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Telangana Assembly: तेलंगाना विधानसभा में तीखी बहस, कांग्रेस और बीआरएस विधायकों के बीच जमकर हुई जुबानी जंग
Sun, 17 Dec 2023 01:48 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेलंगाना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेलंगाना
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sun, 17 Dec 2023 01:48 AM IST
सार
मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कथित पारिवारिक शासन, सिंचाई परियोजनाओं के पूरा न होने, तेलंगाना राज्य के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वालों के परिवारों की अनदेखी, बीआरएस शासन के 10 वर्षों के दौरान प्रश्नपत्रों का लीक होना और अन्य विफलताओं का हवाला देते हुए कांग्रेस के बचाव का नेतृत्व किया।
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telangana assembly
विस्तार
तेलंगाना विधानसभा में शनिवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर तीखी बहस हुई, जिसमें सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस सत्ता में रहते हुए दोनों पार्टियों के ट्रैक रिकॉर्ड को लेकर वाकयुद्ध में लिप्त है, 'परिवार शासन' और अन्य का आरोप लगाया।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने आरोप लगाया कि राज्यपाल का अभिभाषण झूठ से भरा था और एक सदस्य के रूप में उनका ऐसा भाषण सुनना शर्मनाक है। इसके अलावा कांग्रेस पर हमला किया कि अविभाजित आंध्र प्रदेश में उसका शासन सूखी भूमि, भूख से मौतें और आत्महत्याओं से चिह्नित था।
मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कथित पारिवारिक शासन, सिंचाई परियोजनाओं के पूरा न होने, तेलंगाना राज्य के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वालों के परिवारों की अनदेखी, बीआरएस शासन के 10 वर्षों के दौरान प्रश्नपत्रों का लीक होना और अन्य विफलताओं का हवाला देते हुए कांग्रेस के बचाव का नेतृत्व किया।
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हर समस्या को सुनती है सरकार
सीएम ने कहा, 'हमारी सरकार ने प्रगति भवन (पूर्व सीएम केसीआर का कैंप कार्यालय-सह-आधिकारिक निवास) के लोहे के गेट तोड़ दिए। यह जनता द्वारा चुनी हुई सरकार है। यह जनता की सरकार है। तब मंत्रियों को मुख्यमंत्री से मिलने की एंट्री नहीं थी। तेलंगाना आंदोलन को हवा देने वाले गद्दार (लोक गायक) की एंट्री नहीं हुई। लेकिन आज, अगर अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाएं, कमजोर वर्ग कहते हैं कि हमें कोई समस्या है तो सरकार सुनने को तैयार है।'
इसके बाद उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि लोगों ने तेलंगाना के लिए लड़ाई लड़ी है और वो कांग्रेस ही थी जिसने अलग होने की मांग पूरी की. तथापि,उन्होंने कहा, तेलंगाना जो एक अधिशेष राज्य था, 2014 से बीआरएस शासन के दौरान पांच लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ में है। उन्होंने कहा, बहस 2014 में तेलंगाना गठन के बाद सरकारी कार्यक्रमों के बारे में होनी चाहिए।
तेलंगाना के साथ किया गया था भेदभाव
राज्य के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने रामा राव का विरोध करते हुए कहा कि एक अलग तेलंगाना राज्य हासिल किया गया था और कांग्रेस भी इस विश्वास के कारण इसके लिए लड़ रही थी कि तेलंगाना के साथ भेदभाव किया गया था। अविभाजित राज्य। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अविभाजित आंध्र प्रदेश में तेलंगाना कांग्रेस के नेता पदों की खातिर चुप रहे और तब भी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने तेलंगाना को कोई भी फंड देने के लिए मना कर दिया।
रेवंत रेड्डी ने रामा राव के अतीत के बारे में बात करने का जिक्र किया और हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह कांग्रेस ही थी जिसने पूर्व सीएम केसीआर को युवा कांग्रेस में उपाध्यक्ष बनाया था और यह फिर से कांग्रेस ही थी जिसने केसीआर को सांसद बनाया और एक केंद्रीय मंत्री। उन्होंने कहा कि केसीआर के भतीजे और विधायक टी हरीश राव को अविभाजित आंध्र प्रदेश में वाईएस राजशेखर रेड्डी की सरकार में मंत्री बनाया गया था, जब वह विधायक भी नहीं थे।
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बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने आरोप लगाया कि राज्यपाल का अभिभाषण झूठ से भरा था और एक सदस्य के रूप में उनका ऐसा भाषण सुनना शर्मनाक है। इसके अलावा कांग्रेस पर हमला किया कि अविभाजित आंध्र प्रदेश में उसका शासन सूखी भूमि, भूख से मौतें और आत्महत्याओं से चिह्नित था।
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मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने कथित पारिवारिक शासन, सिंचाई परियोजनाओं के पूरा न होने, तेलंगाना राज्य के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वालों के परिवारों की अनदेखी, बीआरएस शासन के 10 वर्षों के दौरान प्रश्नपत्रों का लीक होना और अन्य विफलताओं का हवाला देते हुए कांग्रेस के बचाव का नेतृत्व किया।
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हर समस्या को सुनती है सरकार
सीएम ने कहा, 'हमारी सरकार ने प्रगति भवन (पूर्व सीएम केसीआर का कैंप कार्यालय-सह-आधिकारिक निवास) के लोहे के गेट तोड़ दिए। यह जनता द्वारा चुनी हुई सरकार है। यह जनता की सरकार है। तब मंत्रियों को मुख्यमंत्री से मिलने की एंट्री नहीं थी। तेलंगाना आंदोलन को हवा देने वाले गद्दार (लोक गायक) की एंट्री नहीं हुई। लेकिन आज, अगर अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाएं, कमजोर वर्ग कहते हैं कि हमें कोई समस्या है तो सरकार सुनने को तैयार है।'
इसके बाद उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि लोगों ने तेलंगाना के लिए लड़ाई लड़ी है और वो कांग्रेस ही थी जिसने अलग होने की मांग पूरी की. तथापि,उन्होंने कहा, तेलंगाना जो एक अधिशेष राज्य था, 2014 से बीआरएस शासन के दौरान पांच लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ में है। उन्होंने कहा, बहस 2014 में तेलंगाना गठन के बाद सरकारी कार्यक्रमों के बारे में होनी चाहिए।
तेलंगाना के साथ किया गया था भेदभाव
राज्य के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने रामा राव का विरोध करते हुए कहा कि एक अलग तेलंगाना राज्य हासिल किया गया था और कांग्रेस भी इस विश्वास के कारण इसके लिए लड़ रही थी कि तेलंगाना के साथ भेदभाव किया गया था। अविभाजित राज्य। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अविभाजित आंध्र प्रदेश में तेलंगाना कांग्रेस के नेता पदों की खातिर चुप रहे और तब भी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने तेलंगाना को कोई भी फंड देने के लिए मना कर दिया।
रेवंत रेड्डी ने रामा राव के अतीत के बारे में बात करने का जिक्र किया और हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह कांग्रेस ही थी जिसने पूर्व सीएम केसीआर को युवा कांग्रेस में उपाध्यक्ष बनाया था और यह फिर से कांग्रेस ही थी जिसने केसीआर को सांसद बनाया और एक केंद्रीय मंत्री। उन्होंने कहा कि केसीआर के भतीजे और विधायक टी हरीश राव को अविभाजित आंध्र प्रदेश में वाईएस राजशेखर रेड्डी की सरकार में मंत्री बनाया गया था, जब वह विधायक भी नहीं थे।