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Supreme Court: ‘कैदियों की भीड़ कम करने का समाधान हो सकती है खुली जेल’, बंदियों के पुनर्वास पर सुप्रीम टिप्पणी

Thu, 09 May 2024 05:35 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Thu, 09 May 2024 05:35 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कैदियों के पुनर्वास पर टिप्पणी करते हुए खुली जेलों का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा है कि खुली जेलों की मदद से कैदियों की अधिक भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है।

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stablishing open prisons can be solution to decongest jails: SC
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

देश की सर्वोच्च अदालत ने कैदियों के पुनर्वास पर टिप्पणी करते हुए खुली जेलों का सुझाव दिया है। अदालत ने कहा है कि खुली जेल की मदद से कैदियों की अधिक भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है। खुली या आंशिक रूप से खुली जेल में कैदियों को दिन के समय में परिसर के बाहर काम करने दिया जा सकता है, जिससे कि वह अपने जीवन यापन के लिए कुछ कमा सकें। इसके बाद काम निपटा कर शाम को सभी कैदी जेल में वापस लौट सकते हैं। 

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कैदियों की याचिका पर की गई सुनवाई
अदालत ने यह सुझाव इसलिए दिया क्योंकि कैदी भी समाज से जुड़ सकें और उनका मनोवैज्ञानिक दबाव कम हो सके। कैदियों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बी आर गवई और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि पूरे देश में खुली जेलों के प्रसार पर ध्यान देने की जरूरत है। पीठ ने कहा ‘राजस्थान में इस तरह की व्यवस्था है और इस पर कुशलता से काम किया जा रहा है। जेलों में भीड़ भाड़ को कम करने का सबसे अच्छा तरीका खुली जेल या खुले कैंप हैं। इससे भीड़भाड़ कम होगी और कैदियों के पुनर्वास की समस्या का भी समाधान होगा।

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पूरे देश की जेलों में एक समान प्रणाली हो- सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर पूरे देश में जेलों का एक समान प्रणाली हो तो कई चीजों को सुलझाया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्यवाही में खुली जेलों के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। इसका विस्तार करने की योजना बनाई जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खुली जेलों की प्रणाली को पूरे देश में अपनाया जाए। राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उन्होंने खुली जेलों पर सभी राज्यों से प्रतिक्रिया मांगी थी और उनमें से 24 ने जवाब दिया है। सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले में 16 मई को सुनवाई होगी।

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