी सहेली ही मेरे सपनों को चूर-चूर कर देगी।"
गांव की सहेली पर ही बेचने का आरोप
गांव में दिहाड़ी करके अपना घर चलाने वाली इकविंदर की मुलाकात एक लड़की से हुई। इस लड़की ने उसे ऐसे सपने दिखाए, जिनके चक्कर में वह सऊदी अरब जाकर फंस गईं। बिल्कुल अनपढ़ इकविंदर कौर का पासपोर्ट भी गांव की रहने वाली उसकी सहेली ने ही बनाकर दिया और उसे दुबई के रास्ते सऊदी भेजने के टिकट और वीजा का भी इंतजाम किया।
तीन बच्चों की मां इकविदंर के पति रणजीत सिंह एक फैक्टरी में सफाई कर्मी हैं। उन्हें एक आंख से दिन में दिखाई नहीं देता और रात को दूसरी आंख भी काम नहीं करती।
दो महीने पहले सऊदी अरब गई इकविंदर चार अक्तूबर को अपने बच्चों के पास कथित गुलामी से छूटकर आई है।
इकविंदर ने बताया कि सऊदी अरब भेजने के लिए उनसे 40 हजार रुपये मांगे गए थे। उन्हे भरोसा दिलाया गया था कि सऊदी में उन्हें साफ-सफाई का काम करने के बदले 1000 रियाल प्रतिमहा तनख्वाह मिलेगी।
एक ही कमरे का घर
इकविंदर का कहना है कि दुबई का वीजा मिलने पर उनका मन बेचैन हो गया था। वह अपने बच्चों को नहीं छोड़ना चाहती थीं, मगर गरीबी आगे उनकी एक न चली। गांव की तंग गलियों में इकविंदर का एक कमरे का छोटा सा घर है। डबलबेड रख देने के बाद कमरे में उसके इर्द-गिर्द चलने की जगह भी नहीं बची है।
अनपढ़ इकविंदर के साथ एक करार किया गया और उसमें हस्ताक्षर भी करवा लिए गए थे। सऊदी अरब जाने के लिए इकविंदर को दिल्ली से फ्लाइट पकड़नी थी, मगर उनके पास दिल्ली जाने के भी पैसे नहीं थे। इसके लिए उन्होंने गांव के एक शख्स से सात हजार रुपये ब्याज पर उधार लिए।
एयरपोर्ट पर कदम रखते ही इकविंदर को लगा कि उनके सारे सपने पूरे हो रहे हैं और उनकी गरीबी खत्म हो जाएगी। पहली बार हवाई जहाज में बैठीं इकविंदर अपने बच्चों की अच्छी पढ़ाई के सपने ले रही थीं।
एक ही शाम में दुबई से सऊदी अरब
दुबई पहुंचने पर इकविंदर को एयरपोर्ट पर बुर्के वाली एक महिला मिली, जो उन्हें अपने साथ ले गई। उसी शाम इकविंदर को सऊदी अरब जाने वाले जहाज में चढ़ा दिया गया।
सऊदी में एक परिवार के यहां 15 दिन तक तो सब ठीक चला, मगर उसके बाद उनका फोन बंद कर दिया गया। इकविंदर ने बताया, "मैं तीन मंजिला घर में रह रही थी। मालिक की पांच-छह पत्नियां थीं और सात-आठ बच्चे। मुझसे झाड़ू-पोछे के अलावा कपड़े धोने, खाना बनाने और घर के हर तरह के काम लिए जाने लगे। यहां तक कि बैठने का भी समय नहीं दिया जाता और खाना भी बहुत कम दिया जाता।"
घर में लगे थे कैमरे
इकविंदर ने बताया कि घर के हर कोने में कैमरे लगे थे, बस उसके कमरे में कोई कैमरा नहीं था।
वह बताती हैं कि एक दिन परिवार ने उनके सामने मांस के बड़े-बड़े टुकड़े रख दिए और पकाने को कहा। वह बताती हैं कि यह काम उनके लिए बहुत कठिन था लेकिन बच्चों और घर की गरीबी का ख्याल आया तो यह काम भी कर दिया।
धमकियां मिलीं
उसने इकविंदर को किसी न किसी तरीके से अपना वीडियो बनाकर व्हाट्सएप से भेजने को कहा। इकविंदर ने अपनी कहानी को छोटे-छोटे टुकड़ों मे वीडियो बनाकर व्हाट्सएप किया। इकविंदर बताती हैं कि वह एक लाश बनकर बक्से में बंद होकर भारत नहीं आना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। वह किसी न किसी तरीके से परिवार से संपर्क साधने में कामयाब रहीं।
सिख संस्था दमदमी टकलास के भाई संदीप सिंह ने बताया कि जब उन्होंने इकविंदर का वीडियो सोशल मीडिया पर देखा तो उन्होंने पीड़ित परिवार से संपर्क किया। इसके बाद एजेंट से बात करके डेढ़ लाख रुपये दिए और इकविंदर को वापस लाया गया।
