फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Sri Sri's initiative for an out of court settlement is certainly good

अयोध्या मामले पर मौलाना मेहबूब बोले- शांति कायम करने के लिए सबको बोलने का अधिकार

Tue, 13 Mar 2018 05:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Updated Tue, 13 Mar 2018 05:21 PM IST
विज्ञापन
Sri Sri's initiative for an out of court settlement is certainly good
हाजी महबूब
बाबरी मस्जिद एसोसिएशन के सदस्य हाजी मेहबूब ने श्रीश्री रविशंकर की पहल की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट के बाहर वर्षों से लटका बाबरी मस्जिद और राम मंदिर का मामला निपट जाता है तो यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि शांति कायम करने के लिए सबको अपनी जिंदगी में जीने और बोलने का अधिकार प्राप्त है।   
विज्ञापन


बता दे कि इससे पहले बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि विवाद पर कोर्ट के बाहर मध्यस्थता का प्रयास कर रहे ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर को लेटर भेजकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ये साफ कर दिया कि इस दिशा में की जा रही उनकी कोशिशें एक तरफा है, इसलिए बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही मानेगा। इसके साथ ही बोर्ड ने श्रीश्री रविशंकर को यह भी कहा था कि वो दहशतगर्दों और समाज विरोधी ताकतों को उकसाने का काम कर रहे हैं। 
विज्ञापन


ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने ऑट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर को भेजे दो पेज के लेटर में कहा था कि हमें उम्मीद थी कि आप कोई ऐसा फॉर्मूला पेश करेंगे जो इंसाफ और कानून के मुताबिक होगा और उसकी बुनियाद पर बाबरी मस्जिद के पक्षकारों को सुलह का प्रस्ताव देंगे। अगर आप ऐसा करते तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड आपकी पहल का स्वागत करता। लेकिन हमें अफसोस है कि आपने ऐसा न करके सिर्फ मुसलमानों से अपने हक से पीछे हटने की मांग का रास्ता अपनाया। जो जाहिर है कि हमें न पहले कबूल था और न आज कबूल है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत का फैसला कुछ भी हो सकता है

Sri Sri's initiative for an out of court settlement is certainly good
babri masjid
उन्होंने कहा था कि हम जानते हैं कि हमारी दलीलें हद से ज्यादा मजबूत होने के बावजूद अदालत का फैसला कुछ भी हो सकता है। मगर इसके बाद भी हम साफ कहते हैं कि अदालत के आखिरी फैसले को मानेंगे और हमारा ख्याल है कि हमारे विरोधी पक्ष को भी यही रुख इख्तियार करना चाहिए। मौलाना वली रहमानी ने कहा कि अगर वो (दूसरे पक्षकार) मुल्क के कानून को मानते हैं और आप जैसे उन तमाम लोगों को जो अपना परिचय एक अमन पसंद आध्यात्मिक गुरु की हैसियत से कराते हैं तो किसी अच्छे फॉर्मूले की गैर मौजूदगी में दूसरे पक्ष को समझाना चाहिए कि वो भी अदालत के फैसले को माने।

साथ ही कहा कि हमारे लिए ज्यादा दुख और अफसोस की बात यह है कि आप भी उन्हीं की बोली बोल रहे हैं और मुल्क में भयानक कत्लेआम का जिक्र करके दहशतगर्द और समाज विरोधी ताकतों को उकसाने का काम कर रहे हैं। इसलिए आपसे यह गुजारिश करते हैं कि आप हिंदू भाईयों से और पूरे देश के लोगों से यह अपील करें कि वो अदालत के फैसले को कबूल कर लें। क्योंकि एक ऐसे देश में जहां पर अलग अलग धर्मों के मानने वाले रहते हों, ऐसे में बाबरी मस्जिद की मिल्कियत और बंटवारे के मामले में अदालत के फैसले को मानने से ही अमन कायम हो सकता है। इसलिए इस पर गंभीरता करें।

मौलाना वली रहमानी ने लेटर में यह भी कहा कि हमारे देश में एक तबका ऐसा है जो दहशतगर्दी और हैवानियत की तमाम हदों को पार कर रहा है और देश में नफरत और खौफ का माहौल बना रहा है। अच्छा होता कि आप जुल्म और जालिमों के खिलाफ आवाज बुलंद करते और गरीब व मजलूमों के मद्दगार बनकर देश और कौम के सामने आते। ऐसी ईमानदाराना कोशिश से मुल्क में भाईचारा और अमन कायम करने में वाकई मदद मिलती।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed