वैक्सीन की किल्लत: राज्यों को नहीं तो निजी अस्पतालों को कहां से मिल रही वैक्सीन, 1000-1200 रुपये वसूल रहे कीमत
दिल्ली ही नहीं देश के सभी राज्यों में है वैक्सीन की कमी, डोज की कमी के चलते बंद करने पड़े हैं वैक्सीनेशन सेंटर, लेकिन राज्यों के प्राइवेट अस्पतालों में चल रहा वैक्सीनेशन। विपक्ष ने उठाया सवाल...
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देश के ज्यादातर राज्यों में वैक्सीन की कमी हो गई है। वैक्सीन की कमी के चलते अनेक वैक्सीनेशन सेंटर बंद करने पड़े हैं और राज्य सरकारें ज्यादा वैक्सीन के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बना रही हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि जहां एक तरफ वैक्सीन की कमी के चलते सरकारों के वैक्सीन सेंटर बंद हो रहे हैं, वहीं प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगाई जा रही हैं। दिल्ली ही नहीं नोएडा और गुरुग्राम के भी प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगाई जा रही है और इसके लिए 1000 से 1200 रुपये की कीमत वसूली जा रही है। विपक्षी दलों कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने वैक्सीन उपलब्धता की इस दोहरी स्थिति पर सवाल उठाया है और इस पर केंद्र से जवाब मांगा है।
कोविन पर स्थिति
वैक्सीन लगवाने के लिए बने रजिस्ट्रेशन पोर्टल कोविन पर कई राज्यों के सरकारी वैक्सीनेशन सेंटरों पर जगह फुल दिखा रहा है, जबकि उन्हीं राज्यों में प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगने की जानकारी दी जा रही है। दिल्ली सरकार ने वैक्सीन की कमी के चलते अपने यहां 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग वालों के लिए वैक्सीनेशन बंद कर दिया है, लेकिन शनिवार शाम सात बजे दिल्ली के ही शहादरा के दो प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन की उपलब्धता दिखाई जा रही थी।
यह स्थिति केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के प्राइवेट अस्पतालों में भी इसी तरह की स्थिति दिखाई पड़ रही है।
वसूल रहे भारी कीमत
केंद्र-राज्यों के वैक्सीनेशन सेंटरों पर जहां वैक्सीन मुफ्त लगाई जा रही है, वहीं प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन के नाम पर चांदी काटी जा रही है। जानकारी के मुताबिक अस्पताल घोषित रूप से इसके लिए 1000 से 1200 रुपये तक ले रहे हैं, लेकिन अन्य सुविधाएं जोड़कर इसे भी तीन से चार हजार तक बना दिया जा रहा है। इसमें वैक्सीन लगाने के बाद एक दिन चक्कर आने, बुखार आने या किसी तरह की अन्य समस्या होने का निदान भी लोगों को विकल्प के रूप में सुझाया जा रहा है।
लोगों को आशंका है कि सरकारी केन्द्रों पर वैक्सीन की कमी दिखाकर लोगों को प्राइवेट अस्पतालों के चंगुल में फंसने के लिए मजबूर किया जा रहा है, ताकि वैक्सीन के नाम पर लोगों से भारी पैसा वसूला जा सके।
कोई घपला नहीं
दिल्ली के एक पांच सितारा अस्पताल के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि यह केवल अफवाह है और वैक्सीन लगाने में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है। उनके यहां किसी भी व्यक्ति को सीधे वैक्सीन लगवाने की अनुमति नहीं है। लोगों को वैक्सीन केवल कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद ही लगाई जा रही है, लिहाजा इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। हालांकि, अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि कुछ अन्य सेवाओं के नाम पर कुछ अतिरिक्त शुल्क अवश्य वसूल किया जा रहा है। लेकिन यह लोगों की मर्जी पर है और इसके लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी ने पूछा- उन्हें कहां से मिल रही वैक्सीन
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस दोहरी स्थिति के लिए केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो राज्यों को वैक्सीन नहीं दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन दी जा रही है। इससे साफ़ जाहिर हो रहा है कि वैक्सीन के नाम पर जनता को मजबूर कर उसे लूटा जा रहा है।
सिसोदिया ने कहा कि अगर केंद्र सरकार वैक्सीन उपलब्ध कराए तो केवल तीन महीने के अन्दर पूरी दिल्ली को वैक्सीन लगाई जा सकती है, दिल्ली को कोरोना की तीसरी लहर में जाने से बचाया जा सकता है, लेकिन उन्हें अभी तक वैक्सीन नहीं दी जा रही है।
कांग्रेस ने भी उठाये सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन दिए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या से जुड़ा एक ऑडियो टेप वायरल हुआ है जिसमें उनके एक करीबी ने 900 रुपये में प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन दिए जाने की बात कही है। ऑडियो में यह बात भी कही जा रही है कि एक व्यक्ति को प्रति टीका 700 रुपये की कीमत देनी पड़ रही है, लिहाजा सामान्य लोगों को इसे 900 रुपये से कम में नहीं दिया जा सकता।
पवन खेड़ा ने कहा कि इस ऑडियो से यह साफ़ हो गया है कि जहां एक तरफ राज्यों को सरकारी वैक्सीन केन्द्रों के लिए वैक्सीन नहीं मिल रही हैं, वहीं प्राइवेट अस्पतालों को इसे ब्लैक किया जा रहा है और इससे भारी कीमत वसूली जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस स्थिति के लिए जवाब मांगा है।