SSC Recruitment Scam: अगर ईडी का तीर सही निशाने पर लगा, तो दीदी से 'पुराना' हिसाब चुकता कर सकती है भाजपा
SSC Recruitment Scam: सूत्रों के अनुसार, अब जल्द ही यह भी मालूम हो जाएगा कि बाकी का पैसा कहां लगाया गया है। पहले Arpita Mukherjee और बाद में जब Partha Chatterjee, जांच एजेंसी की पूछताछ के दायरे में आए तो इन दोनों की बातों ने काफी हद तक जांच एजेंसी की राह आसान बना दी है...
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पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (SSC Recruitment Scam) के कथित घोटाले की परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय 'ईडी' ने शनिवार को ममता सरकार के कैबिनेट मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) को कोलकाता स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी ने चटर्जी की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के आवास पर सर्च कर 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद की है। पार्थ चटर्जी, वर्तमान में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री हैं, जबकि एसएससी का घोटाला उस वक्त का है, जब वे ममता सरकार में शिक्षा मंत्री थे।
ईडी की कार्रवाई के बाद बंगाल की भाजपा इकाई के वरिष्ठ नेता सुवेंदू अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने कहा, ये तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है। जानकारों का कहना है कि अगर ईडी का तीर सही निशाने पर लगा है तो 'दीदी' यानी सीएम ममता बनर्जी से, भाजपा अपनी चुनावी हार का हिसाब चुकता कर सकती है। इसके अलावा देश में लंबे समय से सुनाई पड़ रही तीसरे मोर्चे की आहट, जिसमें ममता का अहम रोल बताया जाता है, वहां भी यह केस ममता को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है।
सीएम कार्यालय भी रडार पर
देश की दो केंद्रीय एजेंसियां, सीबीआई और ईडी, पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के कथित घोटाले की जांच कर रही हैं। सीबीआई ने पार्थ चटर्जी से कई बार पूछताछ की है। 25 अप्रैल और 18 मई को हुई पूछताछ में जांच एजेंसी को कुछ अहम बातें पता चली थीं। इसके बाद ईडी ने पार्थ चटर्जी और उनके कई सहयोगियों के ठिकानों पर छापा मारा। चूंकि इस मामले की कड़ी केवल चटर्जी पर आकर ही खत्म नहीं होती, बल्कि इसमें दर्जनों लोगों की भूमिका बताई गई है। ईडी के सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में अगर सीएम कार्यालय भी जांच के दायरे में आ जाए तो कोई हैरानी वाली बात नहीं होगी। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि एसएससी घोटाले का बाकी पैसा, कहां निवेश किया गया है। मुखौटा कंपनियों के एंगल को लेकर जल्द ही कुछ बड़ा खुलासा हो सकता है।
कर्मचारियों एवं शिक्षकों की भर्ती में जमकर सिफारिश
जांच एजेंसी द्वारा ममता सरकार में शामिल कई दूसरे मंत्रियों से भी पूछताछ की जा रही है। यहां भी दोनों एजेंसी एक साथ चल रही हैं। परेश अधिकारी के घर पर जांच एजेंसी की दस्तक हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के पूर्व सलाहकार शांति प्रसाद सिन्हा, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली और आठ अन्य आरोपियों के घरों पर सर्च की गई है। सीबीआई की प्रारंभिक जांच में इस बात के सबूत मिले थे कि पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग द्वारा की गई भर्ती में गड़बड़ी हुई है। राज्य के प्रायोजित व सहायता प्राप्त स्कूलों में समूह 'सी' और 'डी' के कर्मचारियों एवं शिक्षकों की भर्ती में जमकर सिफारिश चली है। इसमें कथित तौर पर पैसे का लेन-देन भी सामने आया था। इसके बाद ईडी ने इस मामले में जांच शुरू की थी। जब कैबिनेट मंत्री पार्थ चटर्जी की सहयोगी रही अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मामले की परतें खुलने लगीं। अर्पिता मुखर्जी के आवास से जो दो दर्जन मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, वह ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और उनकी पार्टी से जुड़े नेताओं के लिए एक बड़ी मुसीबत का संकेत है।
क्या बन पाएगा तीसरा मोर्चा?
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। अब जल्द ही यह भी मालूम हो जाएगा कि बाकी का पैसा कहां लगाया गया है। पहले अर्पिता मुखर्जी और बाद में जब पार्थ चटर्जी, जांच एजेंसी की पूछताछ के दायरे में आए तो इन दोनों की बातों ने काफी हद तक जांच एजेंसी की राह आसान बना दी। अब दूसरे मंत्रियों के अलावा सीएम कार्यालय पर एजेंसी की नजर है। देर-सवेर वहां के पूर्व अधिकारियों के यहां जांच एजेंसी सर्च कर सकती है। बताया गया है कि दो पूर्व अधिकारी अब रिटायर हो चुके हैं। उनसे भी पूछताछ की जाएगी। देर सवेर, ममता बनर्जी पर इस कथित घोटाले की आंच आ सकती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो ममता बनर्जी, केंद्र की विपक्ष की राजनीति में जिस तरह से अपनी बातों को आगे रख रही थी, वह राह मुश्किल हो जाएगी। खासतौर से 2024 के लिए तीसरे मोर्चे के गठन का प्रयास और कांग्रेस पार्टी को पीछे रखने के उनके प्रयासों को बड़ा धक्का लग सकता है।