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स्टेनफोर्ड और आईआईटी के पूर्व छात्रों ने सार्वजनिक जगहों को कीटाणुरहित बनाने के लिए तैयार किया रोबोट
Tue, 12 May 2020 08:05 AM IST
अनवर अंसारी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 12 May 2020 08:05 AM IST
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'रोबो-सैपियन' रोबोट
- फोटो : ANI
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अस्पताल, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग मॉल्स और लगभग सभी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाकर उसे कीटाणुरहित बनाने के लिए एक रोबोट तैयार किया गया है। शोधकर्ताओं द्वारा कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एक लागत प्रभावी और सुरक्षित जल-आधारित तकनीक वाला यह रोबोट एक नया हथियार है।
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बड़ी जगहों को कीटाणुरहित बनाने के अपने प्रयास में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और स्टेनफोर्ड के पूर्व छात्रों की टीम ने एक नई प्रौद्योगिकी 'एयरलाइन्स माइनस कोरोना' तैयार किया है। इस डिवाइस के लिए बनाई गई तकनीक अणुओं के विद्युतीकरण के आधार पर काम करती है।
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दिल्ली स्थित कंपनी परसैपियन इनोवेशन के सह-संस्थापक और संस्थापक और स्टेनफोर्ड के पूर्व छात्र शशि रंजन ने एएनआई को बताया, 'चार्जर्ड या आयनीकृत पानी की बूंदें इसके प्रोटीन को मारकर वायरस को मार देंगी और इसलिए इसे अक्षम बना सकती है।'
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उन्होंने कहा, 'इस तरह के आयनीकृत पानी की बूंदें गैर-हानिकारक अणुओं में वायरल प्रोटीन के ऑक्सीकरण में मदद कर सकती हैं। ऑक्सीकरण सबसे शक्तिशाली रोगाणुरोधी उपकरणों में से एक है।'
ऐसे कई तरीके हो सकते हैं जिनके द्वारा वायरस को मारा जा सकता है। अल्कोहल (जैसे कि इथेनॉल या आईपीए) उनमें से एक है। अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइजर व्यक्तियों के लिए या छोटे पैमाने पर सतहों को साफ करने के लिए उपयोगी होता है लेकिन पानी इसके लिए सबसे सुरक्षित है। अन्य विकल्पों के विपरीत, पानी से मनुष्य की त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचता है।
'एयरलाइन्स माइनस कोरोना' 'वाटर इलेक्ट्रो एक्टीवेशन' तकनीक पर काम करता है और यह मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं है। इसके विपरीत वायरस को खत्म करने के लिए अन्य तकनीक जैसे पराबैंगनी किरणें या केमिकल का प्रयोग, मनुष्यों के लिए खतरनाक हो जाता है।
इसे 'रोबो-सैपियन' (एक बुद्धिमान रोबोट) के तौर पर तैयार किया गया है, जो उच्च इलेक्ट्रिक पावर की मदद से पानी को चार्ज कर देता है। इस चार्ज पानी का छिड़काव वायरल प्रोटीन को ऑक्सीकरण करता है, इससे गैर-हानिकारक अणु कम हो जाते हैं।
'एयरलाइन्स माइनस कोरोना' को 'नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज' (एनएबीएल) से प्रमाणन मिला है। एनएबीएल ने रोगाणु और रोगजनकों को निष्क्रिय करने या मारने के लिए उपकरण को गैर-विषैले और मानव के लिए सुरक्षित बताया है।
शशि रंजन के अलावा इसे तैयार करने वाली टीम में आईआईटी खड़गपुर के देब्यान साहा और आईआईटी रोपड़ के योगेश अग्रवाल भी शामिल हैं।