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Sri Lanka: सर्वदलीय बैठक को लेकर विपक्षी दलों में असमंजस; तमिलों के जातीय सुलह के मुद्दे पर होनी है अहम चर्चा

Tue, 25 Jul 2023 09:53 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 25 Jul 2023 09:53 PM IST
सार

श्रीलंकाई संसद में दूसरे सबसे बड़े विपक्षी समूह जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) ने इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। पार्टी ने कहा कि वे इसमें भाग नहीं लेंगे। वहीं, कुछ अन्य राजनीतिक दलों ने कहा कि वे भाग लेंगे। बैठक में शामिल होने वालों में पूर्व राष्ट्रपति  मैत्रीपाला सिरिसेना की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी भी शामिल है।

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Sri Lanka opposition divided over attending all-party meeting on reconciliation
रानिल विक्रमसिंघे - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

श्रीलंका में जातीय मुद्दे का समाधान खोजने की दिशा में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होने को लेकर विपक्ष बंटा हुआ है। दरअसल, राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने इस मुद्दे पर 26 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसे लेकर, सभी राजनीतिक दलों और स्वतंत्र समूहों के नेताओं को निमंत्रण दिया गया था। वहीं, कुछ विपक्षी दलों ने दावा किया है कि उन्हें बैठक के सटीक एजेंडे की जानकारी नहीं दी गई थी। बता दें कि इस बैठक का उद्देश्य द्वीप राष्ट्र में अल्पसंख्यक तमिलों के जातीय सुलह के जटिल मुद्दे को संबोधित करना है।

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बैठक को लेकर श्रीलंकाई संसद में मुख्य विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने कहा कि हमें बैठक के एजेंडे के बारे में सूचित नहीं किया गया है। बावजूद इसके, हम लोगों की खातिर इस बैठक में शामिल होंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी समागी जन बालवेगया (एसजेबी) ने सर्वदलीय बैठक से बाहर रहने के बारे में भी योजना बनाई है। अगर यह अल्पसंख्यक तमिलों के जातीय सुलह के जटिल मुद्दे को हल करने के वास्तविक प्रयास के बजाय राजनीतिक नौटंकी साबित हुई।
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वहीं, श्रीलंकाई संसद में दूसरे सबसे बड़े विपक्षी समूह जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) ने इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। पार्टी ने कहा कि वे इसमें भाग नहीं लेंगे। वहीं, कुछ अन्य राजनीतिक दलों ने कहा कि वे भाग लेंगे। बैठक में शामिल होने वालों में पूर्व राष्ट्रपति  मैत्रीपाला सिरिसेना की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी भी शामिल है।  
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यह सर्वदलीय बैठक तब होने जा रही है जबकि बीते सप्ताह राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने दो दिवसीय भारत यात्रा की थी। अपनी भारत यात्रा के दौरान विक्रमसिंघे ने प्रधानमंत्री को बताया था कि वे जातीय मुद्दे का समाधान ढूंढने और संविधान के तेरहवें संशोधन को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विक्रमसिंघे ने अपनी दिल्ली यात्रा से पहले प्रांतों को पुलिस शक्तियां दिए बिना सर्वदलीय सहमति से श्रीलंकाई संविधान में 13वें संशोधन (13ए) को पूर्ण रूप से लागू करने पर सहमति व्यक्त की थी।

 सर्वदलीय बैठक में श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों को और अधिकार देने के बारे में चर्चा की जाएगी। भारत श्रीलंका से आग्रह करता रहा है कि संविधान के तेरहवें संशोधन को लागू करे। यह संशोधन 1987 के भारत श्रीलंका के समझौते के बाद किया गया था जिसमें उत्तरी और पूर्वी प्रांतों को अधिकार दिए जाने के प्रावधान हैं।

 
प्रधानमंत्री मोदी ने विक्रमसिंघे के साथ बातचीत के दौरान उम्मीद जताई थी कि श्रीलंकाई नेता 13ए को लागू करने और प्रांतीय परिषद चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध होंगे। इस दौरान उन्होंने तमिलों के लिए सम्मान का जीवन सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।

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