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जीएसटी पर ऊंची दर चाहते हैं राज्य, लेकिन महंगाई का भी खतरा
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 05 Aug 2016 12:42 PM IST
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जीएसटी की दर को लेकर राज्य सरकारों ने अपनी राय देनी शुरू कर दी है। राज्य चाहते हैं कि उनके राजस्व का नुकसान न हो इसलिए जीएसटी की दर 20 फीसदी से लेकर 22 फीसदी के बीच होनी चाहिए। हालांकि मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन की अध्यक्षता वाली केंद्र सरकार की समिति ने जीएसटी को 17-19 फीसदी के बीच रखने का सुझाव दिया है।
बताया जा रहा है कि राज्य सरकारें वैट और अन्य टैक्स मिलाकर 27 से 28 फीसदी तक टैक्स वसूलते हैं। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, एक राज्य के वित्त मंत्री का कहना है, 'जीएसटी की मानक दर 22 से 23 फीसदी के बीच ही होनी चाहिए।'
दरअसल, शुरू में केरल आदि राज्यों ने जीएसटी दर 22-23 फीसदी रखने की वकालत की थी। कांग्रेस ने भी 18 फीसदी जीएसटी दर का विरोध किया है। हालांकि मुख्य आर्थिक सलाहकार समिति का मानना है कि जीएसटी की दर अगर अधिक ऊंची रखी जाती है तो इससे महंगाई बढ़ेगी। जबकि राज्य सरकारों को तर्क है कि जीएसटी की अधिक दर से ही राज्य के राजस्व घाटे को कम किया जा सकेगा।
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गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने के बाद 'टैक्स पर टैक्स' लगना बंद हो जाएगा और सभी टैक्स जीएसटी में समाहित हो जाएंगे। राज्यों के राजस्व की भरपाई केंद्र सरकार करेगी।
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बताया जा रहा है कि राज्य सरकारें वैट और अन्य टैक्स मिलाकर 27 से 28 फीसदी तक टैक्स वसूलते हैं। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, एक राज्य के वित्त मंत्री का कहना है, 'जीएसटी की मानक दर 22 से 23 फीसदी के बीच ही होनी चाहिए।'
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दरअसल, शुरू में केरल आदि राज्यों ने जीएसटी दर 22-23 फीसदी रखने की वकालत की थी। कांग्रेस ने भी 18 फीसदी जीएसटी दर का विरोध किया है। हालांकि मुख्य आर्थिक सलाहकार समिति का मानना है कि जीएसटी की दर अगर अधिक ऊंची रखी जाती है तो इससे महंगाई बढ़ेगी। जबकि राज्य सरकारों को तर्क है कि जीएसटी की अधिक दर से ही राज्य के राजस्व घाटे को कम किया जा सकेगा।
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गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने के बाद 'टैक्स पर टैक्स' लगना बंद हो जाएगा और सभी टैक्स जीएसटी में समाहित हो जाएंगे। राज्यों के राजस्व की भरपाई केंद्र सरकार करेगी।