लैफ्टीनेंट जनरल को डिमोट करने के न्यायाधिकरण के आदेश पर रोक
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एएफटी के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की इस याचिका पर न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की अवकाशकालीन पीठ ने नोटिस भी जारी किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ ने कहा एएफटी का आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए, नहीं तो इससे अव्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण को इस तरह का आदेश नहीं पारित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लेफ्टीनेंट जनरल को बिग्रेडियर बना दिया जाएगा तो सेना किस तरह से काम करेगी।
ब्रिगेडियर से मेजर जनरल बनाया जाना उचित नहीं
अटॉर्नी जनरल ने यह भी कि न्यायाधिकरण के समक्ष पुनर्विचार याचिका दाखिल करने वाले मेजर जनरल आरएस राठौड़ ने मेजर जनरल एन के मेहता को लेफ्टीनेंट जनरल बनाए जाने को चुनौती नहीं दी थी बल्कि उन्होंने बिग्रेडियर से मेजर जनरल बनाए जाने को चुनौती दी और वह भी तीन वर्षों के बाद। वहीं राठौड़ की ओर से पेश वकील एश्वर्या भाटी ने कहा कि अगर एएफटी के आदेश पर रोक उचित नहीं होगा।
मालूम हो कि गत 13 मई को एएफटी ने लेफ्टीनेंट जनरल एनके मेहता को डिमोट पर दो पद नीचे ब्रिगेडियर बना दिया था। एनके मेहता को कुछ ही महीने पहले लेफ्टीनेंट जनरल बनाया गया था। साथ ही एएफटी ने रक्षा मंत्रालय और सेना पर 50 लाख और अधिकारी पर पांच लाख जुर्माना किया था। एएफटी ने पाया कि न्यायाधिकरण के पूर्व आदेश के आधार पर लेफ्टीनेंट जनरल मेहता को ब्रिगेडियर से मेजर जनरल बनाया जाना उचित नहीं था क्योंकि साक्ष्यों को छिपाया गया था।