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Study: आकाशगंगा के सबसे पुराने तारा समूह बने शिव-शक्ति, दोनों की पहचान 12-13 अरब साल पुराने

Sat, 23 Mar 2024 06:21 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 23 Mar 2024 06:21 AM IST
सार

द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में छपे शोध के मुताबिक, इनकी पहचान से खगोलविद यह जान सकेंगे कि पहली आकाशगंगाएं कब बनना शुरू हुईं थीं। खगोलविदों के अनुसार अभी हम नहीं जानते कि हमारी आकाशगंगा का प्रारंभिक स्वरूप कैसा था।

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Star groups identified as 12-13 billion years old played an important role in formation of galaxy Shiva-Shakti
universe is humming - फोटो : iStock

विस्तार

मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी (जर्मनी) की शोध टीम ने हमारी आकाशगंगा के सबसे पुराने तारों के समूह की पहचान की है। अध्ययन की सह-लेखिका ख्याति मल्हान ने इन दो संरचनाओं को शक्ति और शिव नाम दिया है। ये तारे समूह 12-13 अरब साल पुराने हैं।  

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द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में छपे शोध के मुताबिक, इनकी पहचान से खगोलविद यह जान सकेंगे कि पहली आकाशगंगाएं कब बनना शुरू हुईं थीं। खगोलविदों के अनुसार अभी हम नहीं जानते कि हमारी आकाशगंगा का प्रारंभिक स्वरूप कैसा था। माना जाता है कि इनका निर्माण छोटी आकाशगंगाओं के विलय से हुआ, जिससे बड़े तारा समहू भी होते हैं। उन्होंने बताया कि जब आकाशगंगाएं टकराती हैं और उनमें स्थित तारा समूह आपस में मिल जाते हैं। 

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पुराने सितारे में धातु की मात्रा कम पाई गई
इस तारा समूह के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि दो अलग-अलग आकाशगंगाओं से मिलकर बनने वाले शक्ति और शिव सितारों की गति आकाशगंगा के केंद्र में स्थित सितारों की तुलना में अधिक थी। साथ ही इन सभी तारों में धातु की मात्रा कम थी, जो यह दर्शाता है कि इनका निर्माण बहुत समय पहले हुआ था। उन्होंने बताया कि हाल ही में बने तारों में भारी धात्विक तत्व अधिक होते हैं।

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शक्ति और शिव शुरुआती बड़े तारा समूह का करते हैं प्रतिनिधित्व
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में लिखा, शक्ति और शिव शुरुआती बड़े तारा समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं जो करीब 12 गीगा साल पहले बने हुए होंगे। एक गीगावर्ष में एक अरब वर्ष होते हैं। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी के अध्ययन के सह-लेखक हंस-वाल्टर रिक्स ने कहा कि शक्ति और शिव आकाशगंगा के केंद्र में शामिल होने वाले पहले दो सदस्य हो सकते हैं, जिन्होंने एक बड़ी आकाशगंगा के बनने में मदद की होगी।

जीएआईए उपग्रह के डाटा का इस्तेमाल कर जाना रासायनिक सरंचना
अपने विश्लेषण के लिए शोधकर्ताओं ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के जीएआईए उपग्रह के डाटा का उपयोग किया व इसे यूएस स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे के तारों के डाटासेट से जोड़ा। इसमें सितारों की रासायनिक संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी थी।

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