स्टाइरीन के असर को कम करने के लिए टीबीसी का छिड़काव, तब हो पाया काबू
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रासायनिक संयंत्र से निकली जहरीली गैस ने बृहस्पतिवार को आसपास के कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। दरअसल, सुबह के समय हवा की रफ्तार कुछ ज्यादा ही थी, जिससे यह गैस तेजी से फैला। अधिकारियों का कहना है कि स्टाइरीन का फैलाव हवा की गति पर निर्भर करता है। फिलहाल, इस गैस के प्रभाव को कम करने के लिए 4-टर्ट-ब्यूटाइलकैटेकोल (टीबीसी) जैसे रासायनों का घंटों छिड़काव किया गया, तब जाकर इस पर काबू पाया जा सका।
विशाखापत्तनम के ज्वाइंट चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्टरीज जे शिव शंकर रेड्डी ने बताया कि स्टाइरीन जैसी गैस को बेअसर करने के लिए टीबीसी जैसे अवरोधक रासायनों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, यह पूरी तरह से स्टाइरीन के प्रभाव को खत्म नहीं कर पाता है, फिर भी यह काफी हद तक असर को कम कर देता है। अधिकारियों ने बताया कि स्टाइरीन गैस पांच किमी के दायरे में इसलिए भी फैल सका, क्योंकि हवा की गति बढ़ने के साथ ही यह तेजी से आगे बढ़ जाता है। दक्षिण कोरियाई कंपनी एलजी पॉलीमर में 350-400 कर्मचारी हैं, मगर अभी सिर्फ सुरक्षा गार्ड, मरम्मत के काम वाले समेत कुछ ही कर्मचारी आए थे।
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प्रशासन ने कहा, घरों में रहें और गीला मास्क पहनें: इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने लोगों को घरों में रहने और मुंह पर गीले कपडे़ का मास्क बनाकर लगाने की सलाह दी है। ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम ने लोगों से यह अपील करते हुए कहा कि सावधानी बरतें और घरों से निकलने की कोशिश न करें। गैस को बेअसर करने के लिए सार्वजनिक जगहों पर पानी का छिड़काव करें।
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