इस बारे में बीबीसी पंजाबी से बात करते हुए होशियार के एसएसपी जे। इलंचेजियन ने कहा कि इकविंदर का मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार से संपर्क किया जा रहा है और बयान दर्ज करने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पुलिस को मीडिया के जरिये ही इस मामले की जानकारी मिली है और शुक्रवार को विचार करने के बाद बयान दर्ज करके कार्रवाई करने का फैसला लिया गया।इससे कुछ समय पहले जालंधर के कस्बे नूरमहल के गांव अजतानी की सुखवंत कौर भी सऊदी अरब में पांच महीने कथित गुलामी वाली जिंदगी काटने के बाद 31 मई को वापस आई थीं। उन्हें छुड़ाने के लिए केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने कोशिश की थी।
सुखवंत को मुंबई एयरपोर्ट लाया गया था मगर उनके परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि उन्हें मुंबई से घर लाया जा सके। सुषमा स्वराज ने ही सुखवंत को अमृतसर भिजवाया, तब जाकर वह अपने परिवार से मिलीं। बकौल सुखवंत, ट्रैवल एजेंटों ने उन्हें भी साढ़े तीन लाख रुपये में एक सऊदी परिवार को बेच दिया था।
आपबीती सुनाते-सुनाते सुखवंत रोने लगती हैं
कर्ज का बोझ बढ़ने लगा था। ऐसे में पूजा नाम की ट्रैवल एजेंट ने उनसे संपर्क किया था और कहा था कि सऊदी अरब के एक घर में नौकरी करने पर 22 हजार रुपये की तनख्वाह मिलेगी। सुखवंत कहती हैं कि जब मैंने कहा कि मेरे पति कुलवंत को भेज दो तो मुझसे कहा गया कि उनकी उम्र ज्यादा है, इसलिए उन्हें नहीं भेजा जा सकता।
सुखवंत ने कहा कि वह 20 जनवरी 2017 को दिल्ली से मुंबई गई थीं। यहां उन्हें दो औरतों और 15 मर्दों के साथ एक कमरे में रखा गया था। तभी उन्हें एहसास हो गया था कि कुछ गलत होने वाला है।
वह बताती हैं कि उन्होंने दुबई से 24 जनवरी को सऊदी अरब के लिए उड़ान भरी थी। वहां एक परिवार की तीन महिलाओं मदरिया, फाजिया और मीरा ने बताया कि दिल्ली के शकीर खान नाम के एजेंट से
उन्हें साढ़े तीन लाख रुपये में खरीदा है।
यह बताते हुए सुखवंत की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा, "वे महिलाएं स्कूल में काम करती हैं। 11 बजे से 2 बजे तक मुझे कमरे में बंद किया जाता था। तनख्वाह मांगने पर लोहे की छड़ों से पीटा जाता था।"
बीमार पड़ने पर सुखवंत को एक अस्पताल में दाखिल करवाया गया, जहां केरल की रहने वाली एक नर्स से उनका संपर्क हो गया। इस नर्स ने ही उनकी बात परिवार से करवाई। सुखवंत बताती हैं कि उनके साथ बहतु बुरा सुलूक किया जाता था और नरक जैसे हालात में रहना पड़ता था।
अभी भी फंसी है एक महिला
नकोदर के गांव गौरसीया की रहने वाली परमजीत अभी भी सऊदी में फंसी हुई हैं। उन्हें 18000 रियाल में कथित तौर पर बेचने की बात सामने आई है। परमजीत जुलाई में सऊदी गई थीं मगर उन्हें काम के बदले तनख्वाह नहीं दी गई। बताया जा रहा है कि उन्हें भी ऐसे ही बेचा गया है।
परमजीत के पति मलकीत सिंह ने अपने ही गांव के ट्रैवल एजेंट रमेश भट्टी के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया है मगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया है। परमजीत कौर की बेटी ने रजनी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज से फरियाद की है कि उनकी मां को वापस लाया जाए। दर-दर की ठोकरें खा रहे इस परिवार की कहीं सुनवाई नहीं हो रही